यह पर्वत पूरे सालभर रहता है हरा-भरा, भगवान राम ने दिया था वरदान
हिंदूओं के लिए चित्रकूट धार्मिक स्थानों में से एक है। यहां के कण-कण में ईश्वर राम, माता सीता और लक्ष्मण की यादें बसी हुई हैं। आज हम चित्रकूट में एक ऐसे पहाड़ के बारे में आपको बताने जा रहे हैं, जिसमें लगे पेड़ पौधे पूरे वर्ष हरे भरे रहते हैं। जी हां, हम बात कर रहे हैं धर्म नगरी चित्रकूट के कामदगिरि पहाड़ की। इस पहाड़ में लगे पेड़-पौधे पूरे वर्ष हरे भरे रहते हैं।मान्यताएं और कहावतों में बोला जाता है कि जो भी इस पर्वत के दर्शन करता है, उसकी सारी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
मान्यता है वनवास काल के दौरान प्रभु श्री राम, माता जानकी और भाई लक्ष्मण के साथ चित्रकूट आए थे। जहां उनकी रक्षा के लिए 108 गंगाए और 52 देवीया भी चित्रकूट आई थी। वनवास काल के साढ़े ग्यारह साल चित्रकूट में बिताने के बाद वह दंगक वन की ओर चले गए, लेकिन श्री राम उनके साथ आई 108 गंगाए और 52 देवीयो को वह चित्रकूट में ही रहने के लिए कहकर चले गए। इसी कारण कामदगिरि पर्वत हमेशा हरा-भरा रहता है। इस पर्वत की मान्यता यह है कि स्वयं प्रभु राम ने इस पर्वत को वरदान दिया है।
अचल तीर्थ है कामदगिरि पर्वत
चित्रकूट बरहा के हनुमान मंदिर के पुजारी अमित तिवारी ने कहा कि कामदगिरि पर्वत अचल तीर्थ है। ईश्वर राम को जब वनवास काल हुआ, तब उन्होंने चित्रकूट में निवास किया और साढ़े ग्यारह साल संतो के साथ उन्होंने इस पर्वत की पूजा की। माता जानकी की रक्षा के लिए अयोध्या से 52 देवीया , 108 गंगाए साथ में चली थी। जब यहां से साधना पूरी हो गई और श्री राम जाने लगे, तब श्री राम और माता जानकी ने संतो के साथ आर्शीवाद दिया कि जो भी शक्तियां मेरे साथ आई हैं, मैं उनको इस पर्वत में विद्यमान करती हूं। तब से वो 108 गंगा और 52 देवीया भी विद्यमान हैं।इस पर्वत में शक्तियों का एहसास आज भी देखा जा सकता है। मान्यता यह भी है कि चित्रकूट में की गई तपस्या कभी बेकार नहीं होती है।

