राष्ट्रीय

ट्रेन से यात्रा करने वाले दृष्टिबाधितों की सुविधा को लेकर हाई कोर्ट ने दिया महत्वपूर्ण निर्देश

नई दिल्ली: दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को ट्रेन से यात्रा करने वाले दृष्टिबाधितों की सुविधा को लेकर एक जरूरी निर्देश दिया है न्यायालय ने रेलवे को दृष्टिबाधितों को बड़े स्टेशनों पर निःशुल्क मानव सहायता प्रदान करने को बोला है कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनमोहन की प्रतिनिधित्व वाली एक बेंच रेलयात्रा को दिव्यांगों के अनुकूल बनाने के विषय पर स्वत: संज्ञान लेते हुए एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी बेंच ने रेलवे को अपनी तरफ से या CSR (कॉरपोरेट सामाजिक जिम्मेदारी) पहल के माध्यम से यह सुविधा प्रदान करने पर विचार करने को कहाNewsexpress24. Com india tv hindi download 85
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‘दृष्टिबाधितों को निःशुल्क एस्कॉर्ट की सुविधा नहीं है’

कोर्ट की सहायता के लिए न्यायालय मित्र के रूप में पेश वरिष्ठ वकील एस के रूंगटा ने न्यायालय को कहा कि रेलवे ने स्टेशनों पर व्हीलचेयर प्रदान किये हैं लेकिन उसने दृष्टिबाधितों को निःशुल्क एस्कॉर्ट या सहायक देने से इनकार कर दिया है रूंगटा ने न्यायालय से इस मामले पर फैसला लेने का आग्रह किया जस्टिस मनमोहन और जस्टिस मनमीत पी एस अरोड़ा की बेंच ने सरकारी वकील से कहा, ‘इतनी अधिक बेरोजगारी है सहायक व्हीलचेयर चलायेंगे (यदि पैसे की परेशानी है तो) आप कुछ CSR पहल प्रारम्भ कर सकते हैं

कोर्ट ने कहा, बड़े शहरों में प्रारम्भ करें सुविधा

सरकारी वकील ने बोला कि राष्ट्र में 10 हजार से अधिक रेलवे स्टेशन हैं और निःशुल्क मानवीय सहायता प्रदान करने में ‘व्यावहारिक दिक्कतें’ हैं न्यायालय ने कहा,‘आप महानगर में हैं दिल्ली, कलकत्ता, बड़े स्टेशनों पर प्रारम्भ कीजिएन्यायालय ने इस मुद्दे की अगली सुनवाई की तारीख 20 मार्च तय की और रेलवे से अतिरिक्त हलफनामा देने को कहा न्यायालय ने 2017 में एक समाचार के आधार पर इस विषय का स्वत: संज्ञान लिया था समाचार के मुताबिक दिव्यांगों के विशेष डिब्बे का दरवाजा बंद कर दिया गया था और उस वर्ष एक पुरुष दिल्ली यूनिवर्सिटी में एमफिल की परीक्षा नहीं दे पाया था

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