लाइफ स्टाइल

नवरात्रि में साबूदाना डिशेज बनाते समय भूलकर भी न करें ये गलतियाँ

नवरात्रि के पावन दिनों में देवी मां के भक्त उनकी पूरे सच्चे मन से पूजा-आराधना करते हैं और साथ ही व्रत भी रखते हैं. व्रत रखते हुए वे खाने-पीने से जुड़े नियमों का पालन भी करते हैं. नवरात्रि के दिनों में लोग अनाज का परहेज करते हैं और कुट्टू के आटे और साबूदाना आदि का सेवन करते हैं. साबूदाना की सहायता से खीर से लेकर टिक्की तक कई तरह की डिशेज बनाई जाती हैं. साबूदाना ना सिर्फ़ ग्लूटन फ्री है, बल्कि इसमें कई तरह के विटामिन और मिनरल पाए जाते हैं जो आपकी स्वास्थ्य के लिए भी अच्छे हैं. हालांकि, यह देखने में आता है कि अक्सर साबूदाना बनाते समय लोग कुछ छोटी-छोटी गलतियां कर बैठते हैं, जिनसे आपको वास्तव में बचना चाहिए. तो चलिए आज इस लेख में हम आपको नवरात्रि में साबूदाना डिशेज बनाते समय की जाने वाली कुछ गलतियों के बारे में बता रहे हैं-
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बहुत अधिक हिलाना
चूंकि, साबूदाना स्टार्च से भरपूर होता है, और इसलिए जब आप उन्हें पकाते हैं तो वे अक्सर चिपक जाते हैं. लेकिन यदि आपको लगता है कि इन्हें लगातार हिलाने से वे चिपकेंगे नहीं तो आप गलत हैं. लगातार हिलाने से साबूदाना ज़्यादा स्टार्च छोड़ेगा, और आपकी पूरी डिश साबूदाना की एक गांठ में बदल जाएगी. इसलिए खिचड़ी या खीर पकाते समय कभी-कभी हिलाना ही काफी है.
तेज़ आंच पर पकाना
साबूदाना को अक्सर लोग तेज आंच पर पकाने की गलती करते हैं, लेकिन आपको ऐसा कभी भी नहीं करना चाहिए. इससे खाना असमान रूप से पकेगा और साबूदाना भी सतह पर चिपक जाएंगे या फिर वे जल जाएंगे. इसलिए, चाहे आप खिचड़ी, खीर, पराठा या खीर बना रहे हों, आपको साबूदाना को धीमी या मध्यम आंच पर पकाना चाहिए. इससे गांठें नहीं बनेंगी और वे चिपकेंगे नहीं.
सही तरह से ना भिगोना
जब आप साबूदाना बना रहे हैं तो उसे ठीक तरह से भिगोना बहुत महत्वपूर्ण है. मसलन, यदि आप एक कप साबूदाना से कुछ बनाने वाले हैं तो उसे 1.5 कप पानी में भिगोएँ. पर्याप्त पानी का इस्तेमाल न करने से भी साबूदाना का टेक्सचर खराब हो सकता है. इसके अलावा, आपको यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि आपने साबूदाना को कम से कम 4-6 घंटे या रात भर के लिए भिगोएं.

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