घर बैठे-बैठे जानें खतरे का संकेत, मौत की चेतावनी देते हैं छत्तीसगढ़ के ये 5 वॉटरफॉल

औरापानी जलप्रपात, करीब 100-150 फीट ऊंचाई से गिरता यह झरना घने जंगलों से घिरा है। बरसात में यहां का बहाव तेज हो जाता है और किनारे फिसलन भरे हो जाते हैं। बारिश के समय पानी के अधिक करीब न जाएं, पत्थरों पर फिसलने का खतरा रहता है। गहराई में उतरना घातक हो सकता है।
चंदानी वॉटरफॉल, बिलासपुर से 55 किमी, रतनपुर के आगे बेलगहना के पास शांत वातावरण और ठंडी हवा के बीच यह झरना मानसून में बहुत खूबसूरत हो जाता है। झरने के आसपास काई जम जाती है, जिससे पत्थर फिसलन भरे हो जाते हैं। बारिश के समय पानी का स्तर अचानक बढ़ सकता है।
सिद्ध खोल जलप्रपात, बलौदा बाजार से 50 किमी, बिलासपुर से 90 किमी घने जंगलों में बसा यह झरना मानसून में बहुत सुन्दर लगता है। यहां तक पहुंचने के लिए जंगल और पहाड़ी रास्तों से गुजरना पड़ता है। बरसात में रास्ता फिसलन भरा और जोखिम भरा हो सकता है।
कुटन जलप्रपात, कसडोल से 15 किमी, बिलासपुर से 80 किमी पत्थरों के बीच गिरता यह झरना बरसात में बहुत बढ़िया नज़ारा पेश करता है। तेज बहाव और चट्टानों पर फिसलन की वजह से पानी के बहुत पास जाना घातक है। अचानक पानी का दबाव बढ़ सकता है।
झोझा जलप्रपात, पेंड्रा से 45 किमी, बिलासपुर से 130 किमी की दूरी पर 100 फीट ऊंचाई से गिरता पानी और पहाड़ों के बीच का दृश्य अद्भुत है। यह झरना बरसात में विकराल रूप ले लेता है। पानी का बहाव बहुत तेज होता है और किनारे फिसलन भरे होते हैं। यहां छोटी सी भी ढिलाई जानलेवा साबित हो सकती है।

