रिलेशनशिप- Gen-Z की बीच पॉपुलर क्यों हैं ‘बॉयसोबर’…
आजकल की भागदौड़ भरी जीवन में प्यार मिलना कठिन हो गया है. डेटिंग ऐप्स पर घंटों स्वाइप करना, किसी से मिलने की आशा करना और फिर घोस्टिंग का शिकार होना. इन सब चीजों से हम परेशान हो जाते हैं.

कभी-कभी ऐसा लगता है कि हम दूसरों को खुश करने की प्रयास में स्वयं को ही भूल जाते हैं. क्या आपने कभी सोचा कि थोड़ा रुककर, प्यार और रिश्तों से ब्रेक लेकर स्वयं पर ध्यान देना कितना महत्वपूर्ण हो सकता है?
जब आप अपने संबंध से दुखी हो जाते हैं और इस वजह से अपने बारे में सोचने लगते हैं, तो यहीं से ‘बॉयसोबर’ का विचार आता है. यह एक नया तरीका है जो आजकल युवाओं में, खासकर लड़कियों में बहुत पसंद किया जा रहा है. इसे डेटिंग डिटॉक्स भी बोला जाता है.
ऐसे में आज हम रिलेशनशिप में जानेंगे कि-
- ‘बॉयसोबर’ क्या है?
- ये कैसे और क्यों प्रारम्भ हुआ?
- Gen-Z की बीच पॉपुलर क्यों हैं?
- इसके लाभ और हानि क्या हैं?
‘बॉयसोबर’ क्या है और इसकी आरंभ कैसे हुई?
‘बॉयसोबर’ एक नया शब्द है, जिसे अमेरिकी कॉमेडियन होप वुडार्ड ने पहली बार इस्तेमाल किया. ‘बॉयसोबर’ मतलब डेटिंग, रोमांटिक रिश्तों और सेक्सुअल रिलेशनशिप से कुछ समय तक के लिए ब्रेक लेना है.
हालांकि, इसका मतलब हमेशा सिंगल रहना नहीं है. ये एक सोचा-समझा निर्णय होता है, जिसमें आप अपने लिए समय निकालते हैं. अपनी भावनाओं को समझते हैं. ये सोचते हैं कि आपको जीवन में क्या चाहिए?
होप वुडार्ड ने इसकी आरंभ तब की जब वो एक ऐसे आदमी के बारे में सोच-सोचकर परेशान हो रही थीं, जो शायद उनकी कदर ही नहीं करता था. एक दिन उन्हें एहसास हुआ कि वो अपनी इमोशंस को लेकर बेकार में परेशान हो रही हैं.
यहीं से उन्होंने निर्णय लिया कि अब डेटिंग को कुछ समय के लिए अलविदा कहने का समय है. उन्होंने इसे ‘बॉयसोबर’ नाम दिया, जो उनके लिए एक तरह का ‘लव लाइफ डिटॉक्स’ था.
लोग क्यों ले रहे हैं प्यार से ब्रेक?
इसके पीछे कई वजहें हैं. लोग डेटिंग से जुड़ी परेशानियों से थक जाते हैं. ऐसे में ब्रेक लेकर जीवन पर फोकस करना चाहते हैं. आइए इसे ग्राफिक के जरिए समझते हैं.
डेटिंग का दबाव कम करना
सोशल मीडिया और डेटिंग एप्स की वजह से हर कोई ‘परफेक्ट पार्टनर’ ढूंढने की शीघ्र में और दबाव में है. लोग ‘बॉयसोबर’ अपनाकर इससे दबाव से छुटकारा पाना चाहते हैं.
रोमांस के लिए डेसपरेट न होना
जब आप स्वयं से यह फैसला लेते हैं कि आपको अपने करियर और स्किल्स पर फोकस करना है, तो दिमाग इस बात को मान लेता है कि यह डेटिंग और रोमांस का समय नहीं है.
खुद को बेहतर समझना
रिश्तों में हम अक्सर अपनी पसंद-नापसंद को भूल जाते हैं. ‘बॉयसोबर’ का समय आपको मौका देता है. इससे सेल्फ-अवेयरनेस बढ़ती है और आप जरूरतों को समझ पाते हैं.
इमोशनल हीलिंग का मौका
ब्रेकअप या टॉक्सिक रिश्तों के बाद भावनात्मक रूप से ठीक होने के लिए समय चाहिए होता है. ‘बॉयसोबर’ पुराने दर्द से उबरने और नयी आरंभ करने की ताकत देता है.
दोस्ती और परिवार पर ध्यान
रिलेशनशिप के चक्कर में हम अपने दोस्तों और परिवार को कम समय दे पाते हैं. ब्रेक के दौरान आप इन रिश्तों पर ध्यान दे सकते हैं. इससे परिवार में भी कनेक्शन मजबूत होता है.
करियर और शौक को समय देना
डेटिंग में ढेर सारा समय और एनर्जी लगती है. ऐसे में आपका फोकस करियर या अपने पसंदीदा काम से हट सकता है. ब्रेक लेकर अपने लक्ष्यों और सपनों पर फोकस कर सकते हैं.
क्या यह ट्रेंड केवल स्त्रियों तक सीमित है या पुरुष भी इसमें शामिल हो रहे हैं?
