धूप में अनेक रंग क्यों मिले होते हैं, जानें इसकी मूल वजह
सूर्योदय-सूर्यास्त के समय सूर्य का रंग भले ही लाल होता है, लेकिन हमें धूप हमेशा सफेद ही नजर आती है। आखिर क्यों? कभी न कभी यह प्रश्न आपके मन में भी आया होगा। धूप में अनेक रंग मिले होते हैं, इसी वजह से कभी-कभी आसमान में हमें इंद्रधनुष का रंग भी नजर आता है, लेकिन धूप का रंग तो हमेशा एक ही होता है। आखिर इसकी मूल वजह क्या है, आइए जानते हैं।

वैसे तो प्राइमरी रंग 2 प्रकार के ही होते हैं। एक तो वो, जो प्रकाश के रंग होते हैं, जैसे लाल-हरा और नीला। और दूसरे वो जो पिगमेंट्स यानी पदार्थों के रंग होते हैं। इनका प्रयोग हम पेंटिंग आदि में करते हैं। जैसे लाल, नीला, पीला। पिगमेंट्स पर जब प्रकाश पड़ता है तो वह सारे रंगों को अवशोषित कर लेते हैं और केवल वही रंग परावर्तित करते हैं, जिस रंग का वह पदार्थ होता है। जैसे आसमान में जब प्रकाश पडता है तो वह सारे रंग को अवशोषित कर केवल नीले रंग को परावर्तित कर देता है। इसलिए नीला दिखाई देता है। मतलब साफ है कि उसने बाकी रंगों को छिपा लिया।
… तो फिर कैसे होता सफेद रंग
अब प्रकाश के रंग की बात। यह जैसा होता है, ठीक वैसा ही दिखाई देता है। यदि प्रकाश लाल रंग का है तो वह लाल रंग ही नजर आएगा और यदि हरा रंग का है तो हरा ही दिखेगा। लेकिन यदि कोई 2 रंग एक साथ आ जाएं तो वे घुलमिल जाते हैं। जैसे लाल और हरे रंग को मिला दें तो पीला दिखेगा। इन रंगों में जुड़ने का गुण होता है। सूरज की रोशनी हमें सफेद इसलिए दिखाई देती है क्योंकि वह सारे प्राथमिक रंगों का मिश्रण होती है। यानी उसमें सारे प्राथमिक रंग घुले होते हैं। इसे ऐसे समझिए कि यदि आप चाहें कि पिगमेंट्स यानी पदार्थों के रंग मिलकर सफेद बना लें तो यह संभव नहीं। क्योंकि इनमें वह गुण होता ही नहीं।

