जानें क्या होती है वर्चुअल इंटिमेसी…
Virtual Intimacy: सोशल मीडिया के दौर में अब रोमांस भी डिजिटल बन गया है। लोगों की नजरों से दूर छिपकर गुलाब के फूलों से प्यार का इजहार, अब पुरानी बात है। मोबाइल के दौर में अब दिल वाला इमोजी ही मन की बात कहने के लिए काफी है। डिजिटल दुनिया पर जहां रिलेशनशिप की सॉफ्ट लॉन्चिंग हो रही है, वहीं वर्चुअल इंटिमेसी भी बढ़ी है।

क्या होती है वर्चुअल इंटिमेसी? (What Is Virtual Intimacy? )
इंटिमेसी का मतलब है अंतरंगता। जब आदमी किसी से प्यार करता है तो वह उससे इमोशनल और फिजिकली करीब महसूस करता है। यही होती है इंटिमेसी। इंटिमेसी महत्वपूर्ण नहीं संबंध बनाने से महसूस हो। मनोचिकित्सक डाक्टर अवनि तिवारी कहती हैं कि यह पार्टनर के गले लगने, हाथ छूने, घर के कामों में हाथ बंटाने या बालों को संवारने पर भी महसूस होती हैं। फेस टू फेस इंटिमेसी अब डिजिटल बन गई है। हाइटेक होती दुनिया में कई लोगों को अब यह फीलिंग सोशल प्लैटफॉर्म से महसूस होती है जिसे वर्चुअल इंटिमेसी बोला जाता है।
मैसेज और कॉल से आते करीब
प्यार का एहसास पार्टनर के सामने बैठने से तो होता ही है, लेकिन वर्चुअल इंटिमेसी उनके हजारों किलोमीटर दूर होने के बाद भी महसूस हो जाती है। पार्टनर चैट, मैसेज, वीडियो कॉल, सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म, वर्चुअल सपोर्ट ग्रुप्स, वर्चुअल वर्कशॉप और वर्चुअल रिएलिटी (VR) इंट्रैक्शन से स्वयं को करीब महसूस करते हैं।
लोगों से दूरी ने दिया वर्चुअल इंटिमेसी का मौका!
काम में बिजी रहना और सोशल मीडिया की जीवन में घुसपैठ ने लोगों को वास्तविक दुनिया से दूर कर दिया है। अब लोग आमने-सामने बात करने से बचते हैं। लोगों को सोशल एंग्जाइटी होने लगी है। वह अपने घरवालों के साथ बैठने से भी बचते हैं। लोगों से दूरी ने ही सोशल मीडिया पर यूजर्स को वर्चुअल इंटिमेसी का मौका दिया। जो लोग प्यार में रिजेक्शन से डरते हैं या उन्हें लोगों से आमने-सामने बैठने में लज्जा महसूस होती है, उनके लिए औनलाइन रोमांस वरदान साबित हुआ है।
डेटिंग ऐप्स ने बढ़ाया ट्रेंड
भारत में डेटिंग ऐप्स 2020 में लॉकडाउन लगने के बाद पॉपुलर हुई। इन डेटिंग ऐप्स ने लोगों को एक-दूसरे के करीब लाया और कई नए वर्चुअल संबंध बनाए। इन्हीं ऐप्स की बदौलत हिंदुस्तान में वर्चुअल इंटिमेसी बढ़ी। ग्लिडेन नाम की डेटिंग ऐप के मुताबिक हिंदुस्तान में मार्च 2020 से 2022 तक 112% यूजर बढ़े। वर्चुअल रिलेशनशिप बढ़े तो वर्चुअल इंटिमेसी भी बढ़ी।
लॉन्ग डिस्टेंस में रहने वाले कपल्स के लिए सौगात
कई कपल जॉब या पढ़ाई के सिलसिले में भिन्न-भिन्न शहरों या राष्ट्र में रहते हैं। ऐसे कपल्स वर्चुअल इंटिमेसी से ही एक-दूसरों को स्वयं के करीब महसूस करते हैं। चैट्स, वीडियो कॉल, फोटो और वीडियो शेयरिंग से ही उनके बीच की दूरियां कम हो जाती हैं।
हार्मोन्स बढ़ाते वर्चुअल बॉन्डिंग!
