सेब की खेती से कमाएं मोटा मुनाफा, जानें देखभाल का तरीका
जहां कश्मीर और हिमाचल प्रदेश की पहचान सेब उत्पादन से होती है। वहीं अब बागेश्वर जिले के सात रतबे गांव में भी इसकी खुशबू फैलने लगी है। दरअसल गांव के किसान दरबान सिंह परिहार ने मार्च माह में अपनी पांच भूमि पर सेब के पौधे लगाए थे, जो अब सफल उत्पादन दे रहे हैं। यह सेब कश्मीर और हिमाचल के बागानों जैसा स्वाद और गुणवत्ता लिए हुए है। दरबान सिंह ने लोकल 18 से बोला कि उन्होंने पौधों की रोपाई के बाद नियमित रूप से जैविक खाद का प्रयोग किया और आवश्यकता के मुताबिक कीटनाशक दवाइयों का भी इस्तेमाल करें। समय-समय पर पौधों की छंटाई और देखभाल की गई।

सबसे जरूरी बात तापमान और नमी का संतुलन बनाए रखना था। जिससे फल का आकार और रंग दोनों उत्तम बने। किसान परिहार की यह पहल क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बन रही है। वैज्ञानिक पद्धति से खेती की जाए तो पहाड़ी जिलों में भी सेब उत्पादन को बढ़ावा दिया जा सकता है। इससे किसानों की आमदनी में गौरतलब वृद्धि संभव है। इन्हीं टिप्स को अपनाकर जिले में पहली बार 90 क्विंटल सेब का उत्पादन हुआ है। अब भी करीब 10 क्विंटल तक सेब की तुड़ाई होनी बाकी है।
नियमित रूप से करें जैविक खाद का प्रयोग
वर्तमान में जिले के विभिन्न स्थानों में किसान सेब की एम नाइन और एम 111 प्रजाति की रूट स्ट्रोक आधारित बागवानी कर सेब का उत्पादन कर रहे हैं। जिसके अनुसार 1300 मीटर से अधिक की ऊंचाई वाले स्थानों में किंग रोट, गेल गाला, रेड लम गाला, जैरो माइन, ग्रेविस स्मिथ किस्में का उत्पादन हो रहा है। 1300 मीटर से कम ऊंचाई वाले बमराड़ी में हरमन 99 प्रजाति का उत्पादन हो रहा है। इस सेब की बाजार में मूल्य 200-250 रुपये प्रति किलोग्राम है। वर्तमान में बागेश्वर तहसील के सात रतबे, बमराड़ी, गरुड़ के कौसानी, कपकोट के झूनी-खलझूनी, बघर, पिंडर घाटी, बड़ी पन्याली और काफलीगैर के पंतगांव, बांजगांव में सेब की पैदावार हो रही है। पांच वर्ष पहले तक सिर्फ़ कपकोट के ऊंचाई वाले इलाकों में ही सेब की पैदावार होती है। पिछले वर्ष जिले में सेब का उत्पादन 30-35 कुंतल रहा। इस साल सात रतबे में किसान दरबान सिंह परिहार के बागानों में अच्छी पैदावार होने से उत्पादन में 55 से प्रतिशत की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है।
उद्यान विभाग करेगा मदद
बागेश्वर के वरिष्ठ उद्यान निरीक्षक कुलदीप जोशी ने कहा कि इच्छुक किसान नए बगीचे लगाने के लिए उद्यान विभाग में आवेदन कर सकते हैं। विभाग की ओर से पांच से 20 नाली की भूमि में 60 प्रतिशत आर्थिक सहायता पर बगीचे लगाने की योजना वर्तमान में चलाई जा रही है। इसके अनुसार किसानों की भूमि का जलवायु परीक्षण कर उनके सेब के बगीचे तैयार किए जाते हैं। इधर, जिला उद्यान अधिकारी हरीश राम आर्या ने कहा कि जिले में सेब का उत्पादन अभी शुरूआती कोशिश हैं। जिसमें विभाग और किसानों को कामयाबी मिल रही है। आगे भी जिले में उत्पादन को बढ़ाने के लिए कोशिश किए जा रहे हैं। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में छोटे किसानों को भी मुफ़्त पौधे वितरित कर योजना से लाभांवित किया जाएगा। बड़े बगीचे लगाने के लिए भी किसानों को प्रोत्साहित किया जाएगा। जिले के सात-रतबे गांव के निवासी दरबान सिंह परिहार ने सेब उत्पादन में बेहतरीन कार्य किया है।

