पक्ष के दौरान भूलकर भी न करें ये गलतियाँ, वरना नाराज होंगे पितृ
सनातन धर्म में पितृ पक्ष विशेष महत्व रखता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, पितृ पक्ष भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा से प्रारंभ होता है। आश्विन मास की अमावस्या तिथि पर समाप्त हो जाता है। पितृ पक्ष में पितरों को याद कर सम्मान प्रदान किया जाता है। पितृपक्ष में लोग पितरों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण, पिंडदान और अन्य धार्मिक अनुष्ठान करते हैं।

अपने पूर्वजों की तृप्ति के लिए भोजन और जल अर्पित करते हैं। ब्राह्मणों को भोजन कराते हैं। उन्हें दान-दक्षिणा देकर पितरों की आत्मा की शांति की प्रार्थना करते हैं। इन दिनों बहुत से ऐसे कार्य है। जिन्हें करने से पितृ नाराज होते है। आइए उज्जैन के पंडित आनंद भारद्वाज से जानते है।
पितृ पक्ष में भूल से भी ना खरीदे यह सामान
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितृ पक्ष में नया सामान नहीं खरीदना चाहिए। पितृ पक्ष में शादी, सगाई, मुंडन और उपनयन जैसे मांगलिक कार्य वर्जित होते हैं। वहीं, इस अवधि में नए वस्त्र भी नहीं खरीदना चाहिए। क्योंकि, पितृ पक्ष में कपड़ों का दान पूर्वजों के लिए होता है। इस दौरान अन्न और वस्त्रों का दान करने से पूर्वज प्रसन्न होते हैं।
पितृ पक्ष में श्राद्ध का महत्व
पितृ पक्ष के दौरान पितरों के लिए सभी प्रकार के अनुष्ठान करने से पितृ गुनाह से मुक्ति मिलती है।पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इससे जीवन मे परेशानियों का अंत होता है।सुख-समृद्धि बढ़ती है। पितृ पक्ष मे हमारे पूर्वज स्वर्ग लोग से हमारे साथ समय बिताने आते है।
पितृ पक्ष की तिथिया
मंगलवार, 17 सितंबर- पूर्णिमा श्राद्ध
बुधवार, 18 सितंबर- प्रतिपदा श्राद्ध
गुरुवार, 19 सितंबर- द्वितीया श्राद्ध
शुक्रवार, 20 सितंबर- तृतीया श्राद्ध
शनिवार, 21 सितंबर- चतुर्थी श्राद्ध
रविवार, 22 सितंबर- पंचमी श्राद्ध
सोमवार, 23 सितंबर- षष्ठी श्राद्ध और सप्तमी श्राद्ध
मंगलवार, 24 सितंबर- अष्टमी श्राद्ध
बुधवार, 25 सितंबर, नवमी श्राद्ध
गुरुवार, 26 सितंबर- दशमी श्राद्ध
शुक्रवार, 27 सितंबर- एकादशी श्राद्ध
शनिवार, 29 सितंबर- द्वादशी श्राद्ध
रविवार, 30 सितंबर- त्रयोदशी श्राद्ध
सोमवार, 1 अक्टूबर- चतुर्दशी श्राद्ध
मंलगवार, 2 अक्टूबर- सर्व पितृ अमावस्या श्राद्ध

