Kitchen Garden Tips: दालचीनी-इलायची की खुशबू से महक उठेगा घर, गमले में भी कर सकते हैं रोपाई…
गार्डनिंग एक्सपर्ट दादू बताते हैं कि मसाले के पौधे गमले में नहीं लगाए जाते, इन्हें हमेशा जमीन में लगाना चाहिए। इसका कारण यह है कि मसालों के पौधे लंबी जड़ें बनाते हैं और इन्हें पर्याप्त स्थान की जरूरत होती है। मसाले डंठल, छाल और पत्तियों से प्राप्त होते हैं। उदाहरण के लिए दालचीनी की छाल का इस्तेमाल मसाले के रूप में किया जाता है जबकि तेजपत्ता की पत्तियां भोजन का स्वाद बढ़ाने के लिए इस्तेमाल होती हैं। वहीं लेमनग्रास की पत्तियां चाय में डालने पर लौंग और इलायची जैसी महक और स्वाद देती हैं, जो स्वास्थ्य के लिए भी बहुत फायदेमंद है।
इन पौधों को शीघ्र और स्वस्थ बढ़ाने के लिए खाद का ठीक इस्तेमाल बहुत महत्वपूर्ण है। एक्सपर्ट दादू के अनुसार, मसालों के पौधों में नीम खली, सरसों खली, डीएपी और पोटाश को मिलाकर खाद डालना सबसे अच्छा तरीका है। हर पौधे में 2 से 3 चम्मच यानी करीब 40 से 50 ग्राम खाद डालना चाहिए। इसे 15 से 20 दिनों के अंतराल में दोहराते रहने से पौधे मजबूती से बढ़ते हैं और उनमें रोगों का खतरा भी कम रहता है।
पानी की बात करें तो मसालों के पौधों को बहुत अधिक सिंचाई की जरूरत नहीं होती। बरसात में प्राकृतिक वर्षा जल ही उनके लिए पर्याप्त होता है। गर्मी के दिनों में मामूली सिंचाई की आवश्यकता पड़ सकती है। इन पौधों की देखभाल अपेक्षाकृत आसान है, लेकिन नियमित रूप से खाद डालना और घास – फूस निकालना महत्वपूर्ण होता है।
होम गार्डनिंग एक्सपर्ट दादू का बोलना है कि यदि लोग अपने घरों में मसालों के पौधे लगाते हैं तो यह न सिर्फ़ स्वादिष्ट भोजन का साधन बनेगा, बल्कि बाजार से खरीदे जाने वाले मिलावटी मसालों से भी छुटकारा मिलेगा। साथ ही, घर के आसपास हरियाली बढ़ेगी और प्राकृतिक खुशबू का वातावरण भी तैयार होगा। बरसात का यह मौसम उन लोगों के लिए सुनहरा मौका है, जो होम गार्डनिंग के शौक को मसालों की खेती के साथ जोड़ना चाहते हैं।


