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क्या सच में सलाखों के पीछे मिलता है VIP ट्रीटमेंट, जानें कितनी तरह की होती हैं जेल…

Does high profile prisoner get vip treatment: पूर्व पीएम एचडी देवेगौड़ा के पोते प्रज्वल रेवन्ना को घरेलू नौकरानी से दुष्कर्म समेत कई गंभीर मामलों में न्यायालय ने कर्नाटक की न्यायालय ने जीवन भर जेल की सजा सुनाई है. सजा सुने जाने के बाद प्रज्वल को परप्पना अग्रहारा सेंट्रल कारावास भेजा है. कर्नाटक के खास सियासी परिवार का हिस्सा होने के कारण प्रज्वल का मुद्दा खासी चर्चा में है. सजा प्राप्त प्रज्वल स्वयं एमपी रहा है. उसके पिता एमएलए और चाचा कुमार स्वामी केंद्र में मंत्री हैं. प्रज्वल के दादा पूर्व पीएम हैं.

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जब कोई हाई-प्रोफाइल व्यक्ति, चाहे वह राजनेता हो, अदाकार हो या कोई बड़ा कारोबारी, कारावास जाता है तो एक प्रश्न अक्सर उठता है कि क्या उसे कारावास में आम कैदियों की तरह ही रखा जाता है? क्या हिंदुस्तान में जेलों के भीतर “VIP सुविधाएं” जैसी कोई प्रबंध है? आइये जानते हैं राष्ट्र में कितनी तरह की जेले हैं, किस तरह के कैदी को कहां रखा जाता है? उसका कैदी का नंबर कैसे तय होता है? आइए, इस पूरे सिस्टम को गहराई से समझते हैं.

क्या वाकई मिलती हैं VIP सुविधाएं?
कानूनी तौर पर, हिंदुस्तान में सभी कैदी समान हैं. लेकिन, कारावास नियमावली और कुछ विशेष परिस्थितियों के अनुसार कुछ कैदियों को अलग सुविधाएं दी जा सकती हैं. इसे VIP ट्रीटमेंट नहीं, बल्कि एक ‘सुपीरियर क्लास’ की प्रबंध बोला जाता है.

सुपीरियर क्लास की सुविधाएं:

  • जेल मैनुअल के अनुसार, पूर्व केंद्रीय मंत्री, सांसद, विधायक, या उच्च सामाजिक-आर्थिक स्थिति वाले कुछ कैदियों को ‘सुपीरियर क्लास’ के लिए आवेदन करने का अधिकार है.
  • इस क्लास के कैदियों को सामान्य कैदियों से अलग रखा जाता है, अक्सर एक अलग सेल में. इसका मुख्य कारण उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना होता है, क्योंकि आम कैदियों के बीच उनकी जान को खतरा हो सकता है.
  • इन सुविधाओं में एक लकड़ी का तख्त, मेज, कुर्सी, मच्छरदानी, सूती चादर, और अखबार शामिल हो सकते हैं.
  • कुछ मामलों में, उन्हें कूलर, किताबें, और घर का बना खाना या कारावास के अंदर अलग से खाना बनवाने की सुविधा भी दी जा सकती है. हालांकि, यह सब कानूनी प्रक्रिया और न्यायालय के आदेश पर ही होता है.
  • इसके विपरीत, आम कैदियों को सोने के लिए केवल दरी और कंबल दिया जाता है, और उन्हें बाहर का खाना लाने या बनवाने की अनुमति नहीं होती.

यह जरूरी है कि ये सुविधाएं कैदी की सामाजिक स्थिति के आधार पर दी जाती हैं, न कि क्राइम की प्रकृति के आधार पर.