‘बॉयसोबर’ शब्द में ‘बॉय’ होने की वजह से ऐसा लग सकता है कि ये केवल स्त्रियों के लिए है, जो मर्दों से ब्रेक लेना चाहती हैं.
हालांकि, ये ट्रेंड जेंडर-न्यूट्रल है. पुरुष भी इसमें शामिल हो सकते हैं. पुरुष भी रिश्तों के दबाव से परेशान हो सकते हैं. उन्हें भी अपनी भावनाओं को समझने के लिए समय की आवश्यकता पड़ सकती है.
‘बॉयसोबर’ का मकसद स्वयं को अहमियत देना और अपनी मेंटल और इमोशनल हेल्थ को बेहतर करना है.
लोग डेटिंग से ब्रेक क्यों ले रहे हैं? इसके पीछे क्या वजह है?
डेटिंग से ब्रेक लेने की हर किसी की अपनी वजह होती है. आइए कुछ मुख्य कारणों को बुलेट प्वाइंट्स के जरिए समझते हैं.
- डेटिंग ऐप्स से मानिसक थकान: लगातार स्वाइप करना, घोस्टिंग का सामना करना और बेमतलब की चैटिंग से लोग ऊब जाते हैं. साथ ही इससे स्क्रीन टाइम भी बढ़ता है, जो थकान का कारण बनती है.
- टॉक्सिक रिश्तों से बचने की कोशिश: ऐसे संबंध जो आपको इमोशनली और मेंटली रूप से कमजोर करते हैं, उनसे दूर रहने के लिए ब्रेक महत्वपूर्ण है.
- सेल्फ-लव पर फोकस: खुद से प्यार करना और अपनी खुशी को पहले रखना भी ‘बॉयसोबर’ की वजह है.
- करियर पर फोकस: रिश्तों की उलझनों से बचकर अपने काम या पढ़ाई पर ध्यान देना.
- इमोशनल स्टेबिलिटी: रिश्तों के उतार-चढ़ाव से बचकर मानसिक शांति पाना.
‘बॉयसोबर’ के लाभ और नुकसान
हर चीज के दो पहलू होते हैं और ‘बॉयसोबर’ भी इससे अलग नहीं है. आइए इसके लाभ और हानि को ग्राफिक के जरिए समझते हैं.
‘बॉयसोबर’ के फायदे
अपनी भावनाओं और जरूरतों को समझना‘बॉयसोबर’ आपको अपनी सोच और भावनाओं को गहराई से जानने का मौका देता है. आप अपनी जीवन की प्राथमिकताएं तय कर सकते हैं.
इमोशनली स्टेबल होना
अगर आप किसी ब्रेकअप या टॉक्सिक संबंध से गुजरे हैं, तो ‘बॉयसोबर’ समय पुराने दर्द से उबरने में सहायता करता है. आप स्वयं को मजबूत और खुशहाल महसूस करने लगते हैं.
भावनाओं पर नियंत्रण
इस दौरान आप अपनी भावनाओं को काबू में करना सीखते हैं. इससे आप जल्दबाजी में रिश्तों में नहीं पड़ते और सोच-समझकर निर्णय ले पाते हैं.
आत्मनिर्भरता का विकास
‘बॉयसोबर’ आपको अकेले रहकर भी खुश रहने की कला सिखाता है. आप स्वयं पर निर्भर होना सीखते हैं, जिससे आत्मविश्वास बढ़ता है.
खुद के लिए समय निकालना
यह समय आपको अपनी हॉबी और स्किल्स पर काम करने का मौका देता है. इससे आपकी जीवन में अधिक खुशहाल और संतुष्ट महसूस करते हैं.
जिंदगी में स्पष्टता
आप यह समझ पाते हैं कि आपके लिए क्या सबसे महत्वपूर्ण है. चाहे वह करियर हो, परिवार हो या प्यार. इससे भविष्य के निर्णय लेना आसान हो जाता है.
‘बॉयसोबर’ के नुकसान
अकेलेपन का एहसास
कभी-कभी अकेलापन महसूस हो सकता है. खासकर, जब आपके दोस्त रिश्तों में व्यस्त हों. यह उदासी या खालीपन का कारण बन सकता है.
सामाजिक दबाव का सामना
रिश्ते में न होने पर दोस्तों और परिवार के लोग प्रश्न कर सकते हैं कि आप अब तक सिंगल क्यों हैं? इससे आत्मविश्वास पर असर पड़ सकता है.
अत्यधिक सोच-विचार
अकेले समय बिताने से ओवरथिंकिंग की परेशानी हो सकती है. रिश्तों और जीवन को लेकर आवश्यकता से अधिक विचार मन में आ सकते हैं, जिससे तनाव बढ़ता है.
प्यार और साथ की कमी
किसी के साथ भावनात्मक जुड़ाव और प्यार की कमी खल सकती है. यह अधूरेपन का एहसास करा सकता है.
दोबारा डेटिंग में परेशानी
लंबे समय तक रिश्तों से दूर रहने के बाद डेटिंग की दुनिया में वापस आना कठिन लग सकता है. आपको आत्मविश्वास की कमी या असहजता महसूस हो सकती है.

