लाइफ स्टाइल

फ्लडलाइटिंग जैसी स्थिति से बचने के लिए अपनाएं ये आसान तरीके

What is floodlighting: आज की जनरेशन डेटिंग पर अधिक विश्वास करती है दरअसल सोशल मीडिया और डेटिंग ऐप्स उन्हें कई पार्टनर के ऑप्शन देते हैं महत्वपूर्ण नहीं कि जिसको डेट किया जाए, उससे लंबे समय तक रिलेशनशिप चले युवाओं की बदलती पसंद के चलते रिलेशनशिप के नए-नए नामकरण हो रहे हैं आजकल फ्लड लाइटिंग ट्रेंड में है लेकिन यह रिलेशनशिप में रेड फ्लैग है

Aanchal 2025 03 04t160225. 305

WhatsApp Group Join Now

फ्लडलाइटिंग को समझें
रिलेशनशिप एक्सपर्ट मुदिता गुलाटी कहती हैं कि फ्लडलाइटिंग डेटिंग की आरंभ का समय है इसमें आदमी पार्टनर की अटेंशन पाने के लिए अपनी छोटी-छोटी बातें शेयर करने लगता है वह एक ही मुलाकात में अपने बचपन की खराब यादें, टॉर्चर, कोई सदमा या पैरेंट्स से संबंध जैसे हर बात की ओवरशेयरिंग कर देता है 

क्यों है खतरनाक
व्यक्ति जो अपने पार्टनर से बातें शेयर करता है, वह महत्वपूर्ण नहीं सच हो कई लोग झूठी बातें बनाकर सामने वाले की सहानुभूति पाने के लिए यह सब करते हैं यह रिश्ता मैनिपुलेटिव डेटिंग का हिस्सा है यानी पार्टनर के दिमाग पर कब्जा करने की प्रयास की जाती है इससे रिलेशनशिप में विश्वासघात भी मिलने का डर होता है क्योंकि इसमें एक आदमी दूसरे आदमी से इमोशनली कनेक्ट हो जाता है जबकि दूसरा गेम खेल रहा होता है

मेंटल प्रेशर बढ़ता है
जब आदमी डेट करने वाले शख्स से इमोशनल होने की प्रयास करता है तो वह उन्हें महसूस कराता है कि उनका पार्टनर उनके लिए बहुत खास है और वह उसे कभी नहीं छोड़ेंगे ऐसे में पार्टनर पर मेंटल प्रेशर बढ़ जाता है क्योंकि वह सोचते हैं कि वह अपने प्यार को कभी अकेला नहीं छोड़ेंगे वह इस बात से अनजान रहते हैं कि सामने वाला आदमी उन्हें इमोशनल ढंग से कंट्रोल कर रहा है  

रिश्ता नहीं होता मजबूत
कुछ लोग डेटिंग के दौरान विक्टिम बन जाते हैं उन्हें लगता है कि यदि वह अपनी पर्सनल बातें शेयर करेंगे तो उनका रिलेशनशिप मजबूत बन जाएगा जबकि ऐसा नहीं होता पहली मुलाकात में इस तरह की बातें सामने वाले को चिड़चिड़ा बना सकती हैं या उनकी छवि को नेगेटिव आदमी बना सकती है कई बार लोग इस तरह की बातें सुनकर रिलेशनशिप में थका हुआ महसूस करते हैं 

ऐसे लोगों को पहचानना जरूरी
रिलेशनशिप में आपसी समझ और रिस्पेक्ट महत्वपूर्ण है फ्लडलाइटिंग में एक ही आदमी सोचता है कि उसे समझा जाए, उससे प्यार किया जाए जबकि वह स्वयं दूसरे आदमी को नहीं समझना चाहता वह सिर्फ़ अपनी बात बोलना चाहता है ऐसे लोग अटेंशन पाना चाहते हैं और सेल्फिश भी होते ऐसे लोगों से सहानुभूति रखें लेकिन अपना दायरा भी बनाकर रखें ऐसे लोग घातक भी साबित हो सकते हैं इसलिए उनसे इमोशनली अटैच ना हों कई बार ऐसे लोग मानसिक रोग का भी शिकार होते हैं   

Back to top button