पेट पर क्यों जमने लगती है चर्बी…
भारत में मर्दों के मुकाबले महिलाएं पेट के मोटापा से अधिक परेशान हैं। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-5 के डेटा की मानें तो राष्ट्र में 40% महिलाएं और 12% पुरुष पेट के मोटापे की परेशानी से जूझ रहे हैं। 23% महिलाएं और 22% पुरुष का वजन BMI (बॉडी-मास इंडेक्स) से अधिक है। स्टडी से पता चलता है कि 30-49 वर्ष की उम्र के बीच की 10 में से 5-6 महिलाएं पेट के मोटापे से पीड़ित हैं। सर्वे में ये भी पाया गया कि स्वस्थ महिलाएं भी पेट की अतिरिक्त चर्बी से पीड़ित हैं। इस वजह से उन्हें कई रोंगों का खतरा है।

महिलाओं और मर्दों में भिन्न-भिन्न होती है ओबेसिटी
हैदराबाद अपोलो हॉस्पिटल के न्यूरोलॉजिस्ट चिकित्सक सुधीर कुमार कहते हैं कि मोटापा दो ढंग का होता है। पेट पर जमा होने वाले फैट को एब्डोमिनल, सेंट्रल और ट्रंकल ओबेसिटी भी कहते हैं। ये मर्दों में अधिक होती है। इस ओबेसिटी को एंड्रॉयड ओबेसिटी कहते हैं।
दूसरी पेरिफेरल या गायोनॉयड ओबेसिटी होती है, जो कि स्त्रियों में अधिक होती है। स्त्रियों में होने वाली यह ओबेसिटी कमर के आस-पास, थाई और हिप पर चर्बी बढ़ाती है। ये खासकर प्री मेनोपॉज स्टेज में होता है क्योंकि उस समय में स्त्रियों में एस्ट्रोजन हॉर्मोन का स्तर कम होने लगता है।
महिलाओं का मोटापा मेनोपॉज के बाद अधिक खतरनाक
पुरुषों में एब्डोमिनल ओबेसिटी अधिक होती है। एब्डोमिनल ओबेसिटी अधिक रिस्की है। इस वजह से मर्दों में हार्ट अटैक और स्ट्रोक अधिक होता है। साथ ही, वो स्त्रियों की तुलना में अधिक ड्रिंक और स्मोक भी करते हैं। वहीं, स्त्रियों में मेनोपॉज के बाद ये स्थिति घातक हो जाती है क्योंकि उन्हें एस्ट्रोजन हॉर्मोन से जो प्रोटेक्शन मिल रही होती है, वो बंद हो जाती है।
ऐसे में जब महिलाएं अधिक कार्ब्स लेती हैं तो उनको हार्ट अटैक और ओबेसिटी से जुड़ी बीमारियां घेरने लगती हैं। मेनोपॉज के बाद स्त्रियों में भी एब्डोमिनल ओबेसिटी आ जाती है।
पेट पर क्यों जमने लगती है चर्बी?
