Relationship Advice: एक्सपर्ट्स की मदद से संवर सकता है आपका लगभग टूट चुका रिश्ता
हर रिश्ता अपनी एक खास कहानी कहता है, कुछ मीठे पल, कुछ उलझनें, और कई बार वो प्रश्न जो मन में चुपचाप घर कर जाते हैं. चाहे प्यार नया हो या वर्षों पुराना, कुछ दुविधाएं ऐसी होती हैं जो लगभग हर जोडे को छूती हैं. वजहें भले ही अलग हों, लेकिन परेशानियां अक्सर एक जैसी लगती हैं. इसी सोच के साथ हमने कुछ अनुभवी कपल्स थेरेपिस्ट से वार्ता की और जानने की प्रयास की, ऐसे कौन से जज्बात हैं, कौन-से सबक हैं, जिन्हें वो हर जोडे को बार-बार समझाते हैं? क्या ऐसा कोई सच है जो वे चाहते हैं कि हर रिश्ता समय रहते समझ जाए?

1. मतभेद तो होंगे ही, उन्हें संभालना आना चाहिए
हर संबंध में विवाद आता है. लेकिन बात ये नहीं कि मतभेद हैं या नहीं, वास्तविक बात ये है कि हम उन्हें कैसे संभालते हैं. नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी के फैमिली इंस्टीट्यूट से जुड़े मनोवैज्ञानिक डाक्टर एंथनी चेम्बर्स मानते हैं कि एक खुशहाल रिश्ता वो नहीं होता जिसमें कभी झगडा न हो ,बल्कि वो होता है जिसमें दोनों साथी झगडे को समझदारी से हैंडल करना जानते हों. उनके मुताबिक, संबंध में मतभेद चाहे छोटे-छोटे रोज के झंझटों को लेकर हों या गहरी उम्मीदों और अलग सोच से जुडे हों ,उन्हें सुलझाने के लिए तीन चीजें महत्वपूर्ण हैं: लचीलापन, जिज्ञासा, और विनम्रता.
डॉ। चेम्बर्स कहते हैं, ‘अगर आप वार्ता में इस इरादे से जाते हैं कि आप ही ठीक हैं और आपका पार्टनर गलत, तो निवारण कठिन होगा. लेकिन यदि आप ये मानते हैं कि ‘हम अपने मतभेदों को कई उपायों से सुलझा सकते हैं’, तो रिश्ता मजबूत बनता है.‘ मतभेद तो हर किसी के होते हैं, लेकिन जो जोडे उन्हें समझदारी से संभालते हैं, वहीं संबंध में सच्ची संतुष्टि पाते हैं.
2. टूटने के बाद जुडना भी एक कला है
हर झगडे के बाद जो सबसे महत्वपूर्ण चीज होती है, वो है ‘वापसी’ यानी फिर से एक-दूसरे से जुडना. मिनेसोटा की संभोग थेरेपिस्ट डाक्टर लॉरेन फोगेल मर्सी के मुताबिक, ‘रिश्ते की वास्तविक ताकत इस बात में होती है कि आप किसी मतभेद के बाद दोबारा कैसे जुडते हैं.‘ मरम्मत कोई जादू नहीं, बल्कि एक सीखने लायक स्किल है. माफी कैसे मांगनी है, किस पल बात करनी है, कब चुप रहना है ,ये सब समझदारी और अभ्यास से आता है.
हर आदमी की जुडने की भाषा अलग होती है. कोई गले लगने से शांत होता है, तो किसी को थोडा समय चाहिए होता है. कोई खुलकर बात करना पसंद करता है, तो कोई बस एक सॉरी सुनना चाहता है. संबंध में यही समझ महत्वपूर्ण है ,कि हम केवल बहस से नहीं, बल्कि बहस के बाद भी एक-दूसरे को समझने की प्रयास करें.
