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धान की खेतों में झुलसा रोग के जाने निवारण

Agri Tips: मध्य प्रदेश के बालाघाट को धान का कटोरा बोला जाता है यहां धान की रोपाई का काम लगभग पूरा हो गया है वहीं, जिन लोगों ने समय से पहले धान की रोपाई की थी, उनके खेत में कुछ रोंगों ने दस्तक भी दे दी है इसी में से एक है करपा, जिसे झुलसा भी बोला जाता है इस बार ये रोग समय से पहले ही लग गई है कृषि महाविद्यालय मुरझड़ के प्रोफेसर डाक्टर उत्तम बिसेन ने इस रोग के लक्षण, असर और फसल को बचाने के तरीका बताए हैं किसान भाई इसे गंभीरता से लें…

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धान के खेतों में दिख रहा ब्लास्ट
कृषि महाविद्यालय मुरझड़ के प्रोफेसर डाक्टर उत्तम बिसेन ने बताया, बालघाट के कुछ किसानों के खेतों में ब्लास्ट यानी झुलसा बीमारी दिख रहा है यह कभी-कभी आने वाली रोग है धान में लगने वाली यह रोग अक्सर तब लगती है, जब मौसम अस्थिर होता है दरअसल, बारिश के मौसम में कभी-कभी अजीबोगरीब हालात बनते हैं इसमें दिन में अधिक तापमान का होना और रात में शुष्क वातावरण होता है यानी रात और दिन के तापमान में अधिक अंतर होता है तब इस बीमारी के लगने की संभावना बढ़ जाती है

रोग की ऐसे पहचान करें 
ब्लास्ट बीमारी में पत्तियों पर कत्थई रंग के धब्बे पड़ते हैं आरंभ में नाव और आंख के आकार में दिखते हैं लेकिन, हालात अनुकूल रही तो ये इसका आकार और बड़ा होने लगता है और पौधे को प्रभावित करते हैं इससे पूरा पौधा तो प्रभावित होता ही है कभी-कभी पूरी फसल ही चौपट हो जाती है यह रोग तीन हालत में आती है एक पत्तियों में दूसरा धान के पौधों के गठानों (नोड्स और इंटरनोड्स) में और बाली लगने की हालत में भी यह रोग लग सकती है यदि समय पर ब्लास्टीसाइड नहीं डाला तो हानि काफी हद तक बढ़ जाता है

इसके इलाज के उपाय
ब्लास्ट के लक्षण दिखे तो नाइट्रोजन का इस्तेमाल एकदम न करें वहीं, देसी विधि से बीमारी को कंट्रोल करने के लिए गाय के ताजे गोबर को पानी में घोल तैयार कर सकते हैं इसे कपड़े से छान लेना है इसके बाद इस घोल को पूरे खेत में छिड़कने से बीमारी पर नियंत्रण पाया जा सकता है जैविक दवाई सुडोमोनास फ्लुरोसन्स का एक लीटर या एक किलोग्राम प्रति एकड़ के हिसाब से भी इस बीमारी का नियंत्रण किया जा सकता है

 

रोग अधिक बढ़े तो ये करें इस्तेमाल करें
कृषि वैज्ञानिक ने बताया, यदि ये बीमारी अधिक बढ़ जाए, तब ऐसी स्थिति में ट्राइसाइक्लाजोल या कीटाजिन का इस्तेमाल कर भी ब्लास्ट को कंट्रोल कर सकते हैं

 

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