बीमारियों का नाश करता है ये भगवान राम का पसंदीदा फल
सर्दी की दस्तक के साथ ही राजस्थान के जंगलों में बड़ी मात्रा में पैदा होने वाला एक खास फल ऐसा है जिसे जंगलों का सेब बोला जाता है। दिवाली के ठीक बाद करौली के डांग क्षेत्रों में बेर नाम का यह फल इतनी बड़ी मात्रा में उगता है कि लोग 4 महीने इसका फ्री में ही स्वाद लेते हैं। औषधीय गुणों से भरपूर होने के साथ इसका धार्मिक महत्व भी है। यह फल हिंदू धर्म में देवताओं से लेकर भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए सबसे अधिक चढ़ाया जाता है। इस खास फल का जिक्र रामायण जैसे ग्रंथ में भी आया है। इसलिए इसे भगवान राम का भी पसंदीदा फल बोला जाता है।

सबसे खास बात यह है कि इस फल को खाना हर किसी को पसंद होता है। जंगलों में उगने वाला यह एकमात्र ऐसा फल है, जिसे आदमी और पशु दोनों ही खूब खाते हैं। दीपावली के बाद जैसे ही बेर का सीजन आता है बाजारों में भी इसकी मांग बढ़ जाती है। खाने में खट्टा-मीठा लगने वाला यह छोटा सा फल स्वास्थ्य के लिए भी काफी लाभ वाला होता है। बेर कई रोंगों का रामबाण उपचार भी बोला जाता है। इसमें पाए जाने वाले कई गुण ऐसे हैं जो बड़ी-बड़ी रोंगों को जड़ से खत्म कर देते हैं। गांव के बड़े बुजुर्गों की मानें तो यह फल त्रेतायुग का फल बोला जाता है। इसका जिक्र भगवान राम के समय में भी आया है।
ज्योतिष की दृष्टि से भी बेर का महत्व
हिंडौन के मशहूर ज्योतिषी पं। धीरज शर्मा कहते हैं कि ज्योतिष की दृष्टि से भी बेर का अत्यधिक महत्व है। देवउठनी एकादशी पर देवताओं को प्रसन्न करने और जागने के लिए इसी फल का सबसे अधिक प्रयोग किया जाता है। वह बताते हैं कि त्रेता युग में भी भगवान राम ने शबरी का यही झूठा फल बेर खाया था। माता शबरी ने भी उस समय भगवान राम को यह फल खिलाया था। इसी फल को खिलाने के बाद भगवान राम ने उन्हें नविधा भक्ति का आशीर्वाद दिया था।
बेर का भगवान शिव से भी है गहरा संबंध
ज्योतिष पंडित धीरज शर्मा बताते हैं कि भगवान शिव से भी इस फल का गहरा संबंध है। यदि देखा जाए तो बेर की आकृति शिवलिंग जैसी ही होती है। वह बताते हैं कि भगवान शिव पर बेर चढ़ाने से लक्ष्मी की प्राप्ति होती है। इस फल की ऐसी भी मान्यता है कि यदि सात बेर भगवान शिव को चढ़ा दिए जाए तो बड़े से बड़ा असाध्य बीमारी भी खत्म हो जाता हैं। इसलिए धार्मिक दृष्टि से भी बेर का अत्यधिक महत्व है।

