जानें, शनि अमावस्या के दिन काली बिंदी लगाने के पीछे का महत्व…
29 मार्च 2025 को वर्ष का पहला सूर्य ग्रहण लगेगा, जिसे ज्योतिषीय दृष्टि से बहुत जरूरी बताया जा रहा है। इस दिन ग्रहों की चाल में बड़े परिवर्तन देखने को मिलेंगे, खासकर शनि और सूर्य की स्थिति पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी। क्योंकि, इसी दिन शनि अमावस्या भी है। ऐसे में एक बड़ा प्रश्न समाने आता है कि, क्या इस दिन काली बिंदी लगाना शुभ होता है या अशुभ? आइए जानते हैं, ज्योतिषियों की इस पर क्या राय है।

खरगोन के मशहूर ज्योतिषाचार्य, गोल्ड मेडलिस्ट, डाक्टर बसंत सोनी बताते है कि, जिस दिन सूर्य ग्रहण लग रहा है। उसी दिन शनि अमावस्या आ रही है। इसके अतिरिक्त ढ़ाई वर्ष बाद शनि कुंभ से मीन राशि में गौचर भी इसी दिन करेंगे। यह संयोग लगभग 100 वर्ष बाद बन रहा है। सूर्य ग्रहण और शनि का गहरा संबंध है, क्योंकि शनिदेव सूर्य के पुत्र होते हुए भी उनकी छाया से अलग माने जाते है। यही कारण है कि ग्रहण काल में विशेष तरीका करने की राय दी जाती है।
शनिदेव को प्रिय है काला रंग
ज्योतिषी कहते हैं कि, भारतीय परंपरा में काले रंग को नकारात्मकता से जोड़ा जाता है, लेकिन शनि उपासकों के लिए यह रंग विशेष महत्व रखता है। शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए शनिवार के दिन काले कपड़े पहनने, काले तिल और काले उड़द का दान करने की परंपरा है। ऐसे में कई लोग मानते हैं कि शनिदेव का प्रिय रंग होने के कारण काली बिंदी लगाना भी शुभ हो सकता है। जबकि, कुछ मान्यताओं के अनुसार, काले रंग की बिंदी नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित कर सकती है, इसलिए इसे लगाने से बचना चाहिए।
सूर्य ग्रहण का काले रंग का संबंध
डॉ। सोनी के अनुसार, सूर्य ग्रहण के दौरान काले रंग का विशेष असर होता है। बोला जाता है कि ग्रहण के दौरान काले रंग का इस्तेमाल नकारात्मक ऊर्जाओं को कम करने में सहायक हो सकता है, लेकिन शनि अमावस्या पर सूर्य ग्रहण होने की वजह से काली बिंदी लगाना ग्रहों की हालात के मुताबिक शुभ-अशुभ फल दे सकता है। वैसे भी भारतीय परंपरा में काले रंग को नकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है। इसीलिए महिलाएं भी लाल, सिंदूरी, हरि, पीली आदि रंग की बिंदी लगाती है, जबकि, पुरुष, लाल, चंदन आदि जैसे रंगों का टीका लगाते है।
ये लोग भूलकर भी नहीं लगाए काली बिंदी
हालांकि, काली बिंदी लगाने का फैसला आदमी की कुंडली और ग्रह हालात पर भी निर्भर करता है। यदि किसी आदमी की कुंडली में शनि की साढ़े साती या ढैय्या चल रही हो, तो शनिवार या शनि अमावस्या के दिन काली बिंदी लगाने से बचना चाहिए। लेकिन, यदि कुंडली में शनि शुभ स्थिति में हो, तो यह फायदेमंद भी साबित हो सकती है। इसलिए बिना ज्योतिषीय परामर्श के काली बिंदी लगाने का प्रयोग नहीं करें।