भारत में कितनी तरह की जेलें होती हैं?
भारत की कारावास प्रबंध को मोटे तौर पर आठ प्रकारों में बांटा गया है, जिनका प्रबंधन और प्रशासन राज्य सरकारों के अधिकार क्षेत्र में आता है:
1. केंद्रीय कारावास (Central Jails): ये सबसे बड़ी जेलें होती हैं, जहां दो वर्ष से अधिक की सज़ा वाले कैदियों को रखा जाता है.
2. जिला कारावास (District Jails): ये राज्यों में सबसे अधिक होती हैं और यहां उन कैदियों को रखा जाता है जिनकी सज़ा कम होती है या जिन पर अभी केस चल रहा है.
3. उप कारावास (Sub Jails): ये छोटी जेलें होती हैं जो तहसील स्तर पर स्थित होती हैं.
4. स्त्री कारावास (Women Jails): ये विशेष रूप से स्त्री कैदियों के लिए होती हैं.
5. खुली कारावास (Open Jails): ये उन कैदियों के लिए होती हैं जिनका आचरण अच्छा होता है. यहां कैदी खेती जैसे काम कर सकते हैं और उन्हें दिन में बाहर जाने की भी अनुमति मिल सकती है.
6. बाल सुधार गृह (Borstal Schools): बाल सुधार गृह भी मूलतः कारावास ही हैं लेकिन इन्हें सुधार गृह कहकर संबोधित करने से लिखने में इस्तेमाल किया जाता है क्योंकि यहां किशोर क्रिमिनल रखे जाते हैं जहां सुधारात्मक शिक्षा और प्रशिक्षण पर बल दिया जाता है
7. विशेष कारावास (Special Jails): ये विशेष प्रकार के कैदियों, जैसे आतंकियों या सियासी बंदियों के लिए होती हैं.
8. अन्य कारावास (Other Jails): इसमें विभिन्न प्रकार की छोटी जेलें शामिल हैं.

कैसे तय होता है कैदी नंबर?
जब कोई आदमी कारावास में प्रवेश करता है, तो उसकी पहचान बदल जाती है. उसका नाम, धर्म और सामाजिक स्थिति पीछे छूट जाती है, और उसे एक कैदी नंबर दिया जाता है. यह नंबर उसकी नयी पहचान बन जाता है. यह नंबर एक विशेष पैटर्न पर आधारित होता है. यह केवल एक संख्या नहीं, बल्कि कैदी की पहचान का एक जरूरी हिस्सा होता है, जो पूरी कारावास प्रणाली को व्यवस्थित रखने में सहायता करता है. यह नंबर आमतौर पर तीन हिस्सों में बंटा होता है:
1. कारावास का कोड (Jail Code): यह कोड बताता है कि कैदी को किस कारावास में रखा गया है. जैसे, आपके उदाहरण में DL का मतलब दिल्ली कारावास है. यह कोड हर कारावास के लिए भिन्न-भिन्न होता है, जिससे रिकॉर्ड रखना आसान हो जाता है.
2. दाखिल होने का साल (Year of Admission): यह हिस्सा बताता है कि कैदी को किस वर्ष कारावास में दाखिल किया गया. उदाहरण के लिए, 2025 का मतलब है कि कैदी को 2025 में कारावास लाया गया था. यह कारावास प्रशासन को यह जानने में सहायता करता है कि कैदी कितने समय से कारावास में है.
3. क्रम संख्या (Serial Number): यह उस वर्ष में दाखिल होने वाले कैदियों की क्रम संख्या होती है. आपके उदाहरण में 123 का मतलब है कि वह उस वर्ष दिल्ली कारावास में दाखिल होने वाला 123वां कैदी था.
इस तरह, DL/2025/123 जैसे नंबर से कारावास प्रशासन को तुरंत कैदी के बारे में कुछ मूलभूत जानकारी मिल जाती है.
यह नंबर बहुत जरूरी होता है क्योंकि यह कैदी के सभी रिकॉर्ड, जैसे उसके मुकदमा फाइल, स्वास्थ्य रिकॉर्ड, और न्यायालय की सुनवाई की तारीखों को ट्रैक करने में सहायता करता है


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