वास्तुदोष दूर करने से लेकर समृद्धि दिलाने तक इन फूलों का किया जाता है इस्तेमाल
मान्यता है कि सफेद-पीले रंगों वाले नागकेसर के फूल ईश्वर शिव को बहुत पसंद हैं। वास्तुदोष दूर करने से लेकर समृद्धि दिलाने और तंत्र साधना तक में इन फूलों का इस्तेमाल किया जाता है। नागकेसर के सूखे फूलों से दवाएं और मसाले भी बनते हैं। इन फूलों से बने रंग से रेशम रंगा जाता है। श्रीलंका में इसके बीज से ऑयल निकालकर उससे दीया जलाते हैं और दवाएं भी बनाते हैं।
नागकेसर की लकड़ी कुल्हाड़ी से भी मजबूत
इसकी लकड़ी इतनी मजबूत होती है कि उसे काटने में कुल्हाड़ी की धार खराब हो जाती है, लेकिन वह सरलता से नहीं कटती। इसलिए नागकेसर को वज्रकाठ भी कहते हैं। नागकेसर को नागचंपा, नागेसर भी कहते हैं। संस्कृत में इसे नागपुष्प, अहिकेशर, गजकेसर और देववल्लभ जैसे नाम दिए गए हैं, जबकि संस्कृत में इसे Cobra’s saffron और Ceylon ironwood के नाम से जाना जाता है।
नागकेसर के फूल, बीज और जड़ रोंगों से बचाएं
रेजुवा एनर्जी सेंटर, मुंबई में नेचुरोपैथ एंड एक्यूपंचरिस्ट डाक्टर संतोष पांडेय बताते हैं कि नागकेसर के फूल, बीज, ऑयल में औषधीय गुण पाए जाते हैं। इसके फूल एंटीबैक्टीरियल और एंटीसेप्टिक होते हैं। त्चचा के कटने-फटने पर इसका इस्तेमाल किया जाता है। इसका ऑयल लगाने से घाव शीघ्र भरता है। बीज, छाल और रेजिन से तैयार ऑयल दर्द और सूजन में राहत देता है।
नागकेसर खाने से शरीर को ताकत मिलती है और बीमारी दूर भागते हैं। बुखार, गले और पेट से जुड़ी बीमारियों, सिर दर्द समेत पीरियड्स से जुड़ी समस्याओं और दिल के लिए यह लाभ वाला माना जाता है।
अस्थमा, सर्दी-जुकाम में संजीवनी से कम नहीं
सर्दी और प्रदूषण बढ़ने के बाद लोग सांस और गले से जुड़ी समस्याओं से जूझ रहे हैं। इन परेशानियों में तो तो नागकेसर संजीवनी की तरह काम करता है। यह सर्दी, जुकाम, खांसी, अस्थमा समेत सांस के रोगों में यह बहुत कारगर माना जाता है। इसकी जड़ और छाल का काढ़ा पीने से फेफड़ों की सूजन दूर होती है और वह स्वस्थ रहते हैं।
सर्दियां आते ही जोड़ों का दर्द भी बढ़ जाता है। बुजुर्गों के साथ ही अब युवाओं को भी गठिया से जूझना पड़ रहा है। इस दर्द से राहत पाने के लिए नागकेसर के बीज से बने ऑयल से मालिश कर सकते हैं। कमर दर्द से परेशान हों, तब भी इस ऑयल से मालिश करने पर काफी आराम मिलता है।
पीरियड्स में फायदेमंद, बांझपन भी दूर करे
महिलाओं के लिए भी नागकेसर बहुत लाभ वाला है। छाछ के साथ इसके पाउडर का सेवन करने से ल्यूकोरिया और पीरियड्स के दिनों में अधिक ब्लीडिंग और दर्द में आराम मिलता है। यह प्रजनन क्षमता बढ़ाने में भी मददगार है। माना जाता है कि पीपल, कालीमिर्च और सोंठ के साथ नागकेसर पीसकर घी के साथ खाने से बांझपन की परेशानी से छुटकारा मिल जाता है।
