प्रयागराज। अक्सर आभूषण, घर की सजावट, नहाने-धोने के लिए प्रयोग किए जाने वाले पाउडर और साबुन में विभिन्न प्रकार की मिलावट देखी जाती है, लेकिन बहुत कम लोगों को पता होता है कि इन सभी चीजों में एक पत्थर इतना कीमती हो सकता है कि उसका इस्तेमाल किया जा सके। जी हां, गोरा पत्थर ऐसा पत्थर है जिसकी उपयोगिता मानव जीवन में बहुत अधिक है। इस पत्थर से न सिर्फ़ मंदिरों की मूर्तियां बनाई जाती हैं, बल्कि घर की सजावट के सामान और आभूषण भी तैयार किए जाते हैं। इसके साथ ही, इसी पत्थर को पीसकर पाउडर और साबुन में भी प्रयोग किया जाता है। जब एक पत्थर की इतनी उपयोगिता हो और लोगों को इसके बारे में जानकारी मिल जाए, तो संभव है कि लोग इसे समाप्त करने पर ही लग जाएं।

UP के इस जिले में मिलता है गोरा पत्थर
ऐसे कीमती धातु के बारे में यदि लोगों को ठीक जानकारी मिल जाए तो वे इस पर टूट पड़ेंगे। यही वजह है कि गवर्नमेंट ने महोबा जिले में पाए जाने वाले इस कीमती पत्थर – गोरा पत्थर – के खनन पर प्रतिबंध लगा दिया है। व्यापारियों ने कहा कि महोबा जिले में करीब 14 एकड़ में फैले गोरा पत्थर के पहाड़ पर गवर्नमेंट ने खनन की मनाही कर दी है। खास बात यह है कि इस पत्थर को भौगोलिक संकेतक यानी जीआई टैग भी मिल चुका है। इस दुर्लभ और कीमती पत्थर को अंग्रेजी में पिरोफ्लाइट बोला जाता है, जबकि कुछ जगहों पर इसे डायसपोरा के नाम से भी जाना जाता है। कालीदीन विश्वकर्मा बताते हैं कि गोरा पत्थर का इस्तेमाल घर की सजावट, बर्तन और आभूषण बनाने के लिए किया जाता है। वहीं, इसकी घटिया प्रजाति को मशीन में पीसकर डिटर्जेंट पाउडर में मिलाया जाता है।
500 से 5000 तक की मिलती है बनी हुई चीज
इस पत्थर के प्रयोग से कीमती बर्तन, आभूषण, मंदिर, मूर्तियां और अन्य सजावटी सामान बनाए जाते हैं। कालीदीन विश्वकर्मा बताते हैं कि 5 इंच के मंदिर की मूल्य 500 रुपए होती है, जबकि बड़े आकार के मंदिर की मूल्य 5000 रुपए तक होती है। गोरा पत्थर से बनी मूर्तियों के कारोबार को लेकर उन्हें नेशनल अवार्ड भी मिल चुका है, साथ ही, यूपी गवर्नमेंट की ओर से भी सम्मानित किया जा चुका है। उनका पूरा परिवार गोरा पत्थर के ही व्यवसाय में लगा हुआ है और यही उनकी पहचान बन चुकी है। वह प्रयागराज सहित राष्ट्र के विभिन्न जिलों में गोरा पत्थर के स्टॉल लगाकर इसे लोगों तक पहुंचाते हैं।