ज्ञानवापी को मस्जिद बताने वालों को मुस्लिम स्कॉलर ने दी ये सलाह, कहा…
वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर के पास ज्ञानवापी मस्जिद को लेकर टकराव चल रहा है। इसी बीच ASI की सर्वे रिपोर्ट में बड़ा दावा किया गया और बोला गया कि मस्जिद का निर्माण मंदिर के ऊपर किया गया है। वहीं मस्जिद के तहखाने में कन्नड़, तेलुगु और देवनागरी लिपियों में कई शिलालेख मिले हैं जो यहां पर मंदिर होने की पुष्टि करते हैं। इस मुद्दे में विश्वि हिंदू परिषद पहले ही कह चुका है कि मुसलमान समुदाया को ज्ञानवापी हिंदुओं को सौंप देनी चाहिए। यही बात अब मुसलमान स्कॉलर ने भी कही है।

इस संबंध में जमीयत हिमायतुल इस्लाम, सहारनपुर, यूपी के अध्यक्ष और मुसलमान विद्वान कारी अबरार जमाल ने मुसलमानों को एक राय दी है। उन्होंने बोला कि मुस्लिमों को हिंदुओं के साथ बैठकर समझौता कर लेना चाहिए। इसके अतिरिक्त उन्होंने एएसआई रिपोर्ट को गलत बताने वालों को लताड़ भी लगाई।
टुकड़े-टुकड़े गैंग वाले खारिज कर रहे सर्वे रिपोर्ट
कारी ने कहा, जो लोग ज्ञानवापी पर एएसआई की रिपोर्ट कको खारिज कर रहे हैं वे टुकड़े-टुकड़े गैंग से हैं। सर्वे न्यायालय के ऑर्डर पर किया गया था क्या इन लोगों को अब न्यायालय पर भी भरोसा नहीं रहा? क्या अब ये लोग न्यायालय और राष्ट्र को भी बांट देना चाहते हैं। उन्होंने आगे कहा, आरएसस चीफ पहले ही कह चुके हैं कि हिंदुओं को सभी मस्जिदों में शिवलिंग की तलाश नहीं करनी है। अब मुस्लिमों को भी बड़ा दिल दिखाना चाहिए और सहमति बनाने के लिए हिंदुओं के साथ बैठकर बात करनी चाहिए। उन्होंने बोला कि अफगानिस्तान के पहले विघटन का कारण टुकड़े-टुकड़े गैंग ही था। बाद में पाक और बांग्लादेश भी अलग हो गए। उन्होंने चिंता जताई कि अब ये लोग इस राष्ट्र को तोड़ने की प्रयास कर रहे हैं।
प्राण प्रतिष्ठा में भी मिला था न्योता
मुस्लिम स्कॉलर को अयोध्या में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा में भी आमंत्रित किया गया था। उन्होंने कहा, मैं राम मंदिर ट्रस्ट के लोगों को धन्यवाद देता हूं। उन्होंने मुझे योग्य समझा और निमंत्रण भेजा। उन्होंने हमें वहां बुलाया और हमारा सम्मान किया। यह सम्मान हमारे लिए ऐतिहासिक है। बता दें कि ज्ञानवापी टकराव को लेकर हिंदू औऱ मुसलमान दोनों पक्षों ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। इसके बाद न्यायालय ने सर्वे का आदेश दिया था। यह रिपोर्ट अब हिंदू और मस्लिम पक्षकारों को सौंप दी गई है। रिपोर्ट में कई ऐसी बातें थीं जो कि संकेत करती हैं कि मंदिर के ऊपर ही मस्जिद बनाया गया था।

