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UPSC IFS Topper: 3 बार असफलताओं का सामना करने के बाद कनिका के लिए बेहतरीन था AIR 1 का अनुभव

यूनियन पब्लिक सर्विस कमिशन की तरफ से भारतीय फॉरेस्ट सर्विस एग्जामिनेशन का परिणाम आखिरकार जारी कर दिया गया जिसमें इस बार झारखंड की राजधानी रांची की कनिका ने AIR 1 रैंक लाकर रांची के साथ पूरे झारखंड का नाम रोशन किया कनिका ने लोकल 18 को बताया, एक महीने पहले ही यूपीएससी सिविल सर्विस का परिणाम आया था उस समय कामयाबी नहीं मिली, जिसे उदास थी, लेकिन एक महीने के भीतर ही ऑल ओवर इण्डिया टॉपर बन गई

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कनिका ने लोकल 18 को बताया, मेरे लिए यह बहुत ही खुशी का पल है क्योंकि एक महीने पहले ही सिविल सर्विस एग्जाम का परिणाम आया था जिसको मैं क्वालीफाई नहीं कर पाई थी और यह मेरा तीसरा आइटम था ऐसे में मैं बहुत हताश थी, क्योंकि तीन बार एक्जाम क्रैक ना कर पाना किसी ट्रॉमा से कम नहीं होता लेकिन 1 महीने के भीतर ही आईएफएस का परिणाम आ गया और सोचा नहीं था कि फर्स्ट रैंक लेकर आऊंगी

हर दिन 8 से 9 घंटे की पढ़ाई
कनिका बताती हैं, प्रत्येक दिन 8 से 9 घंटे की पढ़ाई हो ही जाती थी लेकिन हां जब एग्जाम आता था तब तो 12 घंटे तक की पढ़ाई होती थी सुबह 7:00 बजे पढ़ने बैठ जाती थी इसके अतिरिक्त मेंस के दौरान खासतौर पर कुरुक्षेत्र और योजना जैसे मैगज़ीन और अपने बनाए हुए द हिंदू के नोट्स पर अधिक बल दिया न्यूजपेपर से छोटे-छोटे नोट्स बनाया करती थी वहीं मेरा करंट अफेयर का साधन था

इसके अतिरिक्त यदि प्रिलिम्स की बात करें तो, एनसीईआरटी पर अधिक फोकस किया खास तौर पर ज्योग्राफी और हिस्ट्री के लिए तो एनसीईआरटी की पुस्तक मेडिकल और असिएंट के लिए काफी लाभ वाला है उसको मैंने कई बार पढ़ा और पॉलिटी के लिए लक्ष्मीकांत को काफी अच्छे से पढ़ा साथ में एनसीईआरटी भी बार-बार रिवाइज करना और प्रीलिम्स के पहले कम से कम 50 सैंपल पेपर मैंने हल कर लिए होंगे

रांची से हुई है पढ़ाई
कनिका ने रांची की जेवीएम शामली से 12वीं तक की पढ़ाई की स्कूलिंग के बाद दिल्ली चली गई दिल्ली में मिरांडा हाउस कॉलेज से उन्होंने पढ़ाई की इसके बाद वो जेएनयू से भी पढ़ाई कर चुकी हैं फिलहाल कनिका रांची के बरियातू में अपने परिवार के साथ रहती हैं और उनके पिताजी सेवानिवृत्त अभय कुमार सिन्हा प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट न्यायधीश (खूंटी) से सेवानिवृत्त हो चुके हैं वहीं, उनकी माता अनीता सिन्हा एक गृहिणी हैं

साथ ही, फ्यूचर एस्पायरेंट्स को राय देते हुए बताती हैं आप फेल भी क्यों ना हो जाए लेकिन आपको इसमें लगे रहना होगा हार नहीं माननी है कामयाबी एक बार में नहीं मिलती यदि नहीं निकल रहा है तो आपको देखना होगा गलती कहां हो रही है अपने स्ट्रेटजी में परिवर्तन करें और फॉक्स रहे और कंसिस्टेंसी रखें 2021 से तैयारी प्रारम्भ की थी यानी मुझे यह कामयाबी चार वर्ष बाद मिली है ऐसे में आपको पेशेंस रखना होगा यह एग्जाम आपके सब्र की परीक्षा लेता है

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