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क्या उद्धव गुट के लिए सभी रास्ते बंद हो गए हैं या अब भी उनके पास है कोई विकल्प…

Maharashtra Assembly Speaker Rahul Narwekar in Shiv Sena MLAs disqualification case:  महाराष्ट्र विधानसभा के स्पीकर राहुल नार्वेकर ने शिंदे गुट से जुड़े 16 विधायकों की आयोग्यता से जुड़े मुद्दे में अपना निर्णय सुनाया है, जिससे उद्धव गुट को बड़ा झटका लगा है स्पीकर ने अपने निर्णय में शिंदे गुट की शिवसेना को ही वास्तविक शिवसेना माना है उन्होंने बोला कि उद्धव ठाकरे के पास एकनाथ शिंदे को हटाने का कोई अधिकार नहीं था अब प्रश्न यह उठता है कि क्या उद्धव गुट के लिए सभी रास्ते बंद हो गए हैं या अब भी उनके पास कोई विकल्प है? आइए, इन सभी प्रश्नों के उत्तर जानते हैं…

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सुप्रीम न्यायालय उद्धव गुट का अंतिम सहारा

स्पीकर के निर्णय के बाद अब उद्धव गुट के पास एक ही रास्ता बचा है वह है- सुप्रीम कोर्ट पूर्व सीएम उद्धव ठाकरे ने निर्णय के पहले ही घोषणा कर दिया था कि यदि उनके अधिकार में फैसला नहीं आता तो वे शीर्ष न्यायालय का रुख करेंगे यही बात, एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने भी निर्णय के बाद कही

उद्धव ठाकरे को उच्चतम न्यायालय जाना होगा: शरद पवार

पवार ने बोला कि उद्धव ठाकरे को उच्चतम न्यायालय जाना होगा वहीं पर उन्हें इन्साफ मिलने की आशा है इसके अलावा, उद्धव गुट के नेता अंबादास दानवे ने भी बोला कि हम निर्णय के विरुद्ध शीर्ष न्यायालय में जाएंगे उन्होंने बोला कि न्यायालय ने सुभाष देसाई के मुद्दे में बोला था कि पार्टी संगठन ही जरूरी है

एकनाथ शिंदे की कुर्सी पर मंडरा रहा खतरा टला

गौरतलब है कि स्पीकर राहुल नार्वेकर के निर्णय के बाद अब एकनाथ शिंदे की कुर्सी पर मंडरा रहा खतरा समाप्त हो गया है वे मुख्यमंत्री बने रहेंगे स्पीकर ने अपने निर्णय का आधार शिवसेना के 1999 के संविधान को बताया उन्होंने बोला कि 2018 के संशोधित संविधान को वैध नहीं बताया जा सकता यह चुनाव आयोग के रिकॉर्ड में नहीं है

20 जून 2022 को शिंदे ने शिवसेना से की बगावत

बता दें कि 20 जून 2022 को एकनाथ शिंदे ने 39 विधायकों के साथ पार्टी से बगावत कर दी और बीजेपी के साथ गठबंधन कर गवर्नमेंट बना ली शिंदे मुख्यमंत्री तो देवेंद्र फडणवीस डिप्टी मुख्यमंत्री चुने गए इसके बाद उद्धव गुट ने दल-बदल कानून ने अनुसार पहले स्पीकर को नोटिस दिया, इसके बाद उच्चतम न्यायालय का रुख किया दोनों गुटों के बीच वास्तविक शिवसेना को लेकर टकराव है दोनों ने एक-दूसरे के विधायकों को अयोग्य ठहराने की मांग करते हुए शीर्ष न्यायालय में याचिका दाखिल की है अब देखना यह है कि उच्चतम न्यायालय से किस गुट को राहत मिलती है

 

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