इस शिव मंदिर के आगे अंग्रेजों को भी होना पड़ा था नतमस्तक
आगरा शहर को ईश्वर शिव की नगरी भी बोला जाता है। आगरा के चारों कोने पर ईश्वर महादेव के मशहूर 4 मंदिर उपस्थित है।शहर के भीतर केंद्र में बसा रावली महादेव मंदिर भी लोगों के बीच आस्था का केंद्र बना हुआ है। यह 800 वर्ष से अधिक पुराना मंदिर है। इसका इतिहास भी अपने आप में अनूठा है।
कहा जाता है कि अकबर के शासन काल में राजा मान सिंह अफगानिस्तान की लड़ाई में गए थे और वहां से लौटते समय अटक पहाड़ी से ईश्वर शिव की शिवलिंग लेकर वापस लौटे थे। जिस स्थान पर मंदिर है वहां शिव लिंग की स्थापित की। कालांतर में अंग्रेजों से जुड़ी एक कहानी और फेमस है। अंग्रेज मंदिर के नजदीक रेलगाड़ी गुजार रहे थे। लेकिन मंदिर बीच रास्ते में आ रहा था ।अंग्रेजों ने मंदिर को तोड़ने की प्रयास की। लेकिन सफल नहीं हो पाए। विवश होकर रेल की पटरियों को मोड़ना पड़ा।
ऐसे पड़ा रावली महादेव नाम
मंदिर के महंत सौरव शर्मा बताते हैं कि रावली महादेव मंदिर का इतिहास अकबर के शासनकाल से जुड़ा हुआ है। रावली महादेव मंदिर, एमजी रोड मंदिर का इतिहास मुगल बादशाह अकबर के शासनकाल में आमेर के राजा मानसिंह युद्ध के लिए अफगानिस्तान गए थे। उन्हें अटक पहाड़ी पर एक शिवलिंग मिला। वे शिवलिंग लेकर जा रहे थे, आज जहां रावली मंदिर है। वहां उन्होंने शिवलिंग रख दिया। इसके बाद शिवलिंग को कहीं और नहीं ले जा सके। मंदिर के आसपास रावल राजपूत रहते थे, इसलिए इसका नाम रावली महादेव मंदिर पड़ गया।
अंग्रेज उठाना चाहते थे शिवलिंग, नहीं हो पाए सफल
कालांतर में रावली महादेव मंदिर को लेकर कई कहानियां मशहूर हैं लेकिन इन सब में सबसे फेमस है अंग्रेजों से जुड़ी हुई कहानी। ब्रिटिश शासनकाल में आगरा में रेलवे लाइन बिछाई गई, बीच में मंदिर था। शिवलिंग को उस स्थान से कुछ दूरी पर विस्थापित करने के कोशिश किए गए लेकिन इंजीनियर सफल नहीं हुए। इसलिए रेल लाइन को मंदिर के सामने घुमाकर बिछाना पड़ा। यहां आज भी रेल की पटरी एस (S) आकार की आकृति में बनी हुई है।
भक्तों की इच्छा होती है पूरी
मान्यता है कि मंदिर आने वाले हर भक्त की इच्छा पूरी होती है। इसके लिए 11, 21, 41 दिन भक्त नियमित जलाभिषेक करने के लिए आते हैं।हर सोमवार पर मेला लगता है और बड़ी संख्या में भक्त दर्शन करने के लिए आते है।
ऐसे पहुंचे रावली मंदिर
रावली शिव मंदिर कलक्ट्रेट के निकट है, इस मंदिर पर सावन के साेमवार के साथ-साथ शिवरात्रि पर विशेष पूजा-अर्चना के लिए शिव भक्त पहुंचते हैं। पहुंचने के लिए कई रास्ते हैं।एमजी रोड से यहां सरलता से पहुंचा जा सकता है। मंदिर के बगल में मुख्य दरवाजे पर पार्किंग की प्रबंध है

