रांची के दिल शेप बिस्किट की शुरुआत एक झोपड़ी से, जानें क्यों है खास…
झारखंड की राजधानी रांची से करीब 20 किलोमीटर की दूरी पर एक शॉप है। जहां आदिवासी महिलाएं दिल शेप के बिस्कुट बनाती हैं। इन बिस्कुटों की खास बात यह है कि इनमें पूरी तरह से घर का देसी बटर इस्तेमाल होता है। इसके अतिरिक्त बाहरी सामान का इस्तेमाल नहीं किया जाता। इसी वजह से इनका स्वाद बहुत अलग और खास होता है। आइये जानते हैं इसके बारे में…

ये बिस्कुट इतने सॉफ्ट होते हैं कि बिना दांत वाला आदमी भी इन्हें खा सकता है और ये मुंह में घुल जाते हैं। यही कारण है कि ये बिस्कुट रांची में काफी लोकप्रिय हो रहे हैं और लोग 20 किमी बाइक चलाकर इन्हें खाने आते हैं। इस बिस्कुट की मूल्य 180 प्रति किलो है। इसे खरीदने के लिए लोगों की भीड़ लगी रहती है।
जानें बिस्कुट बनाने की रेसिपी
यहां बिस्कुट बना रही मोनिका बताती हैं कि हर स्थान मशीन से बिस्कुट बनते हैं, लेकिन यहां कोई मशीन नहीं है।, जैसे घर में रोटी और सब्जी बनाई जाती है। वैसे ही वह बिस्कुट बनाती हैं। सबसे पहले मैदा और आटा लिया जाता है, उसमें शुद्ध देसी मक्खन मिलाया जाता है। इसके बाद इसे छोटे-छोटे दिल शेप में काटा जाता है। इसके लिए एक छोटी सी मशीन है, जो डिजाइन बनाती है, फिर इसे आंच की भट्टी में पकाया जाता है। यह लकड़ी की आंच में पकता है और इसे छाना नहीं जाता है। इसलिए यदि आप डाइट पर हैं, तब भी इसे खा सकते हैं।
बिस्कुट की बढ़ी है लोकप्रियता
मोनिका बताती हैं कि बिस्कुट की डिमांड इतनी है कि प्रत्येक दिन 20 किलो तक की खपत होती है। जहां ₹180 प्रति किलो के हिसाब से ये बिस्कुट बिकता है। यहां लोग 20 किलोमीटर दूर से आकर 2-3 किलो एक साथ ले जाते हैं। इस तरह वह घर बैठे ही अपना टारगेट पूरा कर लेती हैं।

