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पंजाब में सीट शेयरिंग पर नहीं बन रही बात, उठे बड़ा सवाल

Lok Sabha Election 2024  :तृणमूल कांग्रेस पार्टी ने साफ कर दिया है कि वह पश्चिम बंगाल की सभी लोकसभा सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेगी आम आदमी पार्टी पंजाब की सभी सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेगी, लेकिन दिल्ली, गुजरात, गोवा, हरियाणा, चंडीगढ़ में कांग्रेस पार्टी के साथ मिलकर लड़ेगी इसके लिए दोनों दल के नेताओं ने शनिवार को सीट बंटवारे की घोषणा की आम आदमी पार्टी और कांग्रेस पार्टी की इस प्रेस कांफ्रेंस में इण्डिया गठबंधन का कोई और साझेदार शामिल नहीं हुआ जब तृणमूल कांग्रेस पार्टी ने पश्चिम बंगाल में अकेले सभी सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा की तब भी गठबंधन में शामिल कोई दल वहां उपस्थित नहीं था

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ऐसे में अब बड़ा प्रश्न यह उठ रहा है कि विपक्ष का यह कैसा गठबंधन है, जो सब भिन्न-भिन्न घोषणाएं कर रहे हैं जिस सियासी दल का जहां असर है, वह अपने क्षेत्र में गठबंधन के किसी सहयोगी दल को एक भी सीट देने को तैयार नहीं है बोला तो यहां तक जा रहा है कि गठबंधन का राष्ट्रीय स्वरूप बचेगा भी या नहीं? उपस्थित सूरत-ए-हाल तो यही गवाही दे रहे हैं आम आदमी पार्टी और कांग्रेस पार्टी की आज की संयुक्त घोषणा में भी यह बात लागू होती है कारण साफ है जो आम आदमी पार्टी दिल्ली, हरियाणा, चंडीगढ़, गुजरात और गोवा में कांग्रेस पार्टी के साथ मिलकर चुनाव लड़ने को तैयार है, वह पंजाब में कांग्रेस पार्टी को एक भी सीट नहीं दे रही है इस राज्य में दोनों भिन्न-भिन्न चुनाव लड़ेंगे अभी तक जो सीन बना है, वह इस बात का संकेत देने को पर्याप्त है कि गठबंधन की दीवारें दरक रही हैं या यूं भी कह सकते हैं कि जिस राज्य में जिस दल का असर अधिक है, वहां वह कांग्रेस पार्टी को कुछ सीटें देगी

 

वोट फीसदी ज्यादा, फिर भी दिल्ली में कांग्रेस पार्टी को मिलीं 3 सीटें

साल 2019 के चुनाव में दिल्ली की सभी सातों सीटों पर बीजेपी ने जीत दर्ज की थी इस चुनाव में दिल्ली में बीजेपी को कुल 56.9 प्रतिशत वोट मिले थे 22.6 प्रतिशत वोट पाने वाली कांग्रेस पार्टी को कोई सीट नहीं मिली थी और हल्की वोट पाने वाली आम आदमी पार्टी भी शून्य पर थी इसके बावजूद आम आदमी पार्टी ने दिल्ली की केवल तीन सीटें कांग्रेस पार्टी के लिए छोड़ी है चार पर स्वयं चुनाव लड़ेगी

पंजाब में एक दूसरे के विरुद्ध चुनाव लड़ेंगी कांग्रेस-AAP

पंजाब में वर्ष 2019 चुनाव में 40.6 प्रतिशत वोट और आठ सीटों पर जीत दर्ज करने वाली कांग्रेस पार्टी को आम आदमी पार्टी ने वहां एक भी सीट न देते हुए अकेले चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी है, जबकि उसे केवल 7.5 प्रतिशत वोट मिले थे और एक सीट पर जीत दर्ज की थी यह अपने आप में हास्यास्पद है कि हरियाणा, दिल्ली, चंडीगढ़ में साथ चुनाव लड़ने वाली कांग्रेस-आप, पंजाब में एक-दूसरे के विरुद्ध आग उगलेंगी

 

उत्तर प्रदेश में 63-17 का फॉर्मूला तय

समाजवादी पार्टी ने यूपी की 80 सीटों में से 17 कांग्रेस पार्टी को दी है या यूं भी कह सकते हैं कि दोनों ने सहमति से यह बंटवारा किया है पश्चिम बंगाल में सभी सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने की घोषणा कर चुकी तृणमूल कांग्रेस पार्टी ने असम में दो और मेघालय में भी एक सीट पर लड़ने की घोषणा की है जानकार दावा कर रहे हैं कि असम-मेघालय के मामले पर कांग्रेस-टीएमसी में वार्ता चल रही है

TMC से वार्ता की अभी भी आशा कायम

उधर, कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश को अभी भी आशा है कि ममता बनर्जी के दल से कांग्रेस पार्टी की वार्ता समाप्त नहीं हुई है वे कहते हैं कि 26 सियासी दल अभी भी गठबंधन का हिस्सा हैं और सब एकजुट हैं ममता बनर्जी, अरविंद केजरीवाल अनेक बार विभिन्न मंचों से यह दावा कर चुके हैं कि वे विपक्षी गठबंधन का हिस्सा हैं मोदी को सत्ता से हटाने को कोई भी कुर्बानी देंगे लेकिन सीट शेयरिंग पर वह जज्बा नहीं दिखाई दे रहा है, जो महत्वपूर्ण समझा जा रहा है

 

कई राज्यों में क्षेत्रीय दलों की कृपा पर कांग्रेस पार्टी को मिल रहीं सीटें

उधर, महाराष्ट्र में विपक्षी गठबंधन का जरूरी हिस्सा उद्धव ठाकरे ने हाल ही में प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी की प्रशंसा में कसीदे पढ़े थे, ऐसा तब जब महाराष्ट्र में गठबंधन दल ने सीटों पर भी वार्ता को आखिरी रूप दे दिया है लेकिन मोदी की प्रशंसा के बाद उद्धव को लेकर सियासी गलियारों में तरह-तरह के प्रश्न उठा रहे हैं ध्यान रहे कि शिवसेना और उद्धव ठाकरे ने वर्ष 2019 के चुनाव में बीजेपी के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था बाद में बीजेपी ने शिवसेना को दो फाड़ कर दिया और विरोधी गुट के नेता एकनाथ शिंदे बीजेपी के ही समर्थन से आज मुख्यमंत्री हैं विपक्षी गठबंधन की नींव रखने वाले नीतीश कुमार और जयंत चौधरी एनडीए पहुंच चुके हैं आज कांग्रेस पार्टी की स्थिति यह है कि उसे यूपी, बिहार, झारखंड, तमिलनाडु, महाराष्ट्र जैसे राज्य में क्षेत्रीय दलों की कृपा पर ही सीटें मिलने जा रही हैं, जो गठबंधन की मजबूती को कमजोर करते हैं देखना रोचक होगा कि आगे गठबंधन क्या रुख लेता है?

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