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शिक्षा को आसान भाषा में समझाने में डायट ने दिया है विशेष योगदान

वैसे तो डायट संस्थान को शिक्षा की नवाचारी के लिए जाना जाता है और शिक्षा को आसान भाषा में समझाने में डायट का विशेष सहयोग है लेकिन इस बार बागेश्वर के डायट में राज्य स्तरीय इंटर डायट कल्चरल मीट उमंग प्रोग्राम हो रहा है इसमें 13 जिला समेत कुमाऊं और गढ़वाल की संस्कृति के रंग बिखेरे जाएंगे लोकल 18 से खास वार्ता करते हुए कार्यक्रम के समन्वयक रवि कुमार जोशी बताते हैं कि कार्यक्रम का उद्देश्य उत्तराखंड की संस्कृति को संरक्षित करना है ताकि डायट संस्थानों में प्रशिक्षण ले रहे भावी शिक्षकों को उत्तराखंड के लोकगीतों, लोककला और लोक-संस्कृति के बारे में जानकारी हो

What is the purpose of education assessment and basic education 1694835602342

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कार्यक्रम का उद्देश्य
कार्यक्रम का उद्देश्य भावी शिक्षकों को इस प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से क्रिएटिव बनाना है, ताकि वे भविष्य में अपने विद्यालयों में भी इस प्रकार के कार्यक्रम करवा सकें और बच्चों को आसान भाषा में उत्तराखंड की लोक संस्कृति के बारे में बता सकें उमंग 2024 में राज्य के 13 जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों के 96 डीएलएड प्रशिक्षु और 30 शिक्षक इस समागम में पहुंचे दो दिवसीय कार्यक्रम में जहां एक तरफ अपनी संस्कृति के संरक्षण के लिए लोक गीत, लोक नृत्य, नृत्य नाटिका प्रस्तुत किए गए, तो दूसरी ओर पढ़ने- पढ़ाने की विधाओं के अनुसार बाल गीत, एजूकेशन थ्रू ड्रामा, समूह गीत आदि में प्रतिभागिता की गई

शिक्षकों और विद्यार्थियों का चहुंमुखी विकास
कार्यक्रम के समन्वयक रवि कुमार जोशी ने कहा कि विद्यालयी शिक्षा और प्रारंभिक शिक्षा में लोक संगीत, लोक नृत्य, नाटिकाओं, बाल गीतों, लोक कथाओं का विशेष महत्व है, इनके माध्यम से एक ओर विद्यार्थियों का चहुंमुखी विकास होता है, तो दूसरी ओर विद्यालय के विभिन्न आयोजनों के माध्यम बच्चे हर बार कुछ नया सीखते हैं प्रारंभिक शिक्षा के शिक्षकों को इन विधाओं में पारंगत होना और रूचि होना जरूरी है

उत्तराखंड की संस्कृति का संवर्धन जरूरी 
ऐसे सांस्कृतिक कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों से शिक्षक सरलता से घुल-मिल सकते हैं बच्चों में विषय वस्तु के प्रति रूचि जगा सकते हैं कुमाऊं यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रोफेसर दीवान सिंह ने बोला कि यह प्रतियोगिताएं हमें अपनी जड़ों से जुड़ना सिखाती हैं उन्होंने बोला कि संस्कृति का संरक्षण और संवर्धन करते हुए प्राप्त की गई शिक्षा से ही हम उत्तराखण्ड का भला कर सकते हैं

दर्शकों की उमड़ी भीड़ 
प्रथम दिवस में इस कार्यक्रम का 500 से अधिक दर्शकों ने आनंद लिया कार्यक्रम में अल्मोड़ा, चंपावत, नैनीताल, उधम सिंह नगर, पिथौरागढ़, चमोली, रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी, देहरादून और हरिद्वार डायट ने प्रतिभाग किया बागेश्वर डायट प्राचार्य दिनेश चन्द्र सती ने बोला कि इस कार्यक्रम से भावी प्रारंभिक शिक्षकों में गतिविधियों के प्रति रुचि जागृत होगी चरित्र विकास में भी ऐसे कार्यक्रमों की जरूरी किरदार होती है भविष्य में भी इस प्रकार के कार्यक्रमों को अहमियत दी जाएगी ताकि शिक्षकों और बच्चों दोनों आत्मीय विकास हो सके

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