मटर की बुवाई करने से पहले जाने ये आवश्यक बाते…
आजमगढ़। यदि आप सब्जी की खेती कर रहे हैं और सितंबर के महीने में किसी ऐसे फसल की बुवाई करना चाहते हैं, जो ठंड का मौसम प्रारम्भ होते-होते आपकी कमाई का बेहतरीन जरिया बन सके, तो आपके लिए मटर की खेती बहुत लाभदायक हो सकती है। मटर की खेती अक्टूबर मध्य से लेकर नवंबर का महीना सबसे अनुकूल माना जाता है। इसके अतिरिक्त शीघ्र पकने वाली प्रजाति के लिए सितंबर के आखिरी हफ्ते से अक्टूबर के मध्य तक का समय अनुकूल होता है। यह एक ऐसी फसल है, जो महज दो से ढाई महीने में पूरी तरह से तैयार हो जाती है, जिसे बाजार में बेचकर तगड़ा फायदा भी कमाया जा सकता है। ठंड के महीने में मटर की खपत बाजार में काफी अधिक होती है, ऐसे में यह एक ऐसी फसल है, जिसकी खेती किसानों के लिए बहुत लाभदायक हो सकती है।

इस तरह से करें बुवाई
किसी भी फसल की बुवाई से पहले खेत को ठीक तरह से तैयार करना बहुत जरूरी होता है। मटर की बुवाई करने से पहले खेत की गहरी जुताई करना बहुत जरूरी होता है। जुताई के बाद मिट्टी को समतल करें और मिट्टी में नमी बनने के लिए मामूली सिंचाई भी करना महत्वपूर्ण होता है। जिस मिट्टी में नमी बनी रहे और बीजों को अंकुरित होने में सहायता मिल सके। बीच की बुवाई करते समय किसानों को पौधों के बीच में उचित दूरी रखना बहुत जरूरी होता है। इसके लिए 15 से 20 सेंटीमीटर की दूरी महत्वपूर्ण होती है। वहीं पंक्तियों से पंक्तियों के बीच की दूरी भी 30 से 40 सेंटीमीटर होनी चाहिए। इसके अतिरिक्त बीज को तकरीबन तीन से चार सेंटीमीटर गहराई पर बोना महत्वपूर्ण होता है।
प्रति एकड़ 8 से 10 कुंतल तक की उपज
कृषि एक्सपर्ट डाक्टर अखिलेश बताते हैं कि मटर की बुवाई के लिए प्रति एकड़ तकरीबन 20 से 25 किलो बीच की जरूरत होती है। वहीं मिट्टी की गुणवत्ता और ठीक देखरेख करते हुए किसान प्रति एकड़ तकरीबन 8 से 10 कुंतल तक की उपज प्राप्त कर सकते हैं। अधिक नमी के कारण मटर की खेती में फफूंद बीमारी लगने का भी खतरा होता है। इसके लिए फफूंद नाशक दवाओं से उपचारित करना भी महत्वपूर्ण होता है। ताकि बीज कोई इस तरह के रोगों से बचाव किया जा सके। इसके अतिरिक्त मटर की फसल के लिए प्रति एकड़ तकरीबन 20 से 25 किलो नाइट्रोजन 20 किलो फास्फोरस 10 से 12 किलो पोटाश का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त किसान चाहें, तो इसके लिए जैविक उर्वरक का भी इस्तेमाल कर सकते हैं जिससे फसलों की अच्छी गुणवत्ता और बेहतर उपज प्राप्त की जा सकती है।

