श्रावण पूर्णिमा पर करें सत्यनारायण कथा मिलेगा मनवांछित फल
सावन के महीने में आने वाली पूर्णिमा को श्रावण पूर्णिमा कहते हैं। इस बार आप श्रावण पूर्णिमा पर व्रत कर सकते हैं। 31 अगस्त को यह व्रत किया जाएगा। मान्यता है कि पूर्णिमा के व्रत में ईश्वर विष्णु की पूजा की जाती है, जबकि सावन पूर्णिमा पर ईश्वर विष्णु के साथ भोलेनाथ और मां पार्वती की पूजा भी की जाती है।
इस दिन चीटियों को आटा देना चाहिए या मछलियों को दाना देना चाहिए। वहीं शाम को सत्यनारायण की कथा करने से मनवांछित फल प्राप्त होता है। हिंदू पंचांग के मुताबिक इस साल सावन की पूर्णिमा पर भद्रा काल लग रहा है, जिसकी वजह से 30 अगस्त और 31 अगस्त को रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाएगा।
स्कंद पुराण कथा
ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक इस दिन शनि और गुरु वक्र रहेंगे। इस दिन रवि योग योग बन रहा है। ज्योतिषाचार्य पंडित उदय शंकर भट्ट ने जानकारी देते हुए बोला है कि प्राचीन काल में संक्रांति और प्रत्येक पूर्णमासी के दिन सत्यनारायण की कथा हुआ करती थी। उन्होंने कहा कि सत्यनारायण से तात्पर्य है कि इस भूलोक का सत्य मौत है। उन्होंने कहा कि सत्यनारायण की कथा मानव जीवन की कथा है। यह स्कंद पुराण से ली गई कथा है।
सत्यनारायण का अर्थ
उन्होंने कहा कि इस कथा में चरित्रों के माध्यम से समझाया जाता है कि जीवन हमें किस तरह से जीना चाहिए। सत्यनारायण का अर्थ इसी में छिपा है, जिसमें सत्य मृत्यु, नर- जल जो जीवन का आधार है और मानव के शुक्राणु को जीवित रखने के लिए इस कथा का अनुमओदन किया जाता है।
जीवन में सकारात्मकता आती है
उन्होंने आगे कहा कि सत्यनारायण की कथा मौत को सम्मुख रखकर जीवन जीने को कहती है, जबकि आदमी अपने भौतिकवाद को ऊपर रखकर जीवन को भूल जाता है। कई बार भौतिकवाद और जीवन की सुख सुविधाओं के लिए गलत रास्ते भी अपनाता है जो गलत है। शाम के समय सत्यनारायण की कथा करना बहुत अच्छा माना जाता है। इससे जीवन मे सकारात्मकता आती है।

