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जानें, परमाणु हमले के बाद ‘काली बारिश’ होने के पीछे का कारण…

India Pakistan Tension: भारत और पाक के बीच तनाव लगातार गंभीर होता जा रहा है हिंदुस्तान द्वारा ऑपरेशन ‘सिंदूर’ के अनुसार की गई जवाबी कार्रवाई के बाद पाक ने ड्रोन हमलों की बौछार कर दी, जिन्हें इंडियन आर्मी ने विफल कर दिया इसी दौरान पाक की ओर से परमाणु हमले की धमकी ने हालात को और अधिक तनावपूर्ण बना दिया ऐसे में यह जानना महत्वपूर्ण हो गया है कि यदि परमाणु धावा होता है, तो उसके बाद क्या होता है और क्यों उस स्थिति को पूरी दुनिया सबसे भयावह मानती है

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क्या होती है ‘काली बारिश’?

परमाणु विस्फोट के बाद जो एक घातक प्राकृतिक प्रक्रिया होती है, उसे ‘काली बारिश’ या रेडियोधर्मी बारिश बोला जाता है यह बारिश सामान्य पानी की नहीं होती, बल्कि इसमें रेडियोएक्टिव कण, धूल, राख और अन्य जहरीले तत्व उपस्थित होते हैं जो विस्फोट के बाद वातावरण में फैलते हैं

क्यों होती है काली बारिश?

जब परमाणु बम फटता है, तो उसकी अत्यधिक गर्मी और ऊर्जा आसपास की हर चीज़ को वाष्प में बदल देती है यह वाष्पित कण वायुमंडल में ऊपर उठते हैं और फिर भारी होकर नीचे गिरते हैं लेकिन तब तक वे रेडियोधर्मी हो चुके होते हैं इन जहरीले कणों के साथ जब बारिश होती है, तो वह ‘काली’ होती है जो देखने में भी अंधेरी होती है और त्वचा को जला सकती है

क्या असर होता है?

  • इस बारिश की बूंदों से शरीर में जलन, त्वचा का झुलसना और खतरनाक रोंगों का खतरा रहता है
  • रेडिएशन के कारण ल्यूकेमिया, कैंसर, गर्भस्थ शिशुओं में गुनाह जैसी गंभीर समस्याएं सामने आती हैं
  • खेतों, पानी और हवा में रेडियोधर्मी ज़हर फैलने लगता है जो वर्षों तक असर करता है

जापान में दिख चुका है इसका उदाहरण

हिरोशिमा और नागासाकी में हुए परमाणु हमलों के बाद ठीक ऐसी ही काली बारिश हुई थी रिपोर्ट्स के मुताबिक, वहां 80,000 से अधिक लोगों की मृत्यु विस्फोट से तुरंत हुई, जबकि हजारों लोग बाद में रेडिएशन और काली बारिश के असर से मरे

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