जानें, सावधानी से दीपक बुझाने का सही तरीका, ये रहे पूजा के बाद के आसान नियम
सनातन धर्म में दीपक को शुभ और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है। पूजा-पाठ के दौरान दीपक जलाने का विशेष महत्व होता है। किसी भी शुभ या मांगलिक कार्य, पूजा-पाठ या व्रत में दीपक जलाना जरूरी होता है, क्योंकि बोला जाता है कि दीपक के बिना पूजा अधूरी मानी जाती है। धार्मिक मान्यता के मुताबिक दीपक जलाने से वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, मन शांत रहता है और देवी-देवता भी प्रसन्न होते हैं। लेकिन कई बार लोग पूजा-पाठ के बाद बुझे हुए दीपक को लेकर असमंजस में रहते हैं यानी जब दीपक जल जाता है तो उसकी बाती को क्या करें, अक्सर लोग उसे कहीं फेंक देते हैं। लेकिन ऐसा करना शुभ है या अशुभ, इस रिपोर्ट में विस्तार से समझते हैं।

जली हुई बाती को न फेंके
अयोध्या के ज्योतिष पंडित कल्कि राम बताते हैं कि कोई भी शुभ या मांगलिक कार्य या पूजा-पाठ करने के बाद दीपक प्रज्वलित किया जाता है। अक्सर सनातन धर्म को मानने वाले लोगों के घरों में शाम के समय घर के द्वार पर दीपक जलाया जाता है। दीपक जलने के बाद उसकी बाती को लोग अक्सर फेंक देते हैं, लेकिन ऐसा एकदम नहीं करना चाहिए। दीपक जलाने के बाद 11 दिनों तक उस बाती को एकत्रित करना चाहिए। उसके बाद 11वें दिन उस दीपक में कपूर डालकर पूरे घर में उसके धुएं को फैलाना चाहिए। ऐसा करने से घर की नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं।
नजर गुनाह और बुरी शक्तियों से मुक्ति
इतना ही नहीं, दीपक की बची हुई बाती की राख भी बहुत उपयोगी मानी जाती है। मान्यता है कि इस राख का तिलक लगाने से आदमी को नजर गुनाह और बुरी शक्तियों से मुक्ति मिलती है। साथ ही बची हुई राख को किसी पेड़ की जड़ में डाल देना चाहिए। ऐसा करने से जीवन के सभी दोषों से मुक्ति मिलती है।
जली हुई बाती को कभी कूड़ेदान में न डालें
पूजा में इस्तेमाल की गई जली हुई बाती को कभी कूड़ेदान में नहीं डालना चाहिए। शास्त्रों के मुताबिक ऐसा करना अशुभ होता है। इन बातियों को किसी बहते हुए जल में विसर्जित करना चाहिए, जो पवित्र नदी हो। ऐसा करने से सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है और गुनाह भी समाप्त होता है।

