यहां हुआ था नारियल के अंडरगारमेंट का आविष्कार, जानें फायदे
स्किन केयर हो या हेल्दी डाइट, गृह प्रवेश हो या शादी, हर काम में श्रीफल यानी नारियल को शामिल किया जाता है। इस शुभ फल में कई पोषक तत्व हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि नारियल सिर्फ़ खाने या पूजा करने के ही काम नहीं आता। सस्टेनेबल फैशन के दौर में लोग अब इसे अंडरगारमेंट्स के रूप में भी पहन रहे हैं। आज यानी 2 सितंबर को वर्ल्ड कोकोनट डे है। इस मौके पर जानते हैं नारियल से कैसे बनते हैं अंडरगारमेंट्स और क्या है इसके फायदे:
<img class="alignnone wp-image-1342503" src="https://newsexpress24com.wpcomstaging.com/wp-content/uploads/2024/09/Puja-me-Nariyal-।avif” alt=”” width=”1089″ height=”735″ />
शादी और त्योहारों में लड़कियां पहनतीं
न्यूजीलैंड के पास 15 द्वीपों को मिलाकर बसे कुक आइलैंड में किसी की विवाह हो या तीज-त्योहार, हर खास मौके पर वहां की महिलाएं नारियल से बनी ब्रा पहनती हैं। इस तरह के गारमेंट यहां सदियों से पहने जा रहे हैं। यहां सूखे नारियल के 2 खोल को धागों और बीड्स से सजाकर ट्रेडिशनल ब्रा डिजाइन की जाती है। धीरे-धीरे यह यूनीक अंडरगारमेंट डिजाइन दुनिया में पॉपुलर होने लगा।
हवाई से आया आइडिया
नारियल से अंडरगारमेंट बनाने का आइडिया कहां से आया, इस पर कई मत हैं। कुछ लोग मानते हैं कि नारियल से अंडरगारमेंट्स बनाने का सिलसिला अमेरिका के हवाई आइलैंड से प्रारम्भ हुआ। वैसे हवाई एक कोस्टल क्षेत्र है इसलिए वहां नारियल के पेड़ खूब उगते हैं। इस वजह से वहां की आदिवासी स्त्रियों ने नारियल से ब्रा बनाना और पहनना प्रारम्भ किया। यहां नारियल के खोल से ही नहीं बल्कि उसके रेशों से भी अंडरगारमेंट बनने प्रारम्भ हुए। वहीं, कुछ एक्सपर्ट मानते हैं कि इसका ट्रेंड हॉलीवुड फिल्मों से प्रारम्भ हुआ।
महिलाओं के ही नहीं मर्दों के अंडरगारमेंट भी पॉपुलर
ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइट्स पर नारियल से बनने वाले स्त्रियों के अंडरगारमेंट्स के साथ ही मर्दों की अंडरवियर भी बहुत पॉपुलर हो रही हैं। लोग इन्हें पसंद भी कर रहे हैं। इन अंडरगारमेंट्स की मूल्य 1500 रुपए से प्रारम्भ होती है।
नारियल से बनता फैब्रिक
रिसर्चगेट वेबसाइट के अनुसार सूखे नारियल के घोल में एक्टिवेटेड कार्बन होता है। इसी से कोकोना नाम का नेचुरल फैब्रिक बनता है। यह फैब्रिक एंटीबैक्टीरियल होता है जो दुनिया में सबसे अधिक इंडोनेशिया की कोकोनट इंडस्ट्री से एक्सपोर्ट होता है।
नारियल के वेस्ट से बन रही पीरियड्स पैंटी
फैशन पॉल्यूशन को रोकने के लिए अब इकोफ्रेंडली ढंग अपनाए जा रहे हैं। इसी पहल को आगे बढ़ाते हुए अब फैशन इंडस्ट्री में नारियल के वेस्ट से पीरियड्स पैंटी भी बनाई जा रही हैं। कोकोनट से बन रहे फैब्रिक की पीरियड पैंटी लीकप्रूफ, स्किन फ्रेंडली और बैक्टीरिया फ्री हैं। इन्हें धोकर दोबारा भी इस्तेमाल किया जाता है। यह पैंटी बार-बार सैनिटरी पैड बदलने की टेंशन को तो दूर करती हैं, साथ ही पैसों की बचत भी करती हैं। वाटरप्रूफ होने की वजह से यह पैंटी उन स्त्रियों के लिए भी वरदान हैं जिन्हें यूरिन लीकेज की परेशानी है।
पसीने की बदबू ना सताए, टैनिंग से बचाए
कोकोनट फाइबर से बनने वाला फैब्रिक नमी को शीघ्र सोखता है और पसीने की बदबू को दूर करता है। यह सूरज की अल्ट्रा वायलेट किरणों से भी त्वचा को सुरक्षा देता है। इससे ना टैनिंग होती है और ना सन बर्न। गर्मियों के मौसम में इससे बने गारमेंट शरीर को ठंडा भी रखते हैं।
स्किन प्रॉब्लम में बेस्ट
साइंस डायरेक्ट जनरल के अनुसार जिन लोगों की स्किन सेंसिटिव होती है, उनकी त्वचा पर दाने, रैशेज या लाल चकत्ते होते हैं या जिन्हें कॉन्टेक्ट डर्मेटाइटिस, सिरोसिस, रिंगवर्म, एक्जिमा या ल्यूपस जैसी बीमारियां हैं, उनके लिए नारियल से बने अंडरगारमेंट सबसे बेस्ट हैं. यह फैब्रिक ना चुभता है और ना रोग को बढ़ाता है।
इंग्लैंड में हुआ नामकरण
नारियल को अंग्रेजी में ‘कोकोनट’ बोला जाता है। इसके नाम के पीछे बहुत दिलचस्प कहानी है। पुर्तगाल में एक पानी के जहाज को विदेश भेजा गया, जिसका नाम ‘कोको’ रखा। उन्होंने इसका नाम ‘कोको’ से इसलिए जोड़ा क्योंकि यह शब्द बदसूरत चेहरे और बेजान बालों के लिए इस्तेमाल होता था। जब यह शब्द इंग्लैंड पहुंचा तो इसके पीछे नट लगा दिया गया।
क्यों मनाया जाता है वर्ल्ड कोकोनट डे
लोगों के बीच नारियल के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए एशियन एंड पैसिफिक कोकोनट कम्युनिटी (APCC) ने 2 सितंबर 2009 में वर्ल्ड कोकोनट डे की आरंभ की। इसकी खेती से जुड़े किसानों को लाभ पहुंचाने के लिए भारत, मलेशिया, इंडोनेशिया, थाईलैंड, केन्या और वियतनाम में इस दिन को धूमधाम से मनाया जाता है।

