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श्री श्री रविशंकर ने बताया की कैसे लाएं पॉजिटिव माइंडसेट …

इंसान का दिमाग ही उसकी सबसे बड़ी ताकत होती है इसकी वजह से ही आदमी फर्श से अर्श तक का अपना यात्रा तय कर पाता है लेकिन यही दिमाग विनाश के लिए भी उत्तरदायी होता है विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार, हर वर्ष 7,20,000 लोग खुदकुशी करते हैं 15-29 की उम्र के युवाओं में सुसाइड तीसरा सबसे बड़ा मृत्यु का कारण बन गया है वहीं, एक रिपोर्ट से पता चलता है कि 2022 में केवल अकेले हिंदुस्तान में 1.71 लाख खुदकुशी के मुद्दे रिकॉर्ड हुए हैं

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यह आंकड़े डरावने हैं और अलार्मिंग हैं, कि अब आप अपने मानसिक स्वास्थ्य को गंभीरता से लें अपने दिमाग को इस तरह से ट्रेन करें कि वह परेशानियों का सरलता से सामना कर सके ऐसे में आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक और अध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर के उपदेश बहुत कारगर सिद्ध हो सकते हैं

सकारात्मक वातावरण की आवश्यकता

गुरुदेव का मानना है कि मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को लेकर लोगों में डर और संकोच है ऐसे में एक सुरक्षित और समझदार माहौल बनाना महत्वपूर्ण है, जहां लोग बिना किसी भय के अपनी चिंताओं को साझा कर सकें हमें यह समझने की जरूरत है कि कोई भी आदमी अकेला नहीं है; समाज में ऐसे लोग हैं जो आपकी परवाह करते हैं और सहायता के लिए तैयार हैं

पॉजिटिव माइंडसेट कैसे लाएं?

प्राण ऊर्जा, जिसे सूक्ष्म जीवन-शक्ति भी बोला जाता है, हमारे मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी होती है जब प्राण का स्तर ऊंचा होता है, तो मन में सकारात्मकता और विस्तार की भावना जागृत होती है इसके विपरीत, जब मन में तनाव होता है, तो प्राण का स्तर कम हो जाता है, जिससे उदासी और आक्रामकता उत्पन्न हो सकती है

मन को शांत करने वाले योग 

गुरुदेव बताते हैं कि प्राण ऊर्जा को बढ़ाने के लिए ध्यान और सुदर्शन क्रिया जैसे अभ्यास जरूरी हैं योग के विभिन्न प्राणायाम जैसे उज्जयी, भस्त्रिका और नाड़ी शोधन भी मानसिक स्वास्थ्य में सुधार करने में सहायक हैं इसके अलावा, संगीत और नृत्य जैसे कलात्मक गतिविधियां भी प्राण ऊर्जा को बढ़ाने में मददगार साबित होती हैं

दिमाग से बुरे ख्यालों को निकालने के लिए करें मेडिटेशन

तनाव मुक्त और अत्याचार मुक्त समाज बनाने के लिए ध्यान एक जरूरी साधन है ध्यान न सिर्फ़ मानसिक शांति प्रदान करता है, बल्कि यह सकारात्मक सोच को भी बढ़ावा देता है इसके साथ ही, अच्छी नींद और नियमित व्यायाम भी मानसिक स्वास्थ्य को सुधारने में सहायता करते हैं

इन पुस्तकों से लें समस्याओं से लड़ने की प्रेरणा

अध्यात्मिक गुरु की मानें तो भगवद गीता और उपनिषद जैसी प्राचीन ग्रंथों का शोध मानसिक स्थिति को संतुलित रखने में सहायक होता है इन ग्रंथों में जीवन की गहरी समझ और चुनौतियों का सामना करने की प्रेरणा दी गई है

चुनौतियों को विकास का अवसर समझें

हर किसी के जीवन में चुनौतियां आती हैं, लेकिन यह जरूरी है कि हम इनसे टूटें नहीं दुख को एक सीढ़ी के रूप में देखना चाहिए, जो हमें आगे बढ़ने का अवसर प्रदान करता है हमारी आंतरिक क्षमताओं की खोज और विकास के लिए यह एक परेशानियां महत्वपूर्ण है

 

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