Magh Gupt Navratri : तैयार हो जाएं भक्त, अष्टमी पर इस विधि से करें मां बगलामुखी की आराधना
माघ मास की गुप्त नवरात्रि को बहुत खास पर्व माना जाता है। आज यानी 5 फरवरी को गुप्त नवरात्रि की अष्टमी तिथि है। गुप्त नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा गुप्त ढंग से की जाती है। मान्यता है कि इससे भक्त के सभी कष्ट खत्म हो जाते हैं और माता दुर्गा की विशेष कृपा मिलती है। आइए जानते हैं उज्जैन के पंडित आनंद भारद्वाज से कि आठवें दिन मां की आराधना कैसे करें।

मां बगलामुखी का महत्व
पंडितजी ने बताया, गुप्त नवरात्री के आठवें दिन मां बगलामुखी की पूजा करने का नियम है। मां बगलामुखी को पीताम्बरा और ब्रह्मास्त्र भी बोला जाता है। मां बगलामुखी के मुख से पीली आभा निकलती रहती है। इनकी पूजा में पीले रंग का विशेष महत्व है। मां बगलामुखी को स्तम्भन शक्ति की देवी माना जाता है। शास्त्रों में कहा गया कि सौराष्ट्र में आए महातूफ़ान को शांत करने के लिए भगवान विष्णु ने मां बगलामुखी की तपस्या की थी। भगवान विष्णु के द्वारा की गई तपस्या के फलस्वरूप मां बगलामुखी का प्राकट्य हुआ था। विशेष रूप से दुश्मन और विरोधियों को परास्त करने तथा मुकदमे में जीत हासिल करने के लिए मां बगलामुखी की उपासना अचूक मानी जाती है। मां को पीले रंग का भोग लगाना चाहिए।
आठवें दिन की पूजा विधि
मां बगलामुखी की साधना करने के लिए उत्तर दिशा की तरफ मुंह करके पीले वस्त्र धारण कर खड़े हो जाएं। अब मां को पीले रंग के फूल अर्पित करें। पूरी विधि से उनकी पूजा करें। इसके बाद मां को पीले रंग का प्रसाद चढ़ाएं। चाहें तो बेसन के लड्डू का भी भोग लगा सकते हैं। इस दिन मां की पूजा करने से जीवन से सभी प्रकार के संकट दूर होते हैं और जीवन सकारात्मकता से भर जाता है।
इन मंत्रों का जाप करें
-मां बगलामुखी का दुश्मन नाशक मंत्र: ॐ बगलामुखी देव्यै ह्लीं ह्रीं क्लीं दुश्मन नाशं कुरु
– मां बगलामुखी का तंत्र-मंत्र नाशक मंत्र: ॐ ह्लीं श्रीं ह्लीं पीताम्बरे तंत्र बाधां नाशय नाशय
– मां बगलामुखी का भय नाशक मंत्र: ॐ ह्लीं ह्लीं ह्लीं बगले सर्व भयं हर

