अक्टूबर में ग्रहण, खाने-पीने की चीजें ऐसे नहीं होंगी दूषित
इस बार अक्टूबर का महीना दो ग्रहण लेकर आ रहा है। एक सूर्य ग्रहण और दूसरा चंद्र ग्रहण। सूर्य ग्रहण 14 अक्टूबर को हैं, जो इस बार हिंदुस्तान में दिखाई नहीं देगा, यह अमेरिका के कई इलाकों में रिंग ऑफ फायर की तरह दिखा देगा। लेकिन हिंदुस्तान में इसका असर न के बराबर है। इसलिए सूर्य ग्रहण को लेकर अधिक परेशानी नहीं है, लेकिन 28 अक्टूबर को शरद पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण लग रहा है। यह ग्रहण हिंदुस्तान में दिखाई देगा और इसका सूतक काल भी मान्य होगा।

Lunar Eclipse sutak niyam:आपको बता दें कि धर्मशास्त्रों में सूतक को लेकर कई नियम बताए गए हैं। चंद्र ग्रहण का सूतक 28 अक्टूबर की शाम से ही प्रारम्भ हो जाएगा, शाम 4 बजे से सूतक के नियमों का पालन करना होगा। इस दौरान कई मंदिर बंद रहेंगे। मंदिरों के पट सूतक लगने से ही बंद कर दिए जाते हैं। मंदिर मे सूतक प्रारंभ हो जाने के बाद मूर्ति स्पर्श नहीं करना चाहिए, अपने घर में भी मंदिर के पट बंद कर दें और ईश्वर की मूर्ति को न छुएं। अनावश्यक खाना-पीना, सोना और नाखून काटना आदि नहीं करें। इसके अतिरिक्त इस समय में किसी के साथ झूठ, वाद टकराव आदि से भी दूर रहने की प्रयास करनी चाहिए। सूतक काल में बालक, वृद्ध, बीमार तथा गर्भवती महिलाओं के लिए पानी पीने और दवाई लेने के बारे में नियम नहीं हैं, इन लोगों को दवाई और जल ग्रहण करने पर कोई गुनाह नहीं लगता है।
अगर इस दिन खाना पहले से ही बना लिया है, तो ग्रहण के बाद इसे नहीं खाना चाहिए, क्योंकि यह दूषित हो जाता है। कटी हुई सब्जी या फल ग्रहण काल में दूषित हो जाते हैं, उन्हें खाना नहीं चाहिए। यदि खाने पीने की चीजों रखनी ही हैं, तो उनमें कुशा या तुलसी दल रखना चाहिए।
ज्योतिषियों की मानें तो ऑयल या घी से पक्का अन्न, घी, तेल, दूध, दही, लस्सी, पनीर, आचार, चटनी और मुरब्बा में ऑयल या कुशा रख देने से दूषित नहीं होते हैं। वहीं, सूखे खाद्य पदार्थों यथा गेहूं, चन्ना, दाल, आटा, चीनी आदि में कुशा या तुलसी का पत्ता रखने की आवश्यकता नहीं होती है।

