हेल्दी फ्लर्टिंग पर रिसर्च क्या कहती है, आइए जानें
मौसम इश्किया है. मौका भी है और दस्तूर भी. अपनी मोहब्बत की तलाश हर किसी को है कि शायद कहीं कोई बात बन जाए. यदि सन्नाटा आपकी कमी और दिलफेंक मिजाज आपकी खूबी है तो यह समय दिलफेंक बनने का है. क्योंकि दिलफेंक अंदाज ही फ्लर्टिंग कहलाती है. जो आदमी जिस खूबी और सन्नाटा के साथ अपने दिल की बात सामने वाले तक पहुंचाता है वही परफेक्ट फ्लर्ट बोला जाता है. समय के दामन में गुंजाइश कम है, कहीं कोई दूसरा आपकी मोहब्बत न ले उड़े, इसलिए बिना समय गंवाए दिल की बात कह डालिए, क्योंकि कभी-कभी फ्लर्टिंग बड़े काम की और हेल्पफुल साबित होती है.

मसला ये भी है कि दिल की बात सामने वाले तक कैसे पहुंचाई, समझाई या महसूस कराई जाए. इसका पहला पायदान भी फ्लर्टिंग ही है. फ्लर्टिंग का नाम लेते ही पहले लोगों के मन में चरित्र की जो तस्वीर उभरती थी वो उसके ‘छिछोरे’ होने का अहसास दिलाती थी.
माना कि इसके कुछ नेगेटिव पहलू भी होते हैं, लेकिन आज समय ने फ्लर्टिंग के अर्थ ही बदल दिए हैं. फ्लर्टिंग पर्सनैलिटी की पॉजिटिव क्वालिटी की तरह देखे जाने लगी है. सिक्के का दूसरा पहलू देखें तो जीवन में रोमानियत भरने, चेहरे पर रौनक लाने, मूड को खुश मिजाज बनाने में फ्लर्टिंग मददगार है. यूं कहिए कि फ्लर्टिंग आदमी को साइकोलॉजिकली और मेंटली फिट रखती है और यह स्ट्रेस बस्टर भी है.
लोग फ्लर्ट क्यों करते?
कॉलेज में लड़के लड़कियां आपस में एक दूसरे से छेड़छाड़ करते रहते हैं. वो कहीं न कहीं उम्र और लड़कपन की निशानी है.
रिलेशनशिप काउंसलर डाक्टर के. आर. धर कहते हैं कि लड़का हो या लड़की फ्लर्टिंग पर्सनैलिटी की कुंठाओं को समाप्त करती है जिससे आगे चलकर आपकी पर्सनैलिटी खुलती है और हीनभावना समाप्त होती है. स्त्री या पुरुष से आगे बढ़कर बात करने की कला विकसित होती है जिससे कम्युनिकेशन को बेहतर बनाने और करियर में सहायता मिलती है.
ऑफिस में फ़्लर्ट करने वाले जिंदादिल माने जाते हैं. ऑफिस टाइम में काम के साथ अपने कलीग के साथ हल्का-फुल्का मजाक माहौल को स्ट्रेस फ्री बनाता है. हर आदमी चाहता है कि लोग उसे नोटिस करें, उनके जोक्स पर ठहाके लगाएं, उनकी प्रशंसा करें. ऐसे में हेल्दी फ़्लर्टिंग बेहतर ऑप्शन है, जिससे स्ट्रेस कोसो दूर रहता है.
वहीं साइकोलॉजिस्ट योगिता कादियान कहती हैं कि फ़्लर्टिंग डिप्रेशन के खतरे से भी बचाती है. ये आदत तभी पॉजिटिव बनती है जब दो लोग आपस में कंफर्टेबल महसूस करें. फ्लर्ट करने वाला और जिसके साथ फ्लर्टिंग की जा रही, दोनों का स्वभाव हंसमुख हो और मजाक समझते हों.
हेल्दी फ्लर्टिंग पर रिसर्च क्या कहती है?
वाशिंगटन स्टेट यूनिवर्सिटी ने ऑफिस में फ्लर्टिंग के पॉजिटव और हेल्दी असर को लेकर शोध किया. इस रिसर्च में पाया गया कि फ्लर्टिंग ‘पॉजिटिव सोशल सेक्शुअल बिहैवियर’ है जो सेक्शुअल हैरमेंट से एकदम अलग है.
ताकतवर पोजिशन पर बैठे लोग भद्दे मजाक या इशारे करते हैं जो सेक्शुअल हैरमेंट के दायरे में आता है और कर्मचारियों के बीच स्ट्रेस की वजह बनता है.
