लाइफ स्टाइल

माता पिता जरूर करें ये काम, बच्चे नहीं छुपाएंगे कोई भी बात

आजकल कई पेरेंट्स की ये कम्पलेन होती है कि उनके बच्चे उनसे शीघ्र बात नहीं करते हैं…कोई भी चीज़ शीघ्र शेयर नहीं करते हैं… कुछ पूछो तो वो बताते नहीं है. ऐसे में क्या आपने कभी अपने बेहेवियर पर ध्यान दिया है कि बच्चे ऐसा क्यों करते हैं? हो सकता है इसके ज़िम्मेदार आप स्वयं हों. दरअसल, पैरंट्स और बच्चों के बेच बढ़ती मिसकम्युनिकेशन की वजह से बच्चे भटक जाते हैं. ऐसे में ठीक समय पर यह पेरेंटिंग टिप्स आपके बच्चों और आपके काम आ सकती है.

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  • दोस्ती का हाथ बढ़ाएं: बच्चों से उनकी दिल की बात जानने के लिए स्वयं भी बच्चा बनना पड़ता है. अगर आपका बच्चा आपसे कोई बात शेयर नहीं करता है तो सबसे पहले उसकी तरफ दोस्ताना हाथ बढ़ाएं. उसे ये एहसास दिलाएं कि आप उसके पैरेंट कम दोस्त ज़्यादा हैं. जब, वो आपको अपना दोस्त समझने लगेगा तब वो अपने दिल की बात शेयर करने लगेगा.
  • बच्चों के लिए समय निकालें: अगर आप चाहते हैं कि आपका बच्चा आपसे हर बात शेयर करे तो आप उसके लिए समय निकालना प्रारम्भ करें. यदि आप उसे समय ही नहीं देंगे तो वो आपसे इमोशनली क्लोज़ नहीं हो पायेगा. ऐसे में उसके लिए समय निकालें और उनसे बातें करना प्रारम्भ करें.
  • बात करते समय रहें नम्र: जब आप अपने बच्चों से बात कर रहे हों तब आप पैरेंट की बजाय दोस्त की तरह बात करें. अपना मिज़ाज़ थोड़ा नर्म रखें. आपकी आवाज़ जितनी फ्रेंडली होगी बच्चे उतनी ही शीघ्र घुल मिल जाएंगे.
  • बच्चों का विश्वास जीतें: बच्चो का विश्वास जितना बहुत ज़रूरी है. अगर, आप उनका विश्वास नहीं जीत पाए तो उनके मन में क्या चल रहा है आप कभी भी जान नहीं पाएंगे. यदि बच्चे आप पर भरोसा कर के कोई बात बताते हैं तो उनके विश्वास को टूटने न दें.
  • बच्चे को करें प्रोत्साहित: बच्चे यदि कोई बात करने में हिचकिचाते हैं तो उन्हें बताएं कि वो आपके लिए क्यों ख़ास हैं, उन्हें हमेशा प्रोत्साहित करें और यह भरोसा दिलाएं कि हर हाल में आप उनके साथ खड़े हैं.
  • सज़ा देने से बचें: अगर आप बच्चों से कुछ पूछ रहे हैं और वो आपको नहीं बता रहे हैं तो इस वजह से उन्हें तुरंत सजा देने पर न उतर जाएं. उन्हें डांटने, फटकारने या मारने की बजाय आप परेशानी का निवारण ढूंढे. उन्हें समझाएं और समय दें.
  • ध्यान से सुनें बच्चों की बातें: अगर बच्चा आपको कुछ बता रहे है उसकी बातों को ध्यान से सुनें. उससे बात करते समय आप अपना ध्यान मोबाइल या टीवी पर न दें. ऐसा करने से बच्चे को लगेगा कि उसकी बातें ज़रूरी नहीं है और वो आपको कुछ भी बताना ज़रूरी नहीं समझेगा.

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