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श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर रही है चंदन की खुशबू वाली गणेश प्रतिमा, जानें क्या है खास…

राजधानी के रामसागर पारा में इस बार गणेश उत्सव बहुत खास होने वाला है. यहां विराजमान होने वाले गणेशजी की मूर्ति पूरी तरह से चंदन की लकड़ियों से तैयार की गई है. मूर्तिकार राहुल यादव ने 20 दिनों की मुश्किल मेहनत के बाद इस अनोखी प्रतिमा को आकार दिया है. प्रतिमा की विशेषता यह है कि इसमें चार भिन्न-भिन्न प्रकार के चंदन का इस्तेमाल किया गया है, जो इसे और भी अद्वितीय बना रहा है.

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मूर्तिकार राहुल यादव ने Local18 को कहा कि गणेशजी के शीश को लाल चंदन से तराशा गया है, जबकि कान के बॉर्डर को सजाने में काले चंदन का इस्तेमाल किया गया है. वहीं शरीर की आभा बढ़ाने के लिए सफेद और पीले चंदन को बारीकी से तराशा गया है. गणेशजी की धोती चंदन की लकड़ी के छिलकों से बनाई गई है. इतना ही नहीं, चंदन के मोतियों से माला और लाल चंदन के बीजों से मुकुट तैयार किया गया है. प्रतिमा के साथ दो चूहे भी बनाए गए हैं, जिनमें एक सफेद और दूसरा काले चंदन से तैयार किया गया है.

मूर्तिकार राहुल यादव ने आगे कहा कि इस मूर्ति को बनाने में बढ़ाई की सहायता भी लेनी पड़ी, क्योंकि चंदन की लकड़ियों को पहले ठीक ढंग से कटवाना पड़ता है. मूर्ति बनाने में जो चंदन की लकड़ी लगी है, उसे रामसागर पारा गणेश समिति ने मौजूद कराया है.  मूर्तिकार ने प्रतिमा बनाने का महज 50 हजार रुपए का शुल्क ही लिया है, जबकि असल अर्थ में यह कला और आस्था का अनमोल सहयोग है.

रामसागर पारा गणेश समिति पिछले 15 सालों से अनोखी और सुन्दर मूर्तियों की स्थापना करती आ रही है. यही वजह है कि इस क्षेत्र का गणेश उत्सव पूरे रायपुर शहर में चर्चा का विषय बन जाता है. पिछले साल यहां मोर पंख से बनी गणेश प्रतिमा की स्थापना की गई थी, जिसने भक्तों को खूब आकर्षित किया था. इस बार चंदन की सुगंध से भक्तों का स्वागत होगा, जो वातावरण को और भी पवित्र बना देगा.

समिति के द्वारा हर वर्ष कुछ नया और अनोखा करने की प्रयास किया जाता है ताकि गणेश उत्सव यादगार बन सके. इस बार चंदन की लकड़ी से बनी गणेश प्रतिमा न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र होगी बल्कि कला का उत्कृष्ट उदाहरण भी बनेगी. प्रतिमा के दर्शन के लिए भक्तों में उत्सुकता पहले से ही देखी जा रही है.

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