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Zero Shadow Day : शून्य छाया दिवस के पीछे का विज्ञान

Zero Shadow Day In India: दुनिया के कुछ इलाकों में बुधवार को एक अनूठी खगोलीय घटना घटेगी कुछ मिनटों के लिए ही सही, सारी परछाइयां कहीं गायब हो जाएंगी इसे Zero Shadow Day या शून्य छाया दिवस कहते हैं हिंदुस्तान में ऐसा बेंगलुरु और उसी अक्षांशों पर उपस्थित लोकेशंस पर होगा बेंगलुरु में दोपहर 12.17 बजे से लेकर 12.23 बजे के बीच, जीरो शैडो डे होगा इन 6 मिनटों के दौरान, किसी भी चीज की परछाई नहीं बनेगी ऐसा इसलिए होगा क्योंकि सूर्य हमारे सिर पर बिल्कुल परफेक्ट लोकेशन पर उपस्थित रहेगा इससे वर्टिकल यानी खड़ी चीजों की कोई परछाई नहीं बनती Zero Shadow Day हर वर्ष दो  बार आता है यह खगोलीय घटना कर्क रेखा और मकर रेखा के बीच उपस्थित इलाकों में होती है बेंगलुरु में हर वर्ष 24/25 अप्रैल और फिर 18 अगस्त को ‘जीरो शैडो डे’ पड़ता है बेंगलुरु के अतिरिक्त कन्याकुमारी, भोपाल, हैदराबाद और मुंबई में भी यह घटना देखने को मिल सकती है आइए, आपको Zero Shadow Day के पीछे की साइंस समझाते हैं

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एस्ट्रोनॉमिकल सोसायटी ऑफ इण्डिया के अनुसार, जीरो शैडो डे +23.5 और -23.5 डिग्री अक्षांशों के बीच के स्थानों में वर्ष में दो बार होता है जीरो शैडो डे तब होता है जब आसमान में सूर्य अपने चरम पर होता है दूसरे शब्दों में, उस समय सूर्य किसी खास अक्षांश के ऊपर उपस्थित होता है इसकी वजह से सूर्य की किरणें 90 डिग्री के एंगल पर धरती से टकराती हैं इससे खड़ी चीजों की परछाई समाप्त हो

 

जीरो शैडो डे एक अनूठी घटना है जो पृथ्वी के एक्सियल टिल्ट (अक्षीय झुकाव) और सूर्य के चारों तरफ ऑर्बिटल मोशन (कक्षीय गति) की वजह से होती है यह पृथ्वी और सूर्य के बीच संबंध को जाहिर करने वाली एक अहम खगोलीय घटना है

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पृथ्वी अपने ऑर्बिटल प्लेन के मुकाबले धुरी पर करीब 23.5 डिग्री झुकी हुई है इस झुकाव की वजह से आसमान में सूर्य की पोजीशन लगातार बदलती रहती है पृथ्वी के इस झुकाव की वजह से ही मौसम बदलते हैं और दिन घटते-बढ़ते रहते हैं यही झुकाव तय करता है कि किस समय पर सूर्य की सीधी रोशनी कहां पड़ेगी

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