गाय के दूध या फिर सुपारी के साथ नागकेसर का पाउडर खाने से भी प्रेग्नेंसी में सहायता मिलती है। यह स्त्रियों के एग्स की क्वॉलिटी को सुधारने में भी मददगार है। पीरियड्स के बाद नागकेसर के फूल का पाउडर खाने से गर्भाशय हेल्दी रहता है।
सांप-बिच्छु के जहर को करे बेअसर, लिवर-दिल को करे मजबूत
नागकेसर शरीर से जहरीले तत्वों को बाहर निकाल देता है। शरीर में सूजन की परेशानी से छुटकारा दिलाता है। सांप, बिच्छु के काटने वाली स्थान पर इसकी पत्तियां पीसकर लगाने से दर्द और जलन में राहत मिलती है। शरीर को हानि पहुंचाने वाले जहरीले तत्व बाहर निकल जाने से लिवर हेल्दी रहता है। इसके सेवन से कोलेस्ट्रॉल लेवल कंट्रोल में रहता है और दिल मजबूत बनता है। जिससे दिल की रोंगों का खतरा कम होता है।
पाचन तंत्र के लिए फायदेमंद, बवासीर में दे आराम
नागकेसर को पाचन तंत्र के लिए बहुत लाभ वाला माना जाता है। खासकर इसके बीज पाचन क्षमता सुधारते हैं और कब्ज, अपच, एसिडिटी और जलन जैसी परेशानियों से छुटकारा दिलाते हैं। कई बार खानपान में धांधली की वजह से पेट खराब हो जाता है और दस्त लग जाते हैं और साथ में खून भी निकलने लगता है।
नागकेसर के फूल दस्त में लाभ वाला माने जाते हैं। शहर और मक्खन के साथ इसके बीज का पाउडर खाने से खूनी दस्त में आराम मिलता है। खूनी बवासीर में भी नागकेसर को काफी कारगर माना जाता है।
हिचकी और त्वचा की समस्याओं में दिलाए राहत
अगर हिचकी से परेशान हो गए हों तो शहद, मिश्री और गन्ने के रस के साथ नागकेसर के पाउडर का सेवन करने से आराम मिलेगा। त्वचा से जुड़ी परेशानियों से बचाने में भी नागकेसर बहुत मददगार है। सोरायसिस और त्वचा से जुड़े दूसरे इंफेक्शन से बचाने में भी इसका ऑयल कारगर माना जाता है। इस ऑयल से खाज-खुजली की कठिनाई दूर हो जाती है।
बिना राय न करें नागकेसर का इस्तेमाल
नागकेसर का आवश्यकता से अधिक इस्तेमाल करने पर इसके कई साइड इफेक्ट भी हो सकते हैं। जी मिचलाने, उल्टी, सीने में जलन, पेट दर्द और हाई बीपी जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। प्रेग्नेंसी के दौरान इसका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। यदि किसी तरह की स्वास्थ्य परेशानी का सामना कर रहे हैं, तब बिना चिकित्सक की राय के नागकेसर का इस्तेमाल करने से परहेज करें।
नागकेसर बढ़ाए सुख-समृद्धि, दिलाए सम्मान
ज्योतिष, वास्तु शास्त्र के साथ ही नागकेसर का धार्मिक महत्व भी है। मान्यता है कि पूर्णिमा वाले सोमवार को शिवलिंग पर बेलपत्र के साथ नागकेसर चढ़ाने से महादेव प्रसन्न होते हैं। घर, दुकान और ऑफिस में इन फूलों को रखने से धन बढ़ता है।
वास्तु शास्त्र के अनुसार नागकेसर की लकड़ी से हवन करने पर वास्तुदोष दूर हो जाता है। जिस घर में नागकेसर का पौधा होता है, वहां सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और घर में सुख-समृद्धि आती है, मान-सम्मान में बढ़ोतरी होती है। माथे पर कुमकुम, चमेली के फूल, घी, तगर के साथ नागकेसर का टीका लगाने से तेज और आकर्षण बढ़ता है।

