केवल ज्योतिष शास्त्र में ही नहीं बल्कि हस्तरेखा विज्ञान में भी शनि ग्रह का मजबूत होना जरूरी कहा गया है. जिन लोगों की कुंडली नहीं है या कुंडली गलत बनी है, वे मजबूत या कमजोर शनि की पहचान अपने हाथ को देखकर कर सकते हैं. आइए जानते हैं, शनि कमजोर है या मजबूत, हाथ से कैसे पता लगाते हैं और शनि के कमजोर होने से जीवन पर क्या असर होते हैं?
हाथ में यहां है शनि का स्थान
हाथ की सबसे बड़ी अंगुली को ज्येष्ठा या मध्यमा (Middle Finger) कहते हैं. हस्तरेखा शास्त्र में इसे शनि की उंगली कहते हैं. इस उंगली के ठीक नीचे उभरे भाग को शनि पर्वत कहते हैं. वहीं, इसके पास की रेखा को शनि रेखा कहते हैं.
क्या है कमजोर शनि की निशानी?
किसी जातक (व्यक्ति) के हाथ में कमजोर शनि को शनि पर्वत, शनि रेखा और मध्यमा उंगली, इन तीनों से परखा जाता है. शनि पर्वत के धंसे होने को कमजोर शनि की निशानी माना जाता है. लेकिन इसकी पुष्टि के लिए शनि रेखा से की जाती है. यदि यह रेखा टूटी हुई, कई शिराओं में बंटी हुई या धुंधली होती है, तो इससे जीवन पर शनि का नकारात्मक असर अधिक होता है. यह शनि के कमजोर होने से होता है.
शनि उंगली है निर्णायक
हस्तरेखा एक्सपर्ट्स के मुताबिक, कमजोर शनि की निर्णायक पुष्टि शनि की उंगली यानी मध्यमा से होती है. जिस आदमी की मध्यमा उंगली अनामिका (Ring Finger) की ओर झुकी होती है, उनका शनि बहुत कमजोर माना जाता है. इसे आप नीचे दिए चित्र से समझ सकते हैं.
हस्तरेखा में कमजोर शनि का जीवन पर असर
हस्तरेखा विज्ञान के मुताबिक, कमजोर शनि के जीवन पर अनेक असर होते हैं, जिनमें सबसे जरूरी है, स्वभाव में उत्साह की कमी होना, हद से अधिक आलसी और सुस्त होना.
- किसी काम को टालने की प्रवृत्ति भी कमजोर शनि की निशानी है. नकारात्मक विचारों से ग्रस्त होना भी शनि का कमजोर होना दर्शाता है.
- शनि के कमजोर होने से आदमी करियर में बाधाएं बहुत अधिक आती हैं. जॉब मिलने में कठिनाई होती है. जॉब मिलने पर भी छूट जाती है.
- कमजोर शनि वाले जातकों की न सिर्फ़ इनकम कम होती है, बल्कि वे कर्जदार भी हो जाते हैं.
- बदन और जोड़ों का दर्द, पैरों के नीचे के हेल्थ इश्यूज से बार-बार परेशान होना कमजोर शनि की निशानी है.