कई लोग कहते हैं कि प्यार दिल से होता है लेकिन ऐसा नहीं है। प्यार दिमाग से होता है और इसके लिए 3 हार्मोन उत्तरदायी हैं। पार्टनर का मैसेज या कॉल पर उनकी आवाज या तस्वीर से शरीर में डोपामाइन नाम का हैप्पी हार्मोन रिलीज होता है। इसी हार्मोन की वजह से पार्टनर के प्रति अट्रैक्शन बढ़ता है। फिर सेरोटोनिन नाम का हार्मोन खुश और पॉजिटिव महसूस करवाता है। इसी से सेक्शुअल डिजायर बढ़ते हैं। तीसरी स्टेज पर ऑक्सीटोसिन रिलीज होता है जो एक्साइटमेंट बढ़ता है और पार्टनर पर भरोसा कर बॉन्डिंग को मजबूत बनाता है।
वर्चुअल इंटिमेसी करती एक्साइटेड
वर्चुअल इंटिमेसी से कैसे प्लेजर मिलता है, इस पर एक स्टडी हुई। स्टडी में कहा कि दिमाग को 2 तरह से आनंद मिलता है। जब कपल एक-दूसरे को प्यार भरे मैसेज भेजते हैं तो दिमाग का एंटीसिपेटरी प्लेजर सिस्टम सक्रिय होता है जो आदमी को फोरप्ले जैसा महसूस कराता है। वहीं, जब आदमी पार्टनर से सेक्शुअल चैट करते हैं तो कॉन्सुमैटोरी प्लेजर सिस्टम एक्टिवेट होता है जो उनके अंदर संबंध बनाने के दौरान मिलने वाली संतुष्टि का एहसास करवाता है।
क्या लंबा चलता है रिश्ता?
डॉ। अवनि तिवारी कहती हैं कि प्यार की आरंभ भले ही डोपामाइन हार्मोन करवाए लेकिन प्यार जीवन भर के संबंध में बदलता है तो इसके पीछे ऑक्सीटोसिन होता है। संबंध में गहराइयां इसी से पनपनती हैं। यदि संबंध में भरोसा है, आपसी समझ और इज्जत है तो रिश्ता भले ही वर्चुअल हो, लंबे समय तक टिकता है। कनाडा में हुई एक रिसर्च में पाया गया कि महिलाएं अपने प्रेमी या हस्बैंड से बात करने के बाद अधिक खुशी महसूस करती हैं। वह जितनी बार पार्टनर को कॉल या मैसेज करती हैं, उनका रिश्ता और गहरा होता जाता है।
प्राइवेसी का रखें ध्यान
ऑनलाइन प्यार कई बार सिरदर्द भी बन जाता है। लड़कियों को अपनी पर्सनल फोटोज़ और वीडियो सोशल मीडिया और डेटिंग ऐप्स पर शेयर करने से बचना चाहिए। आपको नहीं पता कि उनका वर्चुअल पार्टनर कितना सच्चा है। औनलाइन जो भी चीजें शेयर करें, वह बहुत सोच समझकर करें और यदि वर्चुअल पार्टनर पर थोड़ा भी संदेह हो तो उसे ब्लॉक कर दें।
वर्चुअल इंटिमेसी हमेशा अच्छी नहीं
ऑनलाइन प्यार भरे मैसेज कई बार मिसअंडरस्टैंडिंग का कारण बन सकते हैं। इस तरह के संबंध में इमोशनल कनेक्शन एक तरफा भी हो सकता है। वर्चुअल इंटिमेसी में फिजिकल टच नहीं होता जो कई बार पार्टनर को धोखेबाज बना सकती है। वहीं, डिजिटल दुनिया में एक साथ लोग कई वेबसाइट और ऐप्स को ऑपरेट कर रहे होते हैं जिससे उन्हें डिजिटल फटीग यानी थकान होने लगती हैं। इससे मेंटल हेल्थ प्रभावित होती है जिसका असर रिलेशनशिप पर भी पड़ सकता है।

