इस मंदिर में कदम रखने मात्र से ही जीवन में बदल जाता है सब कुछ, रावण से जुड़ी है यहां की कथा…
मध्य प्रदेश के खरगोन जिले के घने जंगलों और ऊंचे पहाड़ों के बीच एक ऐसा शिवधाम है, जो रामायण कालीन होकर लंकाधिपति राजा रावण से जुड़ा है। यह जगह सीरवेल महादेव के नाम से मशहूर है। मान्यता है कि यहीं पर रावण ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए अपने दसों सिर अर्पित किए थे। तभी से इस स्थान को सीरवेल यानी ‘सिर अर्पण की भूमि’ बोला जाता है। सीरवेल महादेव मंदिर खरगोन जिले की भगवानपुरा तहसील के सिरवेल गांव में सतपुड़ा पर्वत की ऊंची चोटी पर स्थित है। यह जगह महाराष्ट्र सीमा के करीब होने के कारण यहां महाराष्ट्र और गुजरात से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।

मंदिर एक विशाल गुफा के भीतर स्थित है, जहां प्राकृतिक रूप से बने शिवलिंग की पूजा होती है। मान्यता है कि यह शिवलिंग रामायण काल से अस्तित्व में है और रावण ने यहीं घोर तपस्या कर भगवान शिव को प्रसन्न किया था। श्रद्धालुओं को गुफा तक पहुंचने के लिए सतपुड़ा की मुश्किल चढ़ाई चढ़नी पड़ती है, जिसमें 13 झरनों को पार करना होता है। रास्ता संकरा, फिसलन भरा और एकांगी है, यानी जो रास्ता ऊपर चढ़ने के लिए है, उसी से वापस भी उतरना होता है। अंत में लोहे की सीढ़ी के सहारे भक्त गुफा तक पहुंचते हैं लेकिन यह रास्ता जितना मुश्किल है उतना ही रोमांचक भी है। शिवभक्ति की भावना श्रद्धालुओं को यहां खींच लाती है।
प्राकृतिक बूंदों से होता है अभिषेक
गुफा के अंदर स्थित शिवलिंग पर हर समय प्राकृतिक रूप से पानी की बूंदें पहाड़ों से गिरती रहती हैं, जिसे भक्त करिश्मा मानते हैं। गुफा में पार्वती माता, नंदी और हनुमान जी की प्रतिमाएं भी विराजमान हैं। यहां एक गहरा देव कुंड भी है, जिसका जल पवित्र माना जाता है। मान्यता है कि रावण ने यहीं अपने शीश चढ़ाकर महादेव को प्रसन्न किया था और वरदान प्राप्त कर 9 ग्रहों को साथ ले जाकर लंका में स्थापित किया था। भक्तों का बोलना है कि यहां दर्शन मात्र से पापों का नाश और रोगों से मुक्ति मिलती है।
आत्मिक शांति का अनुभव
महंत संतोषदास महाराज यहां कई सालों से ध्यान, पूजा और मंदिर की सेवा कर रहे हैं। उनका मानना है कि यह जगह शिव की शक्ति का जीवंत प्रमाण है और यहां हर किसी को आकर आत्मिक शांति का अनुभव होता है। रावण ने इसी जगह पर अपने दसों सिर अर्पित किए थे और भोलेनाथ को प्रसन्न किया था। तपस्या से प्रसन्न होकर शिव ने रावण को दर्शन दिए थे। यह शिवलिंग रावण द्वारा स्थापित है।
सावन मास में होते हैं आयोजन
सावन के पावन माह में यहां कई विशेष आयोजन होते हैं। मंदिर को सजाया जाता है, शिवलिंग पर रुद्राभिषेक होता है, महा आरती होती है और अखंड जाप चलता है। यह जगह ट्रेकिंग करने वालों के लिए भी मशहूर है। चारों हरियाली से ढकी पहाड़ियां, कल-कल बहते झरने और घने जंगल हर किसी को आकर्षित करते हैं, इसलिए श्रावण मास में यह जगह हजारों श्रद्धालुओं और पर्यटकों का प्रमुख आकर्षण बन जाता है।