3. सही-गलत से अधिक महत्वपूर्ण है, क्या महसूस हो रहा है
कई बार जब बहस होती है, तो हमें लगता है कि हमें अपनी बात ‘साबित’ करनी है. लेकिन यही सोच हमें ऐसे मोड पर ला देती है जहां वार्ता की स्थान बहस होने लगती है और बहस से दूरी. मनोवैज्ञानिक और लेखिका डाक्टर एलेक्जेंड्रा सोलोमन कहती हैं, ‘जब हम केवल तथ्यों पर अटक जाते हैं, तो वो वार्ता नहीं रह जाती, वो मुकाबला बन जाती है, मैं बनाम तुम.‘ लेकिन यदि हम रुककर ये सोचें कि सामने वाला क्या महसूस कर रहा है? क्यों वो उस हालात को हमसे अलग देख रहा है? ,तो वहीं से संबंध में गहराई आती है. जब आप भावना को समझते हैं, तो आप सुलह की ओर बढते हैं. संबंध में ठीक होने से कहीं अधिक महत्वपूर्ण होता है साथ रहना.
4. संबंध में ‘बारी-बारी’ की अहमियत मत भूलिए
बचपन में हमें सिखाया गया था ,बारी-बारी से बोलो, खेलो, समझो. लेकिन बडे होकर हम अक्सर यही भूल जाते हैं. थेरपिस्ट जूली मेनानो कहती हैं कि कई कपल्स वार्ता के दौरान एक-दूसरे को सुनने के बजाय एक-दूसरे पर बोलने लगते हैं. कोई नहीं सुन रहा, सब ‘माइक’ थामे हुए हैं. संबंध में सच्चा संवाद तब होता है जब आप शांत होकर सुनें, समझें और उत्तर दें ,न कि केवल अपनी बात कहें.
5. बह जाना और तय करना ,एक जैसा नहीं होता
रिश्ते में बहुत कुछ बस ‘होता चला जाता है’. लेकिन क्या वो आपके निर्णय थे? थेरपिस्ट गैलेना रोड्स कहती हैं कि जीवन में बहने की बजाय सोच-समझकर निर्णय लेना संबंध को मजबूत बनाता है ,फिर चाहे वो संभोग से जुडा हो या साथ रहने के ढंग से. जो जोडे इस फर्क को समझते हैं, वही अपने संबंध की दिशा स्वयं तय करते हैं.
6. साथ खेलना केवल बच्चों का काम नहीं है
हंसी-मजाक, मस्ती, और खेल ,ये रिश्ता निभाने के ‘बॉन्डिंग टूल्स’ हैं. डाक्टर स्टीफन मिशेल कहते हैं, ‘खुश जोडे वो हैं जो मस्ती करना कभी नहीं छोडते.‘ एक मजेदार मैसेज, कोई पुराना जोक, या अचानक की गई डेट प्लानिंग ,ये छोटी-छोटी चीजें रिश्तों में जान डाल देती हैं.
7. ज्यादातर उत्तर आपके अंदर ही होते हैं
थेरपिस्ट जेफ गुएंथर कहते हैं, ‘आप पहले से जानते हैं कि क्या ठीक है और क्या नहीं.‘ आप किन बातों से बच रहे हैं, कहां समझौता कर रहे हैं ,आप जानते हैं. प्रश्न बस इतना है कि क्या आप वो कदम उठाने को तैयार हैं? कभी स्वयं से पूछिए ,’अगर मेरा सबसे अच्छा दोस्त मेरी स्थान होता, तो मैं क्या राय देता?’ उत्तर शायद वहीं मिल जाए.
8. आपका तनाव, आपके संबंध को भी तोड सकता है
जब आप स्वयं तनाव में होते हैं, तो प्यार करना भी कठिन हो जाता है. थेरपिस्ट एल्ट्जबेथ अर्नशॉ कहती हैं कि अनजाना तनाव रिश्तों में चुपचाप घुसकर दूरी बढा सकता है. यदि आप अपने तनाव को पहचानें, समझें और बेहतर ढंग से हैंडल करें ,तो आप अपने पार्टनर के लिए एक बेहतर साथ बन सकते हैं.

