Farming tips: बिना खाद और बिना केमिकल के बेहद कम लागत में पाएं तगड़ा मुनाफा, जानें तरीका
पारंपरिक खेती के मुकाबले अब किसान सह-फसली खेती और जैविक पद्धतियों की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं। यह परिवर्तन न केवल पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि आर्थिक रूप से भी लाभ वाला साबित हो रहा है। किसानों को कम लागत में बेहतर उत्पादन और अधिक फायदा मिल रहा है।

सब्जियों की बढ़ी मांग
आजकल हरी सब्जियों की बाजार में सालभर मांग बनी रहती है। ऐसे में किसान एक ही खेत में कई सब्जियां उगाकर लाखों की कमाई कर रहे हैं। जैविक उपायों से उत्पादन होने पर लागत घटती है, गुणवत्ता बढ़ती है। जिससे बाजार में इन्हें अच्छे मूल्य मिलते हैं।
बाराबंकी के किसान की कामयाबी की कहानी
जनपद बाराबंकी के बड़ेल गांव के किसान कुलदीप सिंह यादव ने सह-फसली और जैविक खेती के दम पर नया कीर्तिमान रच दिया है। वे दो बीघे जमीन में लोबिया, ककड़ी, करेला, लौकी जैसी कई फसलें एक साथ उगाते हैं। उन्होंने कहा कि केवल एक फसल से उन्हें 90 हजार से 1 लाख रुपये तक का फायदा हो जाता है।
स्वाद और स्वास्थ्य दोनों का ख्याल
कुलदीप सिंह यादव कहते हैं, “हम जैविक खेती में किसी भी तरह के रासायनिक खाद या कीटनाशकों का इस्तेमाल नहीं करते। हमारी सब्जियां पूरी तरह शुद्ध और स्वादिष्ट होती हैं। गर्मियों में लोबिया और ककड़ी की मांग अधिक रहती है, इसलिए दर भी बेहतर मिलते हैं।”
खेती की आसान विधि और तेज लाभ
सह-फसली खेती की प्रक्रिया बहुत आसान है। पहले खेत की जुताई कर उसे समतल किया जाता है। फिर जैविक खाद और जीवामृत का छिड़काव कर मेड बनाकर बीजों की बुआई होती है। 10 से 15 दिन में पौधे निकल आते हैं और नियमित सिंचाई से महज 55-60 दिनों में फसल तैयार हो जाती है।

