Tips & Tricks: जरूर आजमाएं कान की गंदगी साफ करने का यह अचूक उपाय
कान का मैल यानी ईयरवैक्स हमारे शरीर द्वारा बनाया गया एक प्राकृतिक पदार्थ है। यह कानों की अंदरूनी त्वचा की रक्षा करता है और धूल, कीड़े या बैक्टीरिया को अंदर जाने से रोकता है। लेकिन जब यह अधिक मात्रा में बनने लगता है, तो यह कान के रास्ते को बंद कर देता है, जिससे सुनने में दिक्कत, दबाव, दर्द या घंटी जैसी आवाज सुनाई देने लगती है।

डॉक्टर सुभाष कुमार ने कहा कि लोग अक्सर कॉटन बड या पिन से कान साफ करने की प्रयास करते हैं, जो बहुत घातक हो सकता है। इससे मैल बाहर आने के बजाय अंदर चला जाता है और कान के पर्दे पर दबाव डालता है। परिणामस्वरूप कान में दर्द, संक्रमण, सुनने की क्षमता कम होना या गंभीर मामलों में कान का पर्दा फटने तक की नौबत आ सकती है।
उन्होंने बोला कि कान के मैल को घोलने का सबसे आसान तरीका है – हाइड्रोजन पेरॉक्साइड। एक ड्रॉपर में 1–2 बूंदें भरकर नहाने से 10 मिनट पहले कान में डालें। जब आप नहाते हैं, तो पानी कान में जाकर उस पिघले हुए मैल को धीरे-धीरे बाहर निकाल देता है। इससे कान के अंदर सफाई हो जाती है और सुनने में हल्कापन महसूस होता है।
उन्होंने बोला कि यदि कानों में खुजली या सूखापन महसूस हो रहा है, तो प्रतिदिन 1 बूंद मिनरल ऑयल डालना लाभ वाला होता है। यह कान की अंदरूनी त्वचा को मॉइस्चराइज रखता है, खुजली को कम करता है और नया मैल बनने से रोकता है। चिकित्सक के अनुसार यह एक सुरक्षित और प्राकृतिक घरेलू तरीका है
पुराने और कठोर मैल के लिए चिकित्सक सिरिंज विधि बताते हैं। एक बर्तन में आधा गुनगुना पानी और आधा हाइड्रोजन पेरॉक्साइड मिलाएं। फिर सिरिंज से यह मिश्रण धीरे-धीरे कान में डालें। इससे अंदर जमा मैल ढीला होकर बाहर आ जाता है। इस दौरान सावधानी बरतने के लिए पानी ठंडा न हो, अन्यथा चक्कर या वर्टिगो की परेशानी हो सकती है। इस विधि को या तो बहुत सावधानी से करें या चिकित्सक से कराएं।
सिरिंज वाला तरीका तब ही अपनाएं जब आपको इसका ठीक तरीका पता हो। यदि यह मिश्रण कान के पर्दे के पास चला गया तो संक्रमण या दर्द की संभावना बढ़ सकती है। इसलिए चिकित्सक की राय लेकर ही यह प्रक्रिया करें। उन्होंने बोला कि कान की परत नाजुक होती है, ऐसे में सावधानी बरतें।
ईयरवैक्स सिर्फ़ मैल नहीं बल्कि एक प्रोटेक्टिव फिल्टर है। यह बैक्टीरिया और फंगस को पनपने से रोकता है, जिससे कान संक्रमण से सुरक्षित रहता है। इसलिए बार-बार कान की सफाई करने की आवश्यकता नहीं होती, शरीर स्वयं संतुलन बनाता है।

