‘राजमा’ को लेकर जारी सेना और केंद्रीय भंडार के बीच कानूनी जंग पर सुप्रीम कोर्ट ने लगा दिया विराम
‘राजमा’ को लेकर जारी सेना और केंद्रीय भंडार के बीच कानूनी जंग पर उच्चतम न्यायालय ने विराम लगा दिया है, क्योंकि रक्षा मंत्रालय केंद्रीय भंडार से सेना के लिए राजमा की आपूर्ति को लेकर जारी कानूनी जंग हार गया है। रक्षा मंत्रालय गुरुवार को केंद्रीय भंडार से सेना खरीद संगठन (एपीओ) को राजमा की कम आपूर्ति पर एक दशक पुरानी कानूनी लड़ाई हार गया, जिसे मध्यस्थ ने 2012 से 7.5% ब्याज के साथ केंद्रीय भंडार को 44.5 लाख रुपये की नकद बैंक गारंटी राशि वापस करने का निर्देश दिया था।

केंद्रीय भंडार की हुई जीत
यहां ध्यान देने वाली बात है कि रक्षा मंत्रालय और केंद्रीय भंडार के बीच राजमा को लेकर कानूनी जंग लंबे समय से जारी थी। उच्चतम न्यायालय की तीन सदस्यीय बेंच ने दिल्ली उच्च न्यायालय और ट्रायल को न्यायालय के आदेश को बरकरार रखा है, जिसमें गारंटी की राशि को वापस लौटाने के लिए बोला गया था। वर्ष 2011 में आर्मी पर्चेज ऑर्गेनाइजेशन यानी APO की तरफ से 1200 टन राजमा के लिए टेंडर जारी किया गया था। रक्षा सेवाओं को यह आपूर्ति 4.44 करोड़ रुपये में की जानी थी। इसका कॉन्ट्रैक्ट हासिल करने वाले केंद्रीय भंडार ने 44.5 लाख रुपये की बैंक गारंटी दी थी। बाद में राजमा की क्वालिटी पर प्रश्न उठे और एपीओ यानी आर्मी पर्चेज ऑर्गनाइजेशन की तरफ से कॉन्ट्रैक्ट को रद्द कर दिया गया।
2012 में रद्द हुआ था कॉन्ट्रैक्ट
दरअसल, यह कॉन्ट्रैक्ट वर्ष जनवरी 2012 में रद्द किया गया था। जब तक दोनों के बीच यह कॉन्टैक्ट रद्द होता, तब तक केंद्रीय भंडार रक्षा मंत्रालय को 310 टन राजमा की सप्लाई कर चुका था। साथ ही केंद्रीय भंडार की तरफ से दी गई गारंटी को भी निकाल लिया गया। इसके बाद जब केंद्रीय भंडार की ओर से गारंटी की धनराशि वापस मांगी गई, तब आर्मी पर्चेज ऑर्गनाइजेशन ने तर्क दिया कि उन्हें खुले बाजार से राजमा खरीदना पड़ा था। वहीं, इसी मुद्दे में बनाए गए मध्यस्थ ने पाया था कि इस बात के कोई सबूत नहीं हैं कि आर्मी पर्चेज ऑर्गनाइजेशन ने केंद्रीय भंडार की तरफ से दी गई मूल्य से अधिक महंगे मूल्य पर बाजार से राजमे की खरीद की थी।
मामला पहुंचा उच्चतम न्यायालय तो क्या हुआ ?
इसके बाद यह मुद्दा उच्चतम न्यायालय पहुंचा और चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने इस मुद्दे की सुनवाई की। रक्षा मंत्रालय की ओर से एटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने अपना पक्ष रखा। न्यायालय ने एटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी से बोला कि यहां कॉन्ट्रैक्ट का उल्लंघन हुआ है और एपीओ को यह साबित करना होगा कि खुले बाजार से राजमा खरीदने के चलते उसे हानि हुआ है। उच्चतम न्यायालय ने बोला आपको यह बताना होगा कि आपको कितना हानि हुआ है। ट्रायल न्यायालय और उच्च न्यायालय दोनों ने ही अवॉर्ड को बरकरार रखा है। अब इस मुद्दे में हमें दखल क्यों देना चाहिए। दरअसल न्यायालय ने एपीओ को केंद्रीय भंडार को बैंक गारंटी की धनराशि 7.5 प्रतिशत ब्याज रेट के साथ लौटाने के आदेश दिए गए थे।

