अब बेकार चीज़ों से करें कमाल, अपनाएं ये खास तरीका और जमीन को बनाएं सोना
आलू की खेती करने वाले किसानों के लिए यह मौसम बहुत अहम होता है। बुआई से पहले खेत की तैयारी ठीक ढंग से की जाए तो पैदावार कई गुना बढ़ सकती है। कृषि जानकारों का बोलना है कि यदि किसान आलू की बुआई से पहले जैविक और रासायनिक खाद का संतुलित इस्तेमाल करें तो न केवल आलू का उत्पादन दोगुना होगा, बल्कि मिट्टी की उर्वरता भी लंबे समय तक बनी रहेगी।

विशेषज्ञों के अनुसार अक्सर खेत में गिरने वाले पत्ते और फसल कटने के बाद बचने वाली पराली को किसान बेकार मानकर जला देते हैं। इससे न केवल मिट्टी की स्वास्थ्य खराब होती है, बल्कि वातावरण भी प्रदूषित होता है। लेकिन जिले के एक किसान शैलेन्द्र सिंह ने इसे खेती का वास्तविक खजाना बना दिया है। उन्होंने साबित कर दिया कि प्रकृति का दिया हर अवशेष उपयोगी है, बस ठीक ढंग से अपनाने की आवश्यकता है।
मिट्टी उगेलेगी सोना
किसान शैलेन्द्र सिंह पिछले 15 वर्षों से गोबर और पत्तों से जैविक खाद बना रहे हैं। उनका बोलना है कि खेत में गिरने वाले पत्ते और डंठल को जलाने की बजाय खाद में बदल दिया जाए तो मिट्टी सोना उगलने लगती है। आज वह 10 बीघा से अधिक जमीन पर शुद्ध जैविक खेती कर रहे हैं।उनकी फसलें न सिर्फ़ अधिक उत्पादन देती हैं बल्कि मिट्टी भी उपजाऊ और स्वस्थ बनी रहती है।
जैविक खाद बनाने की प्रक्रिया
खेत में 30 फीट लंबे और 3 फीट गहरे गड्ढे खोद दें। इसमें परत-दर-परत नीम की पत्तियां, पराली, गोबर और मिट्टी डाल दें। हर परत पर हल्का पानी का छिड़काव करें। इस तरह करीब 10 परतें डालने के बाद गड्ढा भर जाएगा। 90 दिन बाद यह अवशेष पूरी तरह सड़कर शुद्ध जैविक खाद बन जाएगा।
ऐसे तैयार करें प्राकृतिक कीटनाशक
खाद के अतिरिक्त शैलेन्द्र सिंह पत्तों से प्राकृतिक कीटनाशक भी बनाते हैं। नीम की पत्तियां, आंवले के पत्ते, गुड़ और गोमूत्र को मिलाकर 10 दिन तक रख दें ।इससे देसी कीटनाशक तैयार हो जाता है। इसे फसल पर छिड़कने से कीट और बीमारी दूर रहते हैं और यह पूरी तरह रसायन-मुक्त तरीका है।
पिता से मिली प्रेरणा
शैलेन्द्र को यह प्रेरणा अपने पिता से मिली थी। आज उनकी मेहनत और सोच के कारण न केवल उनके खेतों में हरियाली है बल्कि अन्य किसान भी इस मॉडल को सीखकर अपना रहे हैं। उनकी पहल से पराली और पत्तों को जलाने की परेशानी का निवारण भी दिखता है और पर्यावरण भी सुरक्षित रहता है।

