मध्य प्रदेश में 2028 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए सपा ने कसी कमर
MP Politics: मध्य प्रदेश की राजनीति में नया मोड़ आ रहा है. मुख्यमंत्री मोहन यादव के गढ़ में सपा (सपा) नए जोश के साथ एंट्री करती दिख रही है. मध्य प्रदेश में 2028 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए समाजवादी पार्टी ने कमर कस ली है. ऐसा इसलिए, क्योंकि 19 और 20 सितंबर को खजुराहो में समाजवादी पार्टी के 500 चुनिंदा कार्यकर्ताओं की ट्रेनिंग आयोजित की जा रही है.

इस ट्रेनिंग में उत्तर प्रदेश के 4 समाजवादी पार्टी सांसदों सहित कुल 10 कद्दावर नेता हिस्सा लेंगे. यहां एमपी के सपाइयों को उत्तर प्रदेश की रणनीति का फंडा समझाया जाएगा, ताकि उसी राह पर चलकर प्रदेश में समाजवादी पार्टी अपना झंडा बुलंद कर सके. वहीं, सियासी गलियारों में चर्चा ये भी प्रारम्भ हो गई कि क्या समाजवादी पार्टी सुप्रीमो अखिलेश यादव राष्ट्रीय राजनीति में मजबूत पैठ बनाने की बड़ी प्लानिंग कर रहे हैं?
खजुराहो में प्रांतीय कार्यालय भी बन रहा
खजुराहो को ट्रेनिंग स्थल के रूप में चुनना कोई संयोग नहीं है. यह क्षेत्र बुंदेलखंड और विंध्य का हिस्सा है, जहां समाजवादी पार्टी का पहले से अच्छा असर रहा है. छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, पन्ना, रीवा, सतना, भिंड, सीधी और बालाघाट जैसे जिलों में पार्टी की जड़ें मजबूत हैं. खजुराहो की एयरपोर्ट कनेक्टिविटी और यूपी-एमपी बॉर्डर की निकटता इसे सुविधाजनक बनाती है. इतना ही नहीं, समाजवादी पार्टी यहां प्रांतीय कार्यालय भी बना रही है. जमीन खरीदकर निर्माण कार्य प्रारम्भ हो चुका है. यह कदम दर्शाता है कि समाजवादी पार्टी एमपी को केवल चुनावी मैदान नहीं, बल्कि स्थायी आधार बनाने की सोच रही है.
ये केवल प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं…
वहीं, समाजवादी पार्टी प्रदेश अध्यक्ष डाक्टर मनोज यादव ने कहा, “ये केवल प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं, बल्कि पार्टी की नीतियों को जनता तक पहुंचाने का माध्यम है. हम किसानों, स्त्रियों और करप्शन के मुद्दों पर लगातार आवाज उठा रहे हैं. नगरीय निकाय चुनावों में हमारा प्रदर्शन मजबूत होगा. 2028 में हम तीसरा विकल्प नहीं, बल्कि गवर्नमेंट बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं.” यह बयान समाजवादी पार्टी की महत्वाकांक्षा को जाहिर करता है.
सपा ने जीतीं हैं कुछ सीटें
समाजवादी पार्टी ने पहले भी मध्य प्रदेश में चुनाव जीते हैं, लेकिन बहुत कम सीटें. खासतौर पर, पार्टी ने 1998 के मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में 4 सीटें और 2003 में 7 सीटें जीती थीं. उसके बाद, 2008 में केवल 1 सीट और 2018 में फिर से 1 सीट जीतकर इसका प्रदर्शन गिरता गया. हाल के चुनावों, जैसे कि 2023 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने कोई सीट नहीं जीती और सिर्फ़ 0.46% वोट शेयर हासिल किया, जिससे मध्य प्रदेश में उसके असर में उल्लेखनीय गिरावट आई.
इंडिया गठबंधन की प्लानिंग तो नहीं!
ट्रेनिंग में उत्तर प्रदेश के दिग्गजों का आना, मतलब एमपी में उत्तर प्रदेश मॉडल पर काम करने की प्लानिंग है. सियासी विश्लेषकों का मानना है कि इस कदम से समाजवादी पार्टी राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी गठबंधन में अपनी किरदार मजबूत करना चाहती है. क्या यह इण्डिया गठबंधन की राष्ट्रीय रणनीति का हिस्सा है या अखिलेश की पर्सनल महत्वाकांक्षा? ये तो आने वाले दिन बताएंगे, लेकिन खजुराहो से प्रारम्भ हुई यह हलचल एमपी की राजनीति को गर्मा सकती है. समाजवादी पार्टी की यह तैयारी बीजेपी और कांग्रेस पार्टी दोनों को सावधान कर रही है.