डॉक्टर सुधीर कुमार कहते हैं कि बेली फैट के पीछे खाना और एक्सरसाइज न करना दो मुख्य कारण हैं। इसके अलावा, इसमें आदमी के ओवरऑल लाइफस्टाइल का भी काफी सहयोग होता है। लाइफस्टाइल में डाइट, सोना, फिजिकल एक्टिविटी और स्ट्रेस जैसी बातें शामिल हैं। इसके अतिरिक्त जेनेटिक कारण, हॉर्मोन्स में परिवर्तन भी इस मोटापे की एक वजह है।
अगर डाइट में प्रोटीन की मात्रा कम होती है, तो भी पेट पर चर्बी जमने लगती है। जो लोग नियमित रूप से खाने और ड्रिंक के जरिए ली गई कैलोरी को बर्न नहीं करते हैं, उनमें वजन बढ़ने की आसार अधिक होती है। इसमें पेट की चर्बी भी शामिल है।
ज्यादा कार्ब्स, कम प्रोटीन बढ़ाता है बेली फैट
डॉ। सुधीर कहते हैं, ‘कुछ लोगों को लगता है कि तोंद या बढ़ा हुआ पेट खराब लग रहा इसलिए इसे कम करना चाहिए। उन्हें यह नहीं पता कि ये लुक की बजाए हेल्थ के हिसाब से अधिक घातक है। लोगों को लगता है अधिक ऑयली और फैटी फूड आइटम खाने से फैट जमा होता है। जो कि सच नहीं है। हमारे राष्ट्र में बेली फैट का मुख्य कारण हमारा खानपान है। हम सब प्रोटीन युक्त नहीं कार्बोहाईड्रेट वाला फूड अधिक खाते हैं।’
वह बताते हैं कि लोगों की थाली में रोटी, चावल की मात्रा सब्जी और दाल से अधिक होती है। और जो लोग नॉनवेज नहीं खाते उनकी थाली में तो प्रोटीन होता ही नहीं है। इसके अतिरिक्त हम चीनीयुक्त खाना, चाय, कॉफी, मिठाई, आइसक्रीम के रूप में लगातार खा रहे हैं। लोग जितना कार्ब्स खाने में ले रहे हैं उसे बर्न नहीं करते हैं। वही कार्ब्स फैट में बदल जाता है।
गंभीर रोग को न्योता देती है पेट पर बढ़ी चर्बी
हमारे शरीर में भिन्न-भिन्न तरह के कई फैट होते हैं, जिनमें से 90 प्रतिशत फैट स्किन के नीचे होता है। सारे फैट एक-दूसरे से अलग होते हैं और शरीर में उनका रोल भी अलग होता है। बेली फैट के साथ परेशानी यह है कि यह स्किन के ठीक नीचे पैडेड लेयर तक सीमित नहीं है। बेली फैट में सबक्यूटेनियस फैट और विसरल फैट दोनों आते हैं। चिकित्सक सुधीर सबक्यूटेनियस और विसरल दोनों ही फैट को घातक बताते हैं।
विसरल फैट यानी कि पेट की चर्बी शरीर के अंदरूनी अंगों के आसपास होती है। यह वाइट फैट होता है, जो पेट के साथ लिवर, किडनी, आंत और हार्ट के आसपास जमा होता है। जब इसका स्तर बढ़ता है तो इससे डायबिटीज, दिल की बीमारी, स्ट्रोक, कुछ खास तरह के कैंसर भी हो सकते हैं। बेली फैट हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट डिजीज, हाई ब्लड शुगर और डायबिटीज, स्ट्रोक, फैटी लिवर, स्लीप डिसऑर्डर, कैंसर, खून में अतिरिक्त अनहेल्दी फैट की मात्रा जैसी रोंगों का घर है।
लाइफस्टाइल को सुधारने से सुधरेगी सेहत
बेली फैट की परेशानी ऐसी है जो सरलता से नहीं जाती। इसके लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती है। यदि आप अपने बेली फैट से परेशान हैं और उसे कम करना चाहते हैं तो आपको अपनी लाइफस्टाइल को लेकर थोड़ा कठोर होना पड़ेगा। सुबह का नाश्ता कभी न भूलें। नाश्ता स्किप करना आपके मेटाबॉलिज्म को बिगाड़ता है और फैट बर्निंग प्रोसेस को धीमा कर देता है।
दिनभर में जितनी कैलोरी लें उसकी खपत पर भी ध्यान दें। अच्छी हेल्थ के लिए अच्छी नींद भी महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में आपको अपनी नींद को बेहतर करना होगा। इसके अतिरिक्त पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं और एक्सरसाइज को नियमित दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।
<div class="ad3ccf1a" title="चीनी बना रही चाय को जहर: जलेबी हार्ट करेगी ब्लॉक, चीनी को अधिक देर तक उबालना खतरनाक; ऊपर से नमक खाने से किडनी खराब”>

