पूर्णिमा के दिन इस उपाय को करने से शांत होती है पितरों की भटकती हुई आत्मा
वर्ष में होने वाली सभी पूर्णिमा बहुत ही खास और विशेष फल प्रदान करने वाली होती है। पूर्णिमा के दिन स्नान और दान करने का महत्व कहा गया है। हिंदू धार्मिक ग्रंथो के मुताबिक वर्ष में कुल 12 पूर्णिमा का आगमन मानव कल्याण के लिए होता है। पूर्णिमा के दिन पवित्र जल से स्नान करने, पूजा पाठ धार्मिक अनुष्ठान और पितरों को जलांजलि तिलांजलि देने का महत्व होता है। हिंदू कैलेंडर का दूसरा महीना वैशाख मास भगवान विष्णु को समर्पित कहा गया है। इस मास में विष्णु भगवान के निमित्त व्रत, अनुष्ठान, सत्यनारायण कथा करने का महत्व होता है। इस दिन प्रेत योनि में भटक रहे पितरों को मोक्ष देने के लिए विशेष तरीका करने पर विशेष फल की प्राप्ति होती है।

वैशाख पूर्णिमा पर किस तरीका से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होगी इस तरीका के बारे में अधिक जानकारी देते हुए हरिद्वार के विद्वान ज्योतिषी पंडित श्रीधर शास्त्री बताते हैं कि वर्ष भर में होने वाली सभी पूर्णिमा का भिन्न-भिन्न महत्व होता है। वैशाख मास हिंदू कैलेंडर का दूसरा महीना होता है जो विष्णु भगवान को समर्पित है। वैशाख पूर्णिमा के दिन पीपल के नीचे देसी घी का दिया जलाने पर प्रेत योनि में भटक रहे पितरों को शांति मिलती है। पीपल के पेड़ में ब्रह्मा, विष्णु और महेश (शिव) का वास कहा गया है। वैशाख मास विष्णु भगवान को समर्पित होता है इसलिए वैशाख पूर्णिमा के दिन घी का दिया जलाने के बाद विष्णु भगवान और माता लक्ष्मी के वैदिक मंत्र का जाप किया जाए तो पितरों की आत्मा को शांति मिलती है।
धार्मिक ग्रंथो के मुताबिक वैशाख पूर्णिमा के दिन यह तरीका करने से पूर्व धार्मिक स्थल पर पवित्र जल से स्नान करने और भगवान विष्णु के स्तोत्र, मंत्र आदि का पाठ करना चाहिए। पीपल के नीचे देसी घी का दिया शाम को संध्या काल के समय जलाना चाहिए और विष्णु भगवान, माता लक्ष्मी के वैदिक मंत्र का जब अपनी सामर्थ्य के मुताबिक 108, 1008, 2100, 3100, 5100, 21000, 31000, 51000 आदि बार करने पर पितरों की आत्मा को भगवान विष्णु की कृपा से मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है। यदि साधक द्वारा इस दिन तामसिक वस्तुएं शराब, मांस आदि का सेवन किया जाता है तो इसके उल्टा फल की प्राप्ति होती है।
वैदिक मंत्र
ॐ नमो नारायणाय (विष्णु भगवान)
ॐ विष्णवे नमः (विष्णु भगवान)
ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मीभ्यो नमः