असिस्टेंट प्रोफेसर लेह शेपर्ड ने अपने रिसर्च में बोला कि वर्क प्लेस पर इस तरह का छोटा मोटा फ्लर्ट देखने को मिलता है, और यह हानिकारक भी नहीं है. स्टडी में यह भी बात सामने आई कि कई बार फ्लर्टिंग का बर्ताव कुछ लोगों को पसंद नहीं आता, बावजूद वे उसे सेक्शुअल हैरमेंट की तरह नहीं देखते. लेकिन यह समझना महत्वपूर्ण है कि हेल्दी फ्लर्टिंग स्ट्रेस नहीं देती. फ़्लर्टिंग तनाव को कम करके दिल को खुशी देती है. जबकि सेक्शुअल हैरसमेंट टेंशन और डिप्रेशन की ओर धकेलता है.
यह रिसर्च अमेरिका, कनाडा और फिलीपींस की कंपनियों के कर्मचारियों के बीच की गई. इस रिसर्च में मी-टू झेल चुके कर्मचारी भी शामिल थे. अध्ययन में शामिल ज्यादातर कर्मचारी यौन शोषण के बारे में पूछे जाने पर चुप साध रहे. लेकिन वर्क प्लेस पर फ़्लर्टिंग के बारे में उनका नजरिया पॉजिटिव देखने को मिला.
फ्लर्टिंग का लोग लुत्फ लेते हैं क्योंकि इसके कुछ लाभ भी हैं. इसमें आदमी को स्वयं को लेकर अच्छा महसूस होता है, जो उसे स्ट्रैस फ्री करता है और नींद भी अच्छी आती है. इस रिसर्च की दिलचस्प बात ये थी कि कर्मचारी फ्लर्टिंग पर स्टडी को लेकर खुश थे जबकि बॉस की पोजिशन पर बैठे लोग नाखुश नजर आए.
फ्लर्टिंग से मेंटल हेल्थ का भी रिश्ता
योगिता कादियान कहती हैं कि फ्लर्टिंग सेल्फ एस्टीम बूस्टर की तरह काम करती है और कॉन्फिडेंस हाई होता है. यह दुनिया को देखने-समझने का जरिया भी बनती है. विचारों का आदान-प्रदान भी बेहतर होता है.
लड़के का फ्लर्ट करना, लड़की का शर्माना
एक खूबसूरत लड़की के साथ फ्लर्टिंग करना जरा कठिन है. फ्लर्टिंग करना तब सरल बन जाता है, जब इसकी ठीक कला आती हो. कॉन्फिडेंस से आगे बढ़ना सबसे अधिक महत्वपूर्ण है. सामने वाले को एक मजबूत और पॉजिटिव पर्सनैलिटी आकर्षित करती है जिसमें छिछोरापन और हल्कापन एकदम न हो.
लड़की का फ्लर्ट, लड़के का झेपना
एकतरफा प्यार हमेशा कठिनाई पैदा करता है. लड़कियां खुलकर अपनी फीलिंग्स नहीं बतातीं और आधे-अधूरे संकेत देती हैं, जिसे लड़के सरलता से समझ नहीं पाते. ये संकेत इतने उलझे होते हैं कि लड़का इस कशमकश में रहता है कि यह केवल दोस्ती है या इससे भी कुछ ज्यादा.
शादियों में भी फ्लर्टिंग
फ्लर्टिंग का बेहतरीन उदाहरण शादियों में होने वाला हंसी मजाक है. विवाह के मौके पर हमउम्र लड़के-लड़कियां एक दूसरे के साथ फ्लर्टिंग करते नजर आते हैं. हंसी मजाक के साथ साथ एक दूसरे पर खूब तानाकशी भी की जाती है. कई बार यही खट्टी मीठी नोकझोंक और शरारतें एक और मंडप सजाने की तैयारी कर देती हैं.
दुल्हन की सहेलियों पर अक्सर दूल्हे के दोस्तों की नजर रहती है. दुल्हन की सहेली होने का मतलब है कि लड़की पूरे दिन फोकस में है. रस्मों रिवाज के समय दुल्हन के साथ सबसे आगे होने पर ये चमकती आंखें और निहारती भटकती नजरें कोई भी सरलता से पकड़ सकता है. इस फ्लर्ट का खूबसूरत अंजाम विवाह होती है.
फ्लर्ट कब बन जाता भद्दा और सेक्शुअल हैरमेंट
रिलेशनशिप काउंसलर डाक्टर धर चेतावनी के तौर पर कहते हैं कि कंधे पर हाथ रखना, रंग-रूप की प्रशंसा करना, साथ में कॉफी पीने के लिए इनवाइट करना आज पॉजिटिव फ्लर्टिंग बन चुका है. लेकिन यह ठीक समय और आदमी को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए. क्योंकि परिस्थितियां गलत होने पर यह मी-टू की शक्ल भी ले सकती है. फ्लर्टिंग एक सुखद और मीठा अहसास है जिसका गलत इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए.

