जानिए, पूर्णिमा से जुड़ी खास परंपराएं…
गुरुवार, 25 जनवरी को पौष मास की पूर्णिमा है। इस दिन पौष माह समाप्त होगा और अगले दिन यानी 26 जनवरी से माघ मास प्रारम्भ हो जाएगा। हिन्दी पंचांग में पूर्णिमा तिथि पर महीना समाप्त होता है। 25 तारीख को पौष मास समाप्त होगा और 26 से माघ मास प्रारम्भ होगा।

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं। मनीष शर्मा के मुताबिक, धर्म-कर्म करते रहने से नकारात्मक विचार दूर होते हैं और मन शांत होता है। पूर्णिमा पर किए गए पूजा-पाठ का अक्षय पुण्य मिलता है, ऐसा पुण्य जिसका असर जीवनभर बना रहता है। जानिए पूर्णिमा से जुड़ी खास परंपराएं…
पूर्णिमा पर करें तीर्थ दर्शन और नदी स्नान
पूर्णिमा पर तीर्थ दर्शन और नदी स्नान करने का महत्व काफी अधिक है। इसी वजह से गंगा, यमुना, शिप्रा, नर्मदा जैसी सभी पवित्र नदियों में स्नान के लिए भक्त बड़ी संख्या में पहुंचते हैं। स्नान के बाद नदी किनारे ही दान-पुण्य किया जाता है। इस तिथि पर पौराणिक मंदिर जैसे 12 ज्योतिर्लिंग, 51 शक्तिपीठ, चार धाम जैसे मंदिरों में दर्शन पूजन करना चाहिए। यदि इन मंदिरों में दर्शन नहीं कर पा रहे हैं तो अपने शहर में जो भी पौराणिक मंदिर हो, वहां दर्शन-पूजन कर सकते हैं।
जरूरतमंद लोगों को करें दान-पुण्य
अभी ठंड का समय है। इन दिनों में ऊनी वस्त्रों का दान करना चाहिए। जरूरतमंद लोगों को अनाज, जूते-चप्पल, कपड़े और धन का दान करें। यदि संभव हो तो किसी आवश्यकता आदमी को भोजन कराएं। किसी गोशाला में गायों की देखभाल के लिए धन का दान करें। गायों को हरी घास खिलाएं।
पूर्णिमा पर ईश्वर सत्यनारायण की कथा पढ़ने-सुनने की है परंपरा
पूर्णिमा पर सत्यनारायण ईश्वर की कथा पढ़ने और सुनने की परंपरा काफी प्रचलित है। ईश्वर सत्यनारायण विष्णु जी का ही एक स्वरूप है। स्कंद पुराण के रेवाखंड में इनकी कथा है। ये कथा पांच अध्यायों में है और इसमें 170 श्लोक हैं। कथा के दो विषय हैं। इस कथा की दो सीख हैं। पहली, अपना संकल्प कभी न भूलें। दूसरी है, कभी भी ईश्वर के प्रसाद का अपमान न करें। सत्यनारायण ईश्वर हमेशा सच बोलने का संदेश देते हैं।
ऐसे कर सकते हैं पूजा-पाठ
पूर्णिमा पर विष्णु जी और महालक्ष्मी का अभिषेक करना चाहिए। अभिषेक दक्षिणावर्ती शंख से करेंगे तो अधिक अच्छा रहेगा। अभिषेक के बाद ईश्वर को नए वस्त्र पहनाएं, फूलों से श्रृंगार करें। धूप-दीप जलाएं। ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जप करें। मिठाई का भोग लगाएं। आरती करें।
पूर्णिमा की शाम चंद्र उदय के बाद हनुमान जी की पूजा करें। दीपक जलाकर हनुमान चालीसा का पाठ करें। आप चाहें तो ऊँ रामदूताय नम: मंत्र का जप कर सकते हैं। मंत्र जप कम से कम 108 बार करें।
शिवलिंग पर जल और दूध चढ़ाएं। बिल्व पत्र, धतूरा, हार-फूल से श्रृंगार करें। ईश्वर को चंदन का लेप लगाएं। धूप-दीप जलाकर आरती करें। मिठाई का भोग लगाएं। फल चढ़ाएं। पूजा में ऊँ नम: शिवाय मंत्र का जप करें।

