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गर्मी आते ही बेहद खतरनाक हुए ये 2 सांप, जानें लक्षण और बचाव के उपाय

गर्मी का मौसम प्रारम्भ होने के बाद अब सांप भी एक्टिव हो गए हैं खरगोन सहित निमाड़ अंचल की बात करें, तो यहां गर्मी के दिनों में हिंदुस्तान के सबसे जहरीले सांपों की दो प्रजातियां \”कोबरा और रसैल वाइपर\” के काटने के सबसे अधिक मुकदमा सामने आते हैं सर्प जानकारों की माने, तो चार महीने शीत निद्रा से जागने के बाद यह सांप अफिर से सक्रिय हो गए हैं और भोजन की तलाश में खेत खलियानों, रहवासी इलाकों या कई बार घरों के अंदर तक भी यह सांप घुस जाते हैं, जिसे स्वयं को बचाना एक चुनौती भरा काम होता है

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हालांकि, इस समय जहरीले सांपों के अतिरिक्त बिना जहर वाले सांपों की संख्या भी बहुतायत में प्रायः देखी जाती है और यह सांप न केवल लोगों के संपर्क में आते हैं, बल्कि खतरा महसूस होने पर फुर्ती से अटैक भी करते हैं आमतौर पर लोग इस तरह के सांपों के काटने पर भी घबरा जाते हैं और इसी घबराहट की वजह से वह दम तोड़ देते हैं क्योंकि लोग यह पता नहीं लगा पाते हैं कि जिस सांप ने उन पर अटैक किया है वह जहरीला था या बिना जहर वाला

गर्मी में किस प्रजाति के सांप देखे जाते हैं?
खरगोन के मंडलेश्वर के निवासी स्नेक एक्सपर्ट एवं स्नेक कैचर महादेव पटेल बताते हैं कि, गर्मी के इस सीजन में मार्च और अप्रैल यह दो महीने ऐसे हैं, जिनमें कोबरा और रसैल वाइपर की प्रजातियां सबसे अधिक सक्रिय होती है यह दोनों ही सांप हिंदुस्तान के सबसे अधिक जहरीले सांपों में बिग फोर की सूची में आते हैं यह इतने जहरीले होते हैं की समय रहते यदि उपचार न मिले तो आदमी की मृत्यु निश्चित है लेकिन, कुछ लक्षणों के आधार पर जहर का पता लगाना आसान हो जाता है

कोबरा में कौन सा जहर होता है?
यह सांप दिखने में जितने सुंदर और सुन्दर होते हैं, उससे कहीं अधिक जहरीला इनका विष होता है हालांकि, इन दोनों ही सांपों में भिन्न-भिन्न प्रकार का जहर पाया जाता है न्यूरोटॉक्सिन और हिमोटोएक्सिन इनके लक्षण भी भिन्न भिन्न होते है कोबरा सांप काटने पर न्यूरोटॉक्सिन जहर छोड़ता है इस जहर का असर इतना घातक होता है कि, सीधे तंत्रिका तंत्र पर धावा करता है, जिससे शिकार की मांसपेशियों में पैरालिसिस आ जाता है

रसैल वाइपर में कौन सा जहर होता है?
जबकि, रसैल वाइपर प्रजाति के सांप काटने पर हैमोटोएक्सिन जहर छोड़ते है जो कोबरा के बिल्कुल उलट है इस जहर की वजह से शिकार के शरीर में रक्त का प्रवाह बढ़ जाता है, जो रक्तकोशिकाओं को नष्ट करने लगता है, ओर फिर मांसपेशियां गलने लग जाती है लेकिन, समय पर उपचार मिल जाए तो इससे बचा जा सकता है

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