आयुर्वेद में ये सेहत के लिए है वरदान

यूपी के हाथरस स्थित प्रेम रघु आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज की प्रिंसिपल डाक्टर सरोज गौतम ने News18 को बताया कि आयुर्वेद में गुड़ को रासायनिक तत्वों और खनिजों का समृद्ध साधन माना गया है। यह शरीर में “पित्त” और “वात” को संतुलित करता है और शरीर को ठंडक प्रदान करता है। आयुर्वेदिक ग्रंथों में गुड़ को शरीर के अंदर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने के रूप में देखा गया है। यह खून को शुद्ध करने, पाचन प्रक्रिया को सुधारने और शरीर से अतिरिक्त गर्मी को बाहर निकालने में सहायता करता है। आयुर्वेद के मुताबिक गुड़ के सेवन से शरीर में प्राकृतिक संतुलन बनाए रखा जा सकता है।
आयुर्वेदिक चिकित्सक के मुताबिक गुड़ का सेवन पाचन तंत्र के लिए अत्यधिक लाभ वाला है। यह पाचन क्रिया को बेहतर बनाता है, आंतों को एक्टिव करता है और पेट के भीतर गंदगी और विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालता है। आयुर्वेद के मुताबिक गुड़ को खाने से पेट की समस्याएं जैसे गैस, सूजन और कब्ज़ में राहत मिलती है। यह आंतों के सामान्य कार्य को सुचारु बनाता है और भोजन को ठीक से पचाने में सहायता करता है। आयुर्वेद में इसे पाचन तंत्र को साफ और स्वस्थ रखने के लिए एक उत्तम आहार माना गया है।
गुड़ आयरन से भरपूर होता है, जो शरीर में खून की कमी यानी एनीमिया को दूर करने में सहायता करता है। गुड़ का सेवन शरीर में खून के निर्माण की प्रक्रिया को बेहतर बनाता है। खून की कमी को दूर करने के लिए आयुर्वेद में गुड़ के साथ तिल, चना, और अदरक का सेवन करने की राय दी जाती है। यह शरीर में हीमोग्लोबिन का स्तर बढ़ाता है और खून को शुद्ध करता है। गुड़ में कैल्शियम और फास्फोरस जैसे मिनरल्स भी होते हैं, जो हड्डियों और दांतों को मजबूत बनाने में सहायता करते हैं। आयुर्वेद में इसे हड्डियों को मजबूत बनाने और गठिया जैसे रोगों से बचने के लिए लाभ वाला माना जाता है। गुड़ का सेवन हड्डियों की संरचना को बेहतर बनाता है और लंबे समय तक हड्डियों के स्वास्थ्य को बनाए रखता है।

