पीएम कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस के लिए प्रोफेसर नहीं कर रहे आवेदन
उच्च शिक्षा विभाग ने 55 पीएम कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस और ऑटोनोमस कॉलेजों में प्राचार्य और फैकल्टी की पोस्टिंग करने के लिए चयन प्रक्रिया प्रारम्भ की गई है, लेकिन ज्यादातर प्रोफेसर्स इनमें रुचि नहीं ले रहे हैं. अन्य कॉलेजों में पदस्थ प्रोफेसर्स इन कॉलेजों

भोपाल के शासकीय हमीदिया कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय को पीएम कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस बनाया गया है. यहां की फैकल्टी इसी कॉलेज में बने रहने के लिए आवेदन नहीं कर रही है. यही कारण है कि अब तक 50 आवेदन भी विभाग के पास नहीं पहुंचे हैं, जबकि इन कॉलेजों में 1 हजार से अधिक पोस्ट हैं. मुद्दे में प्रोफेसर्स का बोलना है कि इस पोस्ट पर नियमानुसार प्रमोशन कर नियुक्ति की जानी चाहिए. कुछ प्रोफेसर इसलिए भी आवेदन नहीं कर रहे हैं, क्योंकि उनके रिटायरमेंट में एक से दो वर्ष का समय ही बचा है. इसलिए वे इस तरह से प्राचार्य नहीं बनना चाहते हैं.
अतिरिक्त संचालक स्वयं ही एप से दर्ज नहीं कर रहे उपस्थिति
उच्च शिक्षा विभाग की मंगलवार को वीडियो कॉन्फ्रेंस हुई. इसमें सभी कॉलेजों के प्राचार्य शामिल हुए. आयुक्त निशांत वरवड़े ने प्रेजेंटेशन की स्लाइड दिखाई. इसके मुताबिक 18 लोगों ने ही आवेदन किया है. भोपाल से केवल 2 आवेदन ही हुए हैं. आयुक्त ने पूछा- पीएम कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस और ऑटोनोमस कॉलेज के लिए आवेदन क्यों नहीं कर रहे हैं.
इसके बाद उन्होंने प्राचार्यों से बोला वे फैकल्टी से आवेदन करने को कहें. आवेदन की प्रक्रिया 10 जुलाई से प्रारम्भ हुई. अंतिम तारीख 29 जुलाई है. सार्थक एप की समीक्षा हुई. आयुक्त ने कहा- प्रदेशभर से कोई भी क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालक ने सार्थक एप के माध्यम से उपस्थिति दर्ज नहीं कर रहे हैं. जब अधिकारी भी उपस्थिति दर्ज नहीं करेंगे तो वे प्राचार्य और प्रोफेसर्स को उपस्थिति दर्ज कराने के लिए कैसे कहेंगे.
प्रक्रिया नियम संगत नहीं, ऐसे में कौन आवेदन करेगा?
^पहले से कार्यरत अधिकारी को हायर पोस्ट पर भेजने के लिए चयन प्रक्रिया हो सकती है. साक्षात्कार लिया जा सकता है. लेकिन उच्च शिक्षा विभाग के कॉलेजों में जो पहले से असिस्टेंट प्रोफेसर हैं, उन्हें असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए और जो प्रोफेसर हैं, उन्हें प्रोफेसर के लिए चयन प्रक्रिया में शामिल होने के लिए बोला जा रहा है. विभाग द्वारा प्रारम्भ की गई चयन प्रक्रिया को लेकर शिक्षकों में असंतोष है. इसलिए शिक्षक आवेदन नहीं कर रहे हैं. विभाग को इस तरह की पॉलिसी बनाने से पहले शिक्षक प्रतिनिधियों से चर्चा करनी चाहिए थी. असिस्टेंट प्रोफेसर भी लोक सेवा आयोग की मुश्किल परीक्षा क्वालिफाई होकर सिलेक्ट होते हैं. –डॉ। आनंद शर्मा, प्रांताध्यक्ष, प्रांतीय शासकीय महाविद्यालयीन प्राध्यापक संघ